हवा में उड़ती नाव
एक शांत से गाँव में कई बच्चे रहते थे जो हमेशा नई रोमांचक चीज़ों के सपने देखते थे, लेकिन उनके खेल अक्सर जमीन तक ही सीमित रहते थे। कभी पेड़ों पर चढ़ना, कभी पतंग उड़ाना और कभी नदी किनारे दौड़ लगाना। पर वे आसमान को देखकर हमेशा सोचते कि काश वे बादलों को छू पाते। एक दिन दोपहर के समय जब बच्चे खुले मैदान में खेल रहे थे, अचानक हल्की सुनहरी चमक उनके सामने उतरने लगी। पहले तो सबने सोचा कि शायद कोई अजीब सा चमकीला पतंगा होगा, लेकिन जैसे-जैसे चमक बढ़ी, उन्हें एहसास हुआ कि वह पतंगा नहीं बल्कि एक खूबसूरत परी थी।
परी के पंख हल्की नीली रोशनी में चमक रहे थे और उसके चारों ओर सुनहरी हवा घूम रही थी जो बेहद शांत और सुकून देने वाली थी। बच्चे आश्चर्य से एक-दूसरे को देखते रहे। परी ने मुस्कुराकर कहा, “मैं हवा की रखवाली करने वाली परी हूँ। मैं उन बच्चों को इनाम देती हूँ जो एक-दूसरे की मदद करते हैं और दिल से नेक होते हैं।” बच्चों ने याद किया कि वे अक्सर एक-दूसरे की मदद करते हैं और झगड़ों को जल्दी सुलझा लेते हैं। शायद यही वजह थी कि परी उनके गाँव आई थी।
शहर में चलते हुए उन्हें कई हवाई जीव दिखाई दिए। कुछ छोटे बादल-खरगोश थे जो हवा में उछलते थे, कुछ चमकदार पक्षी थे जिनके पंख रोशनी से बने थे। बच्चे खुशी से उनके पीछे दौड़ने लगे। एक बड़ा गोल बादल उनके पास आया और जैसे किसी दोस्त की तरह उन्हें ऊपर उछालकर पकड़ने लगा। बच्चे हँसते-हँसते थक गए लेकिन दिल में एक अनोखी खुशी भर गई। वे सोचने लगे कि काश वे यहाँ और ज्यादा रुक पाते।
कुछ ही देर बाद नाव के किनारे एक तेज चमक दिखाई दी और हवा की परी फिर से प्रकट हुई। उसने कहा, “तुम्हारा रोमांच पूरा हुआ, अब लौटने का समय है। बादलों की दुनिया सिर्फ देखने और सीखने के लिए होती है, हमेशा रहने के लिए नहीं।” बच्चों ने सिर हिलाया, क्योंकि वे समझते थे कि रोमांच कितना भी सुंदर क्यों न हो, घर लौटना ही सही होता है।
बच्चे नाव में वापस बैठे और नाव ने धीरे से नीचे उतरना शुरू किया। नीचे आते-आते बादलों का शहर दूर होने लगा और धीरे-धीरे गायब हो गया। हवा साफ होती गई, धूप तेज होती गई और कुछ ही मिनटों में वे अपने गाँव के ऊपर थे। नीचे बच्चों के घर, खेत और नदी दिखाई देने लगे। नाव धीरे-धीरे नीचे आई और खुले मैदान में रुक गई।
नाव जैसे ही जमीन को छूने लगी, वह हवा में घुलने लगी और कुछ ही क्षणों में पूरी तरह गायब हो गई। बच्चे नीचे उतरे तो उन्हें थोड़ा दुःख भी हुआ, लेकिन खुशी ज्यादा थी। क्योंकि उन्होंने कुछ ऐसा देखा था जो शायद दुनिया के किसी और बच्चे ने नहीं देखा होगा।
परी आखिरी बार उनके सामने आई। उसने कहा, “यह रोमांच तुम्हारी दिल की सफाई और आपसी मदद का इनाम था। याद रखना, नेकी हमेशा लौटकर आती है। जब भी तुम सच और भलाई के साथ रहोगे, हवा तुम्हारा साथ देगी।” इतना कहकर वह चमक में बदलकर गायब हो गई।
बच्चे अपने-अपने घर चले गए और पूरे गाँव में कहानी फैल गई। सबको यकीन था कि बच्चों ने सच ही कहा है, क्योंकि उनकी आँखों में एक अलग सी चमक थी, जैसे उन्होंने आसमान को अपने दिल में समेट लिया हो। कई दिनों तक बच्चे बादलों के शहर की बातें करते रहे। कभी वे वहाँ के पुलों का जिक्र करते, कभी रोशनी वाले पक्षियों का और कभी बादलों के खरगोशों का। उनकी यह याद हमेशा उनके साथ रहने वाली थी।
समय बीतता गया लेकिन बच्चे जब भी आसमान देखते, उन्हें वही रोमांच फिर से महसूस होता। उन्हें लगता कि हवा में कोई अदृश्य हँसी घूम रही है, जो उन्हें फिर से ऊपर बुला रही है। वे समझ गए थे कि दुनिया सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। ऊपर भी एक खूबसूरत दुनिया है जो सच्चे दिल वाले बच्चों का स्वागत करती है।
शिक्षा: नेकी और सच्चाई हमेशा नए रास्ते खोलती हैं और बड़े से बड़ा रोमांच भी सुरक्षित बनाती हैं।
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