सबका भला होता है
एक समय की बात है, एक राजा रहता था जिसे शिकार का बड़ा शौक था। वह अक्सर अपने मंत्री के साथ शिकार पर जाया करता था। एक ऐसे ही शिकार के दौरान, उसका एक भयंकर शेर से सामना हुआ और उसने अपने बाएं हाथ की छोटी उंगली गंवा दी। खून बहता देख राजा का मन बहुत कड़वा हो गया और वह अपने मंत्री से दुखी होकर बोला, “देखो, मेरी उंगली चली गई!”
समझदार मंत्री ने उत्तर दिया, “महाराज! घबराइए नहीं, हर घटना का परिणाम भले के लिए ही होता है।” मंत्री का आशय यह था कि शेर से लड़ाई में राजा का पूरा जीवन तो नहीं गया, बस एक छोटी और लगभग बेकार उंगली ही गई है। किंतु अहंकारी राजा को मंत्री के इन शब्दों पर बड़ा क्रोध आया। उसने मंत्री को कारागार में डालने का आदेश दे दिया। राजा गुस्से में बुदबुदाया, “मेरी उंगली टूटना अच्छी बात है? मेरा मंत्री यह कैसे कह सकता है!”
अगले सप्ताह राजा फिर शिकार पर निकला। इस बार वह अकेला गया, क्योंकि मंत्री तो कारागार में बंद थे। वह गहरे जंगल में निकल गया। शाम हो गई। दुर्भाग्य से, राजा एक आदिवासी समुदाय के हाथों पड़ गया। उस रात पूर्णिमा थी। उस समुदाय की प्रथा थी कि हर पूर्णिमा की रात वे अपनी देवी को एक पूर्ण मनुष्य की बलि चढ़ाते थे।
चूंकि राजा देखने में एक सुडौल और पूर्ण मनुष्य लग रहा था, इसलिए उसे मंदिर ले जाया गया और बलि चढ़ाने की तैयारी होने लगी। जिस क्षण पुजारी ने राजा का सिर काटने के लिए तलवार उठाई, उसने देखा कि राजा के बाएं हाथ की छोटी उंगली नहीं है। उनकी मान्यता के अनुसार, शरीर से कोई अंग कटा हुआ व्यक्ति ‘पूर्ण’ नहीं माना जाता था और देवी को अधूरी बलि स्वीकार नहीं थी। अतः उन्होंने राजा को मुक्त कर दिया।
उसी पल राजा को अपने मंत्री के शब्दों का अर्थ समझ में आया कि हर घटना भले के लिए ही होती है। अगर उसकी उंगली न कटी होती, तो आज उसकी जान चली गई होती।
राजा तुरंत महल लौटा और मंत्री को मुक्त करने का आदेश दिया। उसने पूरी घटना मंत्री को सुनाई और कहा कि अब उसे समझ आया कि उंगली का कटना उसके लिए वरदान सिद्ध हुआ। फिर उसने मंत्री से पूछा, “लेकिन यह बताओ, तुम्हारे जेल जाने का क्या भला हुआ?”
मंत्री मुस्कुराए और बोले, “महाराज, यदि मैं जेल में नहीं होता, तो निश्चय ही मैं भी उस शिकार यात्रा में आपके साथ होता। और चूंकि मेरा शरीर पूर्ण और सुरक्षित था, इसलिए आदिवासी मुझे पकड़कर देवी की बलि चढ़ा देते! इस प्रकार, आपकी इस कारावास की आज्ञा ने वास्तव में मेरे प्राण बचा लिए।”
राजा हैरान रह गया। उस दिन दोनों ने जीवन का एक गहरा सबक सीखा कि जीवन की हर छोटी-बड़ी घटना, चाहे वह सुखद हो या दुखद, एक बड़े सकारात्मक उद्देश्य के लिए ही होती है। धैर्य और विश्वास रखना चाहिए।
शिक्षा: जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटना, चाहे वह अच्छी लगे या बुरी, हमारे भले के लिए ही होती है। हमारा दृष्टिकोण ही उसे शुभ या अशुभ बनाता है। अतः विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास नहीं खोना चाहिए।