रात का नीला घोड़ा
रात का समय था और पूरा जंगल हल्की नीली रोशनी से भरा हुआ था क्योंकि परी नीलिमा अपनी रात की तैयारी कर रही थी। नीलिमा एक छोटी लेकिन बहादुर, दयालु और बेहद प्यारी परी थी, जो हर रात आसमान में उड़कर तारों की देखभाल करती थी। उसका सबसे खास साथी था उसका जादुई नीला घोड़ा, जिसका नाम नीलक था। जब नीलक दौड़ता तो उसके पैरों के नीचे से नीली चिनगारियाँ उठती थीं और हवा में चमकदार लकीरें बन जाती थीं। जंगल के सभी जीव नीलक को दूर से देखते ही खुश हो जाते थे क्योंकि उसकी रोशनी रात को सुरक्षित और सुंदर बनाती थी।
एक रात कुछ अजीब हुआ। जैसे ही नीलिमा आसमान की ओर देखने लगी, उसे पता चला कि कई तारे अपनी जगह से गायब थे। जहां पहले चमचमाती रोशनी होती थी वहां अब काले खाली धब्बे दिख रहे थे। नीलिमा चौंक गई और बोली कि अगर तारे ऐसे ही गायब होते रहे तो पूरी दुनिया अंधेरी हो जाएगी। नीलिमा को तारों से बहुत प्यार था, इसलिए वह तुरंत नीलक पर बैठी और बोली कि आज की उड़ान बहुत ज्यादा जरूरी है। नीलक ने अपनी चमकदार नीली आँखों से संकेत दिया कि वह तैयार है।
नीलक ने दौड़ना शुरू किया और जमीन छोड़कर सीधा बादलों के ऊपर उठ गया। हवा तेज थी लेकिन नीलमा को उससे डर नहीं लगता था, बल्कि वह हवा में उड़ना हमेशा पसंद करती थी। आसमान में पहुंचकर उसने अपने छोटे से जादुई दर्पण से चारों ओर देखने लगी। अचानक उसे दूर एक पहाड़ी के आसपास हल्की रोशनी झिलमिलाती दिखाई दी। उसे लगा कि शायद गायब तारे वहां छिपे हुए हैं। नीलक ने जैसे उसके मन की बात पढ़ ली और दोनों उसी दिशा में उड़ने लगे।
नीलक ने गुफा के बाहर खड़े होकर अपने जादुई खुरों से नीली रोशनी फैलाई, जिससे गुफा के आसपास के अंधेरे बादल थोड़ा पीछे हटे। नीलिमा गुफा के अंदर गई और तारे धीरे-धीरे उसकी तरफ झिलमिला कर मदद की गुहार करने लगे। वह जानती थी कि उसे बहुत **साहस**, **समझदारी** और धैर्य से काम लेना होगा। उसने अपनी जादुई छड़ी निकाली और उस पर छोटे-छोटे नीले बिंदु चमकने लगे। नीलिमा ने धीरे से मंत्र बोला और छड़ी की रोशनी तारे पकड़ने वाले धुंध पर पड़ी। धुंध तड़पने लगी और पीछे हटने लगी लेकिन वह अभी भी मजबूत थी।
बाहर खड़ा नीलक यह देखकर चिंतित हुआ और उसने अपनी पूरी शक्ति लगाकर एक तेज नीली लहर पैदा की। यह लहर गुफा के अंदर गई और धुंध पर सीधे गिरी। नीलिमा ने उसी समय अपना मंत्र दोहराया। दोनों की संयुक्त शक्ति से धुंध टूटने लगी। तारे धीरे-धीरे आजाद होने लगे और उनमें फिर से चमक लौट आई। तारे इतने खुश हुए कि उनके चारों ओर हल्की सुनहरी रोशनी फैलने लगी जिसने गुफा को पूरी तरह उजाला कर दिया। अंधेरा बादल गुस्से में गरजा लेकिन उसकी शक्ति अब खत्म हो चुकी थी। आखिरकार वह हवा में बिखर गया।
नीलिमा और नीलक दोनों आसमान में उड़ते हुए उन रौशनी की लकीरों को देखकर खुश थे, जो तारों ने छोड़ दी थीं। उनकी मेहनत रंग लाई थी। जैसे ही दोनों जंगल की ओर लौटे, सभी जीव उन्हें देखने के लिए बाहर आ गए। पूरा जंगल नीले, सुनहरे और चांदी जैसे रंगों से चमक उठा था। नीलिमा उतरी और बोली कि रात हमेशा सुंदर रहती है, लेकिन उसे सुंदर रखने की जिम्मेदारी भी हमारी है। नीलक उसके बगल में खड़ा था और उसकी आँखों में गर्व झलक रहा था। नीलिमा ने उसके सिर पर हाथ फेरा और बोली कि उसके बिना आज यह संभव नहीं होता।
उस रात जंगल के जीव देर तक आसमान की तरफ देखते रहे। हर तारा साफ, शांत और चमकदार था। आसमान पहले से भी ज्यादा जगमगा रहा था और हर कोई जानता था कि यह नीलिमा और उसके नीले घोड़े की वजह से हुआ है। रात मानो यह कह रही हो कि जब तक ऐसे दिल मौजूद हैं जो रोशनी बचाने के लिए तैयार रहते हैं, तब तक अंधेरा जीत नहीं सकता।