चतुर हिरन और शिकारी
घने जंगल की हलचल में एक हिरन रहता था, जिसे सब उसकी तेज़ नज़र और समझदारी के लिए जानते थे। वह हमेशा सतर्क रहता था, चारों तरफ़ की आवाज़ें सुनता था और हर छोटी हरकत पर ध्यान देता था। जंगल के कई जानवर उसकी सतर्कता की वजह से अक्सर किसी मुश्किल से बच जाते थे। हिरन जानता था कि जंगल में रहना आसान नहीं, इसलिए हर कदम सोच-समझकर रखना जरूरी है।
एक दिन सुबह-सुबह जंगल में अजीब-सी खामोशी थी। आमतौर पर इस समय चिड़ियों के गीत, हवा की सरसराहट और पत्तों की हल्की आवाज़ सुनाई देती थी, पर आज कुछ अलग था। हिरन ने अपनी आँखें फैलाकर चारों ओर देखा, हवा को सूँघा और महसूस किया कि आज किसी अनजानी चीज़ की हल्की गंध है। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा, पत्तों पर पैर रखते हुए ताकि आवाज़ भी न हो। अचानक उसने देखा कि मिट्टी पर कुछ अनचाहे निशान बने थे। ये निशान जंगल के किसी जानवर के नहीं थे। मिट्टी में उभरे हुए ये निशान उसे इंसान के जूते जैसे लगे।
हिरन एक पल के लिए रुक गया। उसका दिल हल्का-हल्का धड़कने लगा। उसने सिर उठाकर सामने देखा, जहाँ पेड़ों के बीच कोई हलचल नहीं थी, फिर भी हवा में डर-सी घुली थी। हिरन उन निशानों को ध्यान से देखने लगा। जैसे-जैसे वह आगे बढ़ा, उसे और भी अजीब-से पैरों के निशान दिखाई देने लगे। कुछ निशान आगे की तरफ थे, कुछ पीछे की तरफ। पहले तो लगा कि शायद ये किसी इंसान के आने-जाने के हैं, लेकिन ध्यान से देखने पर उसे समझ में आया कि आगे वाले निशान गहरे और साफ थे जबकि पीछे वाले थोड़े बिखरे हुए। यह देखकर हिरन का शक बढ़ गया। हिरन समझ रहा था कि जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए शिकारी अक्सर चालें चलते हैं।
वह धीरे-धीरे उन निशानों के पीछे चलता गया, जब तक कि उसे झाड़ियों के बीच कुछ चमकता दिखाई न दिया। उसने गर्दन लंबी कर देखकर पाया कि वहाँ एक बड़ा जाल बिछा हुआ था, जिसमें दाना भी रखा था। शिकारी ने कोशिश की थी कि किसी जानवर को जाल में फँसाने के लिए मिट्टी पर उल्टे-पुल्टे निशान बना दे ताकि जानवर भ्रम में पड़ जाए। पर हिरन कोई साधारण जानवर नहीं था। उसने तुरंत समझ लिया कि यह जाल ही होगा।
वह सोचने लगा कि अगर वह सीधा आगे जाएगा तो सीधे शिकारी के फंदे में फँस जाएगा। उसने आसपास की जमीन को देखा और पाया कि एक तरफ़ बहुत कम पैरों के निशान थे। इसका मतलब था कि शिकारी उस ओर से आया नहीं था। वही दिशा सुरक्षित लग रही थी। हिरन तेज़ी से उस दिशा में मुड़ा और पूरी ताकत से दौड़ पड़ा। उसकी दौड़ इतनी शांत और हल्की थी कि पेड़ों की पत्तियों ने भी उसके कदमों की आवाज़ नहीं सुनी। जैसे ही वह दूर पहुँचा, झाड़ियों के पीछे से एक शिकारी निकल आया। उसने देखा कि हिरन उसकी ओर बिल्कुल नहीं जा रहा, बल्कि दूसरी तरफ भाग रहा है। शिकारी चौंक गया। उसने सोचा था कि हिरन उस दाने की ओर आएगा और जाल में फँस जाएगा।
लेकिन हिरन पहले ही खतरा पहचान चुका था। शिकारी ने भागकर उसे पकड़ने की कोशिश की, पर हिरन को देखकर समझ आ गया कि अब देर हो चुकी है। हिरन ने थोड़ी दूरी पर जाकर रुककर पीछे देखा। वह शिकारी अब भी बेबस खड़ा था, जैसे उसे अपनी चाल नाकाम होते ही शर्म आ रही हो। हिरन मुस्कुराया नहीं, पर उसकी चमकती आँखों में साफ दिख रहा था कि वह अपने फैसले पर गर्व महसूस कर रहा है। वह शांति से आगे बढ़ा और जंगल के भीतर गायब हो गया। उस दिन के बाद उसने और भी अधिक सतर्क रहना सीख लिया।
शिक्षा: सतर्कता जीवन बचाती है।