एक छोटे लड़के का नाम कृष्ण था। एक दिन उसे अपने बगीचे के पुराने बरगद के पेड़ के पीछे एक चमकदार क्रिस्टल बॉल मिली। जैसे ही उसने उसे हाथ में लिया, पेड़ ने आवाज दी। पेड़ ने कहा कि यह बॉल जादुई है और वह कृष्ण की एक इच्छा पूरी करेगी। कृष्ण को बहुत खुशी हुई। उसने इधर उधर की चीजों के बारे में सोचना शुरू किया लेकिन उसे कोई ऐसी विशेष इच्छा नहीं सूझी जो वह तुरंत मांगे। इसलिए उसने उस जादुई बॉल को अपने कपड़ों के बैग में सावधानी से रख लिया और सोचने लगा कि वह अपनी सही इच्छा क्या चुने।
कई दिन बीत गए पर कृष्ण ने कोई इच्छा नहीं मांगी। एक दिन उसका सबसे करीबी मित्र उसके बैग में झांक रहा था और उसने वह चमकता हुआ गोला देख लिया। उस मित्र ने वह बॉल चुपके से निकाल ली और पूरे गाँव में दिखाने लगा। यह बात जंगल की आग की तरह फैल गई। सभी गाँव वाले इकट्ठा हो गए और हर किसी ने अपनी अपनी इच्छा मांगनी शुरू कर दी। एक ने ऊंचे महल मांगे, दूसरे ने अनंत धन और कोई सोने का ढेर चाहता था। पर हर व्यक्ति की सिर्फ एक ही इच्छा पूरी हुई।
इससे सभी में ईर्ष्या और नाराजगी फैल गई। हर कोई दुखी हो गया क्योंकि किसी को भी सब कुछ नहीं मिला था। उनकी लालच ने सबका मन खराब कर दिया था। तब उन्हें कृष्ण की याद आई और वे सब उसके पास मदद मांगने पहुंचे। कृष्ण ने जादुई बॉल को हाथ में लिया और शांत स्वर में इच्छा जताई कि सब कुछ वैसा ही हो जाए जैसा पहले था, जब गाँव में शांति थी। तुरंत सारे महल और सोना गायब हो गए। गाँव वाले फिर से पहले जैसे साधारण और संतुष्ट जीवन में लौट आए। उनकी खोई हुई मुस्कान वापस आ गई।
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि असली सुख भौतिक धन से नहीं आता। लालच मनुष्य को दुखी ही करता है और संतोष ही सबसे बड़ा धन है।