असली-मित्र-की-पहचान

असली मित्र की पहचान

जानवरों की कहानियाँ

एक घने जंगल में एक हाथी रहता था। वह बहुत अकेलापन महसूस करता था और उसकी इच्छा थी कि उसके कुछ सच्चे मित्र हों। एक दिन, उसने मित्रता की तलाश में जंगल के विभिन्न कोनों में भ्रमण शुरू किया। सबसे पहले उसकी नज़र एक पेड़ की डाल पर बैठे बंदर पर पड़ी। हाथी ने विनम्रता से पूछा, “क्या तुम मेरे मित्र बनोगे?” बंदर ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और हँसते हुए कहा, “तुम्हारा शरीर इतना विशाल है! तुम मेरे साथ पेड़ों पर उछल-कूद नहीं सकते। मैं तुम्हारा मित्र कैसे बन सकता हूँ?” यह कहकर बंदर वहाँ से चला गया।

हाथी निराश तो हुआ, परंतु हार नहीं मानी। आगे चलकर उसे एक खरगोश दिखाई दिया, जो अपने बिल के पास घास चर रहा था। हाथी ने फिर वही प्रस्ताव रखा। खरगोश ने अपने छोटे बिल की ओर इशारा करते हुए कहा, “मेरा बिल तो इतना छोटा है कि तुम्हारा एक पैर भी इसमें समा नहीं सकता। हम साथ कैसे खेलेंगे? क्षमा करना।” यह सुनकर हाथी का दिल और भारी हो गया।

थोड़ी दूर आगे एक तालाब के किनारे एक मेंढक टर्रा रहा था। हाथी ने एक बार फिर कोशिश की। मेंढक ने कहा, “देखो, मैं तो पानी और जमीन पर इधर-उधर कूदता रहता हूँ। तुम मेरे साथ कदम से कदम मिलाकर कैसे चलोगे? मित्रता संभव नहीं है।” हाथी का सिर शर्म से झुक गया। तभी एक लोमड़ी वहाँ से गुज़री। हाथी ने उससे भी मित्रता का निवेदन किया। लोमड़ी ने भी उसके बड़े आकार को ही कारण बताकर मना कर दिया।

हाथी पूरी तरह टूट सा गया। उसे लगने लगा कि शायद उसके आकार के कारण ही कोई उसका मित्र नहीं बनना चाहता। अगले दिन जंगल में अचानक हड़कम्प मच गया। सभी जानवर डरकर इधर-उधर भाग रहे थे। हाथी ने लोमड़ी से इस भगदड़ का कारण पूछा। लोमड़ी ने डरते हुए बताया कि एक खूँखार शेर जंगल में आ गया है और जिसे भी देख रहा है, उसे मारकर खा जा रहा है।

यह सुनकर हाथी तुरंत शेर के पास पहुँचा। उसने शेर से विनती की कि वह निर्दोष जानवरों को न मारे। शेर ने हाथी की बात अनसुनी कर दी और दहाड़ते हुए उस पर झपटा। तब हाथी ने अपनी शक्ति का प्रयोग किया और शेर को एक जोरदार लात मारी। शेर दर्द से चिल्लाता हुआ दूर भाग गया।

सारे जंगल के जानवर सुरक्षित हो गए। वे सब हाथी के पास इकट्ठे हुए और उसकी वीरता की प्रशंसा की। बंदर, खरगोश, मेंढक और लोमड़ी ने भी अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा, “तुम्हारा दिल तो बहुत बड़ा और महान है। तुम्हारा आकार हमारी रक्षा का कारण बना। तुम सच्चे मित्र हो।” हाथी की आँखें खुशी से चमक उठीं। अब उसे कई सच्चे मित्र मिल गए थे।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी के बाहरी रूप-रंग या आकार को देखकर उसके बारे में राय नहीं बनानी चाहिए। सच्चा मित्र वही होता है जो संकट के समय आपके काम आए। दोस्ती का आधार हृदय की महानता होती है, शरीर का आकार नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *