विक्रम और बेताल: कर्म और परिणाम का सत्य भाग दस
विक्रम और बेताल: कर्म और परिणाम का सत्य रात के सन्नाटे में चाँद बादलों में छिपता-निकलता हुआ भयावह आभा फैला रहा था। श्मशान की ओर जाती पगडंडी पर धीमे-धीमे चलते राजा विक्रमादित्य के कदमों की आहट ही सिर्फ सुनाई दे रही थी। उनके कंधों पर लटका बेताल हवा में लहराता हुआ बीच-बीच में हल्का-सा हँस […]
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