बोलने वाली झील की परी
हरे-भरे जंगलों के बीच एक शांत और चौड़ी झील थी जिसे लोग फुसफुसाती झील कहते थे क्योंकि वहाँ की हवा और पानी किसी से भी बातें कर लेते थे। पानी इतना साफ था कि उसमें आसमान, पेड़ और इंसान की भावनाएँ तक दिख जाती थीं। रात में झील हल्की नीली चमक छोड़ती थी और लगता था कि कोई धीरे से बोल रहा हो। कहा जाता था कि इस झील में एक झील परी रहती है जो मन की छिपी भावनाएँ समझ लेती है और सही रास्ता दिखाती है। लोग झील के पास आते, बैठते और लौटते समय हल्का महसूस करते। लेकिन इस सब से दूर, एक राजकुमार था जो झील की इस जादुई बात पर यकीन नहीं करता था।
उस राजकुमार का नाम रियान था। वह बहादुर था, लेकिन उसके दिल में गुस्सा जल्दी भर जाता था। छोटी बात पर भी उसका चेहरा लाल हो जाता और वह बिना सोचे-विचारे शब्द बोल देता। महल के लोग उससे डरते थे क्योंकि वे नहीं जानते थे कि कब वह नाराज हो जाए। राजा और रानी उसकी चिंता करते थे और चाहते थे कि वह अपनी भावनाओं को समझना सीखे। एक दिन रियान ने अपनी तलवार खो दी। वह हर जगह ढूँढता रहा और आखिर में गुस्से से चिल्लाने लगा कि कोई उसकी चीजें चुरा रहा है। नौकर डर गए, घोड़े सहम गए और पूरा महल बेचैन हो गया। तभी राजा ने उसे शांत होने को कहा, लेकिन रियान और भड़क गया।
रात के खाने पर भी उसका मन खिन्न था। राजा ने धीरे से कहा कि शायद उसे कुछ समय अकेले बिताना चाहिए, और फुसफुसाती झील के पास जाना चाहिए। रियान ने यह सुनकर कहा कि ऐसी बातें सिर्फ छोटी कहानियाँ होती हैं जिन्हें बच्चे मानते हैं। लेकिन राजा ने समझाया कि कभी-कभी इंसान को खुद से बात करने के लिए शांत जगह की जरूरत होती है। मजबूरी में रियान जाने के लिए तैयार हुआ। उसने सोचा कि अगर इससे सभी लोग संतुष्ट हो जाएँगे तो वह थोड़ी देर वहाँ जाकर वापस आ जाएगा।
अगली सुबह वह घोड़े पर चढ़कर झील की ओर रवाना हुआ। रास्ता सुंदर था लेकिन रियान अपने मन में बार-बार सोच रहा था कि लोग छोटी-छोटी बातों को इतना क्यों बढ़ाते हैं। वह सोचता था कि गुस्सा होना गलत नहीं, लोग ही कमजोर होते हैं। झील के पास पहुँचते ही उसे हल्की ठंडी हवा महसूस हुई। पानी बिल्कुल शांत था और उस पर धूप चमक रही थी। उसने पहली बार महसूस किया कि वहाँ एक अजीब सी शांति है। वह झील के किनारे बैठ गया और अपने पैर पानी में डाल दिए।
अचानक झील में हल्का कंपन हुआ, जैसे कोई महीन आवाज निकली हो। रियान ने ध्यान से सुना। उसमें से फुसफुसाहट सी आई, “क्यों परेशान हो, राजकुमार?” रियान चौंक गया। उसने सोचा शायद हवा की आवाज है। लेकिन अगली बार यह और साफ सुनाई दी, “दिल भारी हो तो झील जान लेती है।” रियान ने इधर-उधर देखा, कोई नहीं था। तभी पानी पर हल्की चमक उठी और एक सुंदर परी उभरी। उसके पंख पानी की तरह पारदर्शी थे और आँखें शांत थीं। रियान घबरा गया, लेकिन वह शांत आवाज में बोली कि वह झील की परी है और यहाँ की हर भावना को महसूस कर सकती है।
महल लौटकर रियान ने अपनी तलवार ढूँढी तो पता चला कि वह अस्तबल में ही गिर गई थी। उसने नौकर को डाँटा नहीं, बल्कि हँसकर कहा कि शायद गलती उसी की थी जो ध्यान नहीं रख सका। महल के लोग हैरान थे, लेकिन खुश भी। दिनों के साथ रियान में एक बड़ा बदलाव आया। वह खुद को समझने लगा और धीरे-धीरे उसका गुस्सा कम होने लगा। लोग उससे खुलकर बात करने लगे। राजा और रानी गर्व महसूस करते थे कि उनका बेटा अब सच में भविष्य का नेता बन रहा है।
फुसफुसाती झील की परी कभी दिखाई नहीं दी, लेकिन उसकी सीख रियान के साथ रही। जब भी उसे मन भारी लगता, वह झील की तरफ देखता और खुद को शांत कर लेता। झील की हवा हर बार उसे याद दिलाती कि शांति ही असली शक्ति है।
शिक्षा: गुस्सा कम करने का सबसे अच्छा तरीका है खुद से बात कर पाना और दिल को शांत रखना।