चाँदी-की-मछली-और-अँधेरा-समुद्र-Silver-Fish-and-the-Dark-Sea

चाँदी की मछली और अँधेरा समुद्र – Silver Fish and the Dark Sea

सोने से पहले की कहानियाँ

चाँदी की मछली और अँधेरा समुद्र

समुद्र की गहराइयों में एक ऐसी मछली रहती थी जिसकी चमक देखकर पूरा समुद्र उजाला हो जाता था। उसका नाम चाँदी था क्योंकि उसका पूरा शरीर रात में हल्की चाँदी जैसी चमक देता था। जब भी समुद्र का पानी शांत होता और चाँद ऊपर से रोशनी भेजता, तब पानी के अंदर चाँदी किसी छोटे तारे की तरह चमकने लगती थी। बाकी मछलियाँ भी उससे बहुत प्यार करती थीं क्योंकि उसकी चमक से उन्हें रास्ता दिखता था। कई बार तो छोटे-छोटे केकड़े और कछुए भी उसके पास आकर बैठते ताकि वे रात में साफ देख सकें।

चाँदी को यह बात बहुत पसंद थी कि वह सबके काम आती है। उसे लगता था कि उसकी चमक सिर्फ सजावट नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है। वह जानती थी कि समुद्र के हर जीव को रात में थोड़ी रोशनी की जरूरत होती है। और वह यह काम खुशी से करती थी।

लेकिन कुछ महीनों से समुद्र का रंग बदलने लगा था। जो पानी पहले गहरा नीला और साफ था, वह अब काला दिखने लगा था। ऊपर तैरने वाले प्लास्टिक, फेंकी हुई चीजें, और जहाजों से गिरा कचरा धीरे-धीरे नीचे उतरकर समुद्र को गंदा कर रहे थे। कई मछलियाँ परेशान होने लगीं और कुछ ने तो अपना घर तक बदल लिया। चाँदी को भी अपने आस-पास पहले जैसी चमक दिखाई नहीं देती थी।

एक रात उसने महसूस किया कि उसकी चमक बहुत धीमी हो गई है। वह डर गई। उसने कई बार अपनी पूँछ और पंख हिलाए ताकि रोशनी तेज हो जाए, लेकिन चमक सिर्फ हल्की ही रही। बाकी मछलियाँ भी चिंता में थीं। कछुआ बोला कि शायद चाँदी बीमार हो गई है। केकड़े ने कहा कि हो सकता है कि उसे आराम चाहिए।

लेकिन चाँदी जानती थी कि समस्या वह नहीं, बल्कि समुद्र है। पानी इतना गंदा हो चुका था कि उसकी चमक उसमें दिखाई ही नहीं दे रही थी। यह बात उसे सबसे ज्यादा दुख दे रही थी। उसे लगा कि अगर ऐसा ही चला तो समुद्र की रातें पूरी तरह अँधेरी हो जाएँगी।

अगले दिन वह ऊपर सतह के पास तैरकर गई ताकि समझ सके कि समुद्र में इतनी गंदगी क्यों जमा हो रही है। उसने देखा कि कुछ लोग समुद्र के किनारे प्लास्टिक की बोतलें, थैलियाँ और बाकी कचरा फेंक रहे थे। हवा उसे उड़ा कर पानी तक पहुँचा देती और फिर सब नीचे जाकर जमा हो जाता। उसे यह देखकर बहुत बुरा लगा।

उसी समय किनारे पर कुछ बच्चे खेल रहे थे। एक लड़की ने समुद्र में तैरते प्लास्टिक के टुकड़े की ओर देखा और बोली कि पानी आज बहुत बुरा लग रहा है। उसके दोस्त ने कहा कि समुद्र शायद बीमार हो गया है। चाँदी ने बच्चों की आवाज सुनी और उसके मन में उम्मीद जागी। हो सकता है बच्चे उसकी बात सुनें। लेकिन वह समझ नहीं पा रही थी कि वह बच्चों तक कैसे पहुँचे।

रात हुई तो चाँदी ने आखिरी बार अपनी चमक आजमाने की कोशिश की। उसने पूरी ताकत से चमकना चाहा, लेकिन पानी इतना गंदा था कि चमक बाहर पहुँची ही नहीं। वह बहुत उदास होने लगी। तभी उसने देखा कि ऊपर सतह पर थोड़ी-सी लहर चमक रही है। वह किसी तरह उठकर वहाँ पहुँची और देखा कि कुछ साफ जगहों पर उसकी रोशनी हल्की दिखाई दे रही थी।

उस रात समुद्र में सब कुछ पहले से ज्यादा सुंदर था। पानी में साफ नीला रंग दिखाई देने लगा और चाँद की रोशनी उस पर गिरते ही चाँदी पूरे समुद्र को एक बार फिर जगमगाने लगी। बाकी मछलियाँ खुशी से उसके चारों ओर घूमने लगीं। कछुआ बोला कि आज उसके बादल जैसे पंख फिर से चमक रहे हैं।

चाँदी को समझ आया कि समुद्र सिर्फ उसका घर नहीं बल्कि सभी का घर है। और उसे बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ समुद्री जीवों की नहीं, बल्कि इंसानों की भी है। बच्चे यह बात समझ रहे थे, इसलिए आने वाले समय में समुद्र और साफ होगा।

और उस रात चाँद की हल्की रोशनी में जब चाँदी तैर रही थी, तो उसे महसूस हुआ कि दुनिया बदल सकती है, बस किसी को शुरुआत करनी होती है।

शिक्षा: प्रकृति की सुंदरता तभी दिखती है जब हम उसे साफ और सुरक्षित रखते हैं।

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