शहरी-चूहा-और-ग्रामीण-चूहा

शहरी चूहा और ग्रामीण चूहा

जानवरों की कहानियाँ

एक समय की बात है, एक शहरी चूहा और एक ग्रामीण चूहा रहते थे। एक दिन ग्रामीण चूहे ने शहरी चूहे को अपने घर आमंत्रित किया। ग्रामीण चूहे ने जब भोजन परोसा तो शहरी चूहा निराश हो गया। उसने कहा, “बस इतना ही? यह तो कुछ मक्का और अनाज के दाने मात्र हैं। यदि तुम मेरे शहर आओगे तो मैं तुम्हें भरपूर दावत दूंगा।”

शहरी चूहा और ग्रामीण चूहा शहर पहुंचे। शहरी चूहे ने जब भोजन परोसा तो ग्रामीण चूहा अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पाया। वहां रोटी, पनीर, फल और अनाज थे। किंतु ज्यों ही दोनों चूहे भोजन करने बैठे, एक बिल्ली मेज पर कूद पड़ी। दोनों चूहे जल्दी से एक छोटे से छेद में छिप गए। बिल्ली के जाने के बाद जैसे ही वे फिर खाने लगे, एक रसोइया अंदर आया। रसोइए ने उन्हें देखकर चिल्लाकर कहा, “छी! इन चूहों को पकड़ो!” दोनों चूहे फिर से तेजी से छेद में भागे।

यह घटना बार-बार घटी। इस सबके बाद ग्रामीण चूहे ने कहा, “अलविदा। मैं अपने घर जा रहा हूं, जहां शांति से अपना साधारण भोजन कर सकूंगा।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *