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बादल का छोटा बेटा: हिम्मत और भरोसे की उड़ान | The Little Cloud Boy: A Flight of Courage and Faith

सोने से पहले की कहानियाँ

बादल का छोटा बेटा: हिम्मत और भरोसे की उड़ान

आकाश के बहुत ऊपर जहाँ सूरज की किरणें बादलों को सुनहरा बना देती हैं और हवा हमेशा खुश रहती है, वहाँ एक छोटा सा बादल था जिसका नाम नन्हू था। वह बाकी बादलों की तरह चुपचाप तैरता नहीं था, बल्कि वह बहुत जिज्ञासु था। उसे नई जगहें देखना, नई खुशबूओं को महसूस करना और नीचे धरती पर फैली हर चीज को जानने का मन करता था। उसके पिता एक बड़े, मजबूत और सफेद बादल थे जो हमेशा उसे कहते थे कि धरती पर जाना आसान नहीं होता क्योंकि ऊपर लौटने का रास्ता हमेशा साफ दिखता नहीं है। लेकिन नन्हू की आँखों में अलग ही चमक थी। वह दुनिया को करीब से देखना चाहता था।

एक दिन दोपहर के समय जब सूरज तेज चमक रहा था और आकाश बिल्कुल नीला था, नन्हू धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा। हवा ने उसे रोका भी, बोली कि नीचे जाना मजेदार जरूर है लेकिन सावधानी जरूरी है, पर नन्हू की उत्सुकता इतनी बड़ी थी कि उसने बात आधी सुनी और धरती की ओर फिसलता चला गया।

धरती पर आते ही उसे हर चीज बहुत बड़ी और खूबसूरत लगी। पेड़ उसके लिए किसी महल की तरह लगते थे। फूलों की खुशबू उसे बेहद अच्छी लगी। वह खेतों के ऊपर तैरता, पंछियों की आवाजें सुनता और बच्चों के खेल देखता। उसे लगा कि यह दुनिया कितनी रंगों से भरी है। आसमान पर तैरते हुए उसे इतना मजा कभी नहीं आया था। उसने सोचा कि आज का दिन वह धरती पर ही बिताएगा।

लेकिन धीरे-धीरे शाम होने लगी। सूरज ढलने लगा और नन्हू के अंदर हल्की चिंता उठी। उसने ऊपर देखा, लेकिन आसमान धुँधला लग रहा था। उसे समझ नहीं आया कि वह किस दिशा में जाए। उसका घर का रास्ता कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। पहली बार उसे डर महसूस हुआ।

आसमान में ऊपर उसके पिता और बाकी बादल उसे ढूँढने लगे, लेकिन नीचे उन्हें साफ नजर नहीं आता था। हवा भी उसे खोजते हुए घूम रही थी, लेकिन नन्हू इतने नीचे आ गया था कि आवाज पहुँच नहीं पा रही थी।

नन्हू इधर-उधर बहता रहा। वह खेतों, पहाड़ियों और नदी के किनारे तैरता गया, पर रास्ता उसे कहीं नहीं मिला। अँधेरा गहराने लगा और उसकी चिंता बढ़ती गई। उसे लगा शायद वह फिर कभी घर वापस नहीं जा पाएगा। धरती अच्छी थी, लेकिन घर की गर्माहट अलग होती है। वह ऊपर आसमान की गोद में लौटना चाहता था जहाँ उसके पिता और परिवार उसका इंतजार कर रहे थे।

धीरे-धीरे ठंडी हवा चली और पहली बूंदें गिरने लगीं। नन्हू ने देखा कि बारिश की बूंदें धरती पर गिरते हुए चमक रही थीं। हर बूंद जैसे किसी छोटे आईने की तरह थी। वह अनजाने ही उन बूंदों के रास्ते को देखने लगा। उसे कुछ अलग सा लगा। हर बूंद आकाश की ओर एक पतली सी चमक छोड़ती थी जो ऊपर जाती दिखाई देती थी।

नन्हू को समझ आया कि यह चमक कोई संयोग नहीं है। बारिश की बूंदों में ही उसका छिपा हुआ रास्ता था। हर बूंद उसे आसमान की ओर इशारा कर रही थी। उसने बूंदों का पीछा करना शुरू किया। जैसे-जैसे वह ऊपर जाने लगा, बूंदों की चमक और साफ होती गई। उसे महसूस हुआ कि बारिश सिर्फ धरती का मजा नहीं, बल्कि उसके लिए एक निशान भी थी।

उस रात आसमान पहले से ज्यादा चमक रहा था। तारे मुस्कुरा रहे थे। हवा ठंडी और हल्की चल रही थी। और नन्हू पहली बार इतना शांत महसूस कर रहा था। उसे पता था कि वह छोटा ज़रूर है, लेकिन दुनिया उसके लिए बड़ी है और वह किसी भी सफर को पूरा कर सकता है अगर वह हिम्मत न छोड़े।

और इस तरह एक छोटा बादल जिसने धरती को पहली बार छुआ था, सीख गया कि सफर का असली मतलब सिर्फ जगहें देखना नहीं होता, बल्कि रास्ते ढूँढना और खुद पर भरोसा करना भी होता है। हवा उसे बचाकर लाई थी, लेकिन रास्ता तो उसने बूंदों की चमक में खुद ही देखा था।

शिक्षा: जो रास्ता दिखाई न दे, वह कभी-कभी भरोसे और हिम्मत से मिल जाता है।

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