हिंदी कहानियाँ

लेटेस्ट कहानियाँ

और पढ़ें

singhasan-battisi-story-23-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 23 – धरमवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 23 अगली सुबह जब राजा भोज सम्मानित आसन की ओर बढ़े, तो तेईसवीं गुड़िया आगे आई और उसने अपना संक्षिप्त परिचय देने के बाद एक कथा सुनानी शुरू की। उसने कहा कि उसका नाम धर्मवती है और वह राजा विक्रमादित्य के सिंहासन की तेईसवीं गुड़िया है। वह जो कहानी सुनाएगी, उससे यह […]

Continue Reading
विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: क्षमा की महानता भाग अठारह

विक्रम और बेताल: क्षमा की महानता  रात का अंधेरा गहरा था। श्मशान भूमि में हल्की धुंध घिरी हुई थी, और हवा की सरसराहट में सूखे पत्तों की भँभोर जैसी आवाज गूँज रही थी। पेड़ों की टहनियाँ आपस में टकरा रही थीं, मानो किसी अदृश्य शक्ति के साथ संघर्ष कर रही हों। उस अंधकार और रहस्यमय […]

Continue Reading
परियों-की-रसोई-Fairy-Kitchen

परियों की रसोई – Fairy Kitchen

परियों की रसोई जंगल के उस कोने में एक पुरानी लकड़ी की झोपड़ी थी जिसे हर कोई सिर्फ एक साधारण घर समझता था, लेकिन असल में वह झोपड़ी एक जादुई रसोई थी जिसे परियाँ चलाती थीं और इस रसोई का एक नियम था कि यहाँ से खाना सिर्फ उन्हें मिलता था जो किसी की मदद […]

Continue Reading
गुरुभक्त एकलव्य का त्याग - Ekalavya's Sacrifice

गुरुभक्त एकलव्य का त्याग – Ekalavya’s Sacrifice

गुरुभक्त एकलव्य का त्याग महाभारत के समय जब पांडव और कौरव द्रोणाचार्य से विद्या प्राप्त कर रहे थे, तब एक विलक्षण छात्र एकलव्य नामक निषाद कुमार भी धनुर्विद्या सीखने की अभिलाषा रखता था। द्रोणाचार्य हस्तिनापुर से दूर अपने आश्रम में राजकुमारों को शिक्षा देते थे। एकलव्य वहाँ चुपचाप छिपकर पूरी प्रक्रिया देखा करता था। उसने […]

Continue Reading
विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: जीवन का प्रतिफल भाग छह

विक्रम और बेताल: जीवन का प्रतिफल रात अत्यन्त अँधेरी थी। बीच-बीच में तेज़ बारिश की धाराएँ गिरतीं और फिर अचानक रुक जातीं। हवा के तेज़ झोंके पेड़ों को इस तरह हिलाते मानो वे किसी अदृश्य शक्ति के आगे काँप रहे हों। अजीब-अजीब सी आवाज़ें, दूर कहीं सियारों की करुण चीत्कार, और बीच-बीच में गड़गड़ाहट की […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-21-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 21 – चंद्रज्योति की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 21 अगली सुबह जब राजा भोज पुनः उस दिव्य सिंहासन पर बैठने का प्रयत्न करने लगे, तो उसी क्षण उनके सामने इक्कीसवीं पुतली चंद्रज्योति प्रकट हुई। वह चमकती हुई रौशनी की तरह उनके सम्मुख अवतरित हुई और मनोहर स्वर में बोली कि वह विक्रमादित्य के पवित्र और शक्तिमान सिंहासन की इक्कीसवीं पुतली […]

Continue Reading

तेनाली रमन की चतुराई के किस्से – 26 से 30

इनाम की साझेदारी – 26 कुचिपुड़ी मंडली विजयनगर से लौट आई। रमन ने ही मंडली को समेटा था। राजा ने रमन को बुलाकर पूछताछ की। रमन अडिग रहा। ‘मैंने झूठ बोलने वालों को पीटा है।’ ‘वह कृष्ण की कहानियाँ सुना रहा था, है ना?’ राजा ने पूछा। ‘यदि ऐसा है तो मैंने पाप किया है। […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-14-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 14 – सुनैना की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 14 चौदहवें दिन जब राजा भोज दोबारा सिंहासन के पास पहुँचे, तभी चौदहवीं पुतली सुनैना प्रकट हुई और बोली कि पहले विक्रमादित्य की न्यायप्रियता और साहस की कथा सुननी होगी, तभी निर्णय लिया जा सकेगा कि भोज सिंहासन पर बैठने योग्य हैं या नहीं। इतना कहकर वह कथा सुनाने लगी। उसने कहा […]

Continue Reading
दो-बिल्लियाँ-और-चालाक-बंदर

दो बिल्लियाँ और चालाक बंदर

  एक समय की बात है, दो बिल्लियाँ गहरी मित्र थीं। एक दिन संयोग से उन्हें रास्ते में एक रोटी का टुकड़ा मिल गया। दोनों में उसे बाँटने की बात हुई। परंतु जब उन्होंने रोटी के दो टुकड़े किए, तो एक टुकड़ा दूसरे से बड़ा निकला। दोनों अपने-अपने हिस्से के लिए बड़ा टुकड़ा चाहती थीं। […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-9-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 9 – मधुमालती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 9 अगले दिन जब राजा भोज फिर से उस अद्भुत सिंहासन के समीप पहुँचे तो नौवीं पुतली उनके सामने एक सुंदर स्त्री के रूप में प्रकट हुई। उसने मधुर किंतु दृढ़ स्वर में कहा कि उसका नाम मधुमालती है। उसने स्पष्ट किया कि इस सिंहासन पर बैठने के लिए राजा को वही […]

Continue Reading