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हाथी-और-चूहों-का-हुजूम-_-The-Elephant-and-the-Mice

हाथी और चूहों का हुजूम – The Elephant and the Mice

हाथी और चूहों का हुजूम  जंगल के बीचोंबीच एक पुराना रास्ता था जिसे हर दिन कई जानवर इस्तेमाल करते थे। उसी रास्ते के पास एक सूखा तालाब था, जिसके किनारों पर चूहों का एक बड़ा झुंड रहता था। यह जगह उनके लिए सुरक्षित थी क्योंकि आसपास घास थी, पेड़ों के खोखले तनों में उनके बिल […]

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मृत्यु-को-जीतने-वाला-बालक---The-Boy-Who-Defeated-Death

मृत्यु को जीतने वाला बालक – The Boy Who Defeated Death

मृत्यु को जीतने वाला बालक साधु मृकण्डु और उनकी पत्नी मरुद्मती का आश्रम शांति से भरा था, पर उनके हृदय में एक टीस थी। आध्यात्मिक ज्ञान और सादगी के सभी सुख होने के बावजूद, एक संतान का सुख उनसे दूर था। वर्षों तक उन्होंने अविचल भक्ति से भगवान शिव की आराधना की और एक पुत्र […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 27 – मलयावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 27 मलयावती, जो राजा विक्रमादित्य के सिंहासन की सत्ताइसवीं गुड़िया थी, राजा भोज के सामने प्रकट होकर स्वयं का परिचय देते हुए बोली, “मेरा नाम मलयावती है। मैं उन बत्तीस अद्भुत गुड़ियों में से एक हूँ जिनमें विक्रमादित्य की अद्भुत स्मृतियाँ और प्रेरणादायक प्रसंग सुरक्षित हैं। हमारे स्वामी अतुलनीय विद्वान, दयालु, धर्मनिष्ठ […]

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खरगोश-और-कड़वी-औषधि-–-The-Rabbit-and-the-Bitter-Medicine

खरगोश और कड़वी औषधि – The Rabbit and the Bitter Medicine

खरगोश और कड़वी औषधि  हरीभरी पहाड़ियों के पास बसे एक शांत जंगल में एक छोटा सा खरगोश रहता था, जिसका नाम मीनू था। मीनू बहुत तेज दौड़ता था, पेड़ों के बीच कूदता-फाँदता फिरता था और पूरे जंगल का सबसे चंचल जीव माना जाता था। सुबह होते ही वह अपने बिल से निकलकर इधर-उधर दौड़ लगाता, […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 31 – कौशल्या की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 31 इकतीसवें दिन जब राजा भोज पुनः सिंहासन पर बैठने आए, तो इकतीसवीं गुड़िया उनके सामने प्रकट हुई और राजा विक्रमादित्य से जुड़ी एक कथा सुनाने लगी। उसने अपना परिचय देते हुए कहा कि वह कौशल्या है, इस दिव्य सिंहासन की इकतीसवीं गुड़िया। उसने राजा भोज से कहा कि जब स्वयं विक्रमादित्य […]

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लोमड़ी-और-अंगूर-की-बेल-–-The-Fox-and-the-Grapevine

लोमड़ी और अंगूर की बेल – The Fox and the Grapevine

लोमड़ी और अंगूर की बेल  घने जंगल के बीचोंबीच एक शांत खुली जगह थी, जहाँ सूरज की रोशनी इतनी सुंदर तरीके से गिरती थी कि वह जगह हमेशा गर्म और सुखद महसूस होती थी। वहाँ एक पुरानी लकड़ी की बाड़ के सहारे एक लंबी अंगूर की बेल फैली हुई थी। बेल इतनी ऊपर चढ़ चुकी […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 13 – कीर्तिमती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 13 तेरहवीं गुड़िया कीर्तिमती की कथा में वर्णित प्रसंग उस समय प्रारम्भ होता है जब तेरहवें दिन राजा भोज सिंहासन पर बैठने का प्रयास करते हैं तो एक नई गुड़िया उनके सामने प्रकट होती है और कहती है कि उसका नाम कीर्तिमती है और वह पहले उन्हें राजा विक्रमादित्य की उदारता की […]

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जादुई-टेबल-गधा-और-लाठी-–-The-Magical-Table-Donkey-and-Stick (1)

जादुई टेबल, गधा और लाठी – The Magical Table, Donkey and Stick

जादुई टेबल, गधा और लाठी यह कहानी तीन भाइयों की है। बहुत समय पहले उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव सनपुरा में तीन भाई रहते थे—हरिदास, मोहनदास और सबसे छोटा गोपीनाथ। तीनों स्वभाव से भले, मेहनती और एक-दूसरे से गहरा प्रेम करने वाले थे। बचपन से ही उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझता रहा […]

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उल्लू-और-सुबह-का-पंछी-_-The-Owl-and-the-Morning-Bird

उल्लू और सुबह का पंछी | The Owl and the Morning Bird

उल्लू और सुबह का पंछी  घना जंगल था जहाँ सुबह की हल्की धूप पेड़ों के पत्तों पर गिरकर एक अलग ही चमक पैदा करती थी। जंगल के सभी पक्षी सुबह-सुबह जागकर उड़ान भरते थे और अपनी मीठी आवाजों से पूरे माहौल को ताज़ा कर देते थे। लेकिन उसी जंगल के एक पुराने पेड़ की खोखी […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 22 – अनुरोधवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 22 जब राजा भोज सिंहासन पर बैठने हेतु अग्रसर हुए, तो बाईसवीं गुड़िया उनके सामने आई और विनम्र स्वर में बोली कि वह उन्हें राजा विक्रमादित्य के एक विशिष्ट गुण का प्रसंग सुनाएगी। उसने अपना परिचय देते हुए कहा कि उसका नाम अनुरोधवती है और वह जानना चाहती है कि क्या राजा […]

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