काँच-का-डिब्बा-–-The-Glass-Box-Tale

काँच का डिब्बा – The Glass Box Tale

सोने से पहले की कहानियाँ

काँच का डिब्बा 

एक छोटे से कस्बे में रहने वाला एक साधारण युवक था जिसका नाम हांस था। उसकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि उसके पास इतना धन हो कि वह अपनी जिंदगी को आराम से जी सके। परंतु उसकी गरीबी उसे रोज़ उसी पुराने संघर्ष से गुजरने पर मजबूर करती थी। एक दिन वह जंगल में भटक रहा था, तभी उसकी मुलाकात एक बूढ़ी औरत से हुई, जिसके चेहरे पर रहस्यमयी शांति थी और हाथ में लकड़ी की लंबी छड़ी। हांस ने बिना झिझक के उससे कहा कि वह धन चाहता है।

बूढ़ी औरत ने कुछ देर उसे देखा और मुस्कुराते हुए बोली कि वह उसकी मदद कर सकती है। उसने उसे एक गहरे कुएँ के पास ले जाकर बताया कि उस कुएँ में नीचे तीन कमरे हैं, जिनमें क्रमश: पैसा, सोना और जवाहरात भरे हुए हैं। परंतु उन कमरों की रखवाली तीन बड़े और भयंकर कुत्ते करते हैं। बूढ़ी औरत ने हांस को एक पुराना काँच का डिब्बा दिखाया और कहा कि जिस कुत्ते की भी रक्षा उसे पार करनी हो, वह इस डिब्बे को सामने रख दे, और जैसे ही कुत्ता डिब्बे को देखेगा, शांत होकर एक तरफ हो जाएगा।

बदले में उसने सिर्फ इतना माँगा कि हांस उसके लिए वह काँच का डिब्बा ऊपर ले आए। हांस ने हामी तो भर ली, पर बूढ़ी औरत का व्यवहार इतना अधीर और कठोर लग रहा था कि उसे उस पर संदेह होने लगा। फिर भी वह कुएँ में उतरा और वैसा ही किया जैसा बूढ़ी औरत ने बताया था। पहला कमरा खुला और हांस ने ढेर सारा पैसा देखा, फिर सोना, फिर जवाहरात। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि हर बार जब वह कुत्ते के सामने डिब्बा रखता, वे शांत हो जाते, जैसे किसी जादू के प्रभाव में आ गए हों। तीनों कमरों से वह जितना धन चाह सकता था, लेकर ऊपर आया। बूढ़ी औरत ने हाथ बढ़ाए और माँगा कि काँच का डिब्बा उसे दे दिया जाए। पर हांस ने साफ इंकार कर दिया।

उसे अहसास हो चुका था कि डिब्बे में असली शक्ति है, और वह इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहता था। बूढ़ी औरत क्रोध में चिल्लाई और गायब हो गई, लेकिन हांस अपने धन और उस रहस्यमयी डिब्बे के साथ शहर लौट आया। अब उसके पास इतना धन था कि वह शहर का सबसे सम्मानित युवक बन गया। लेकिन धन से अधिक उसे उस डिब्बे का जादू आकर्षित करने लगा। धीरे-धीरे उसे पता चला कि डिब्बे को हल्का सा झटकने पर उनमें से कोई भी कुत्ता प्रकट हो सकता है और उसकी मदद कर सकता है। शहर की एक खूबसूरत राजकुमारी थी, जिसका नाम अन्ना था, जिसे उसके अपने पिता ने एक ऊँचे मीनार में बंद कर रखा था, क्योंकि उसे डर था कि कोई भी उसकी सुंदरता देखकर उसके करीब आना चाहेगा। लेकिन हांस के मन में राजकुमारी के लिए सम्मान और सच्ची भावना थी।

उसने निर्णय लिया कि वह उससे अवश्य मिलेगा। रात के अंधेरे में उसने काँच का डिब्बा झटककर पहला कुत्ता बुलाया और उसकी सहायता से महल की सुरक्षा तोड़कर मीनार तक पहुँचा। राजकुमारी अन्ना हांस की साहस देखकर प्रभावित हुई और उससे मिलने पर सहमत हो गई। दोनों कई रातों तक मिलते रहे और उनके बीच एक गहरा लगाव बन गया। लेकिन महल के पहरेदारों को जल्द ही इस बात का पता चल गया। अन्ना के पिता क्रोधित हो उठे और हांस को पकड़कर मौत की सजा सुना दी। हांस को फाँसी पर चढ़ाने की सारी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन उसके पास आशा की एक किरण थी। ठीक उसी समय उसने अपने काँच के डिब्बे को हल्के से थपथपाया और तीसरा, सबसे विशाल कुत्ता उसके सामने प्रकट हो गया। वह कुत्ता इतना शक्तिशाली था कि उसने पहरेदारों, सैनिकों और राजा की पूरी सेना को क्षण भर में रोक दिया।

राजा स्वयं यह दृश्य देखकर स्तब्ध हो गया। लेकिन गुस्से के बजाय उसके मन में अचानक विचार आया कि शायद उसकी बेटी की खुशी इसी युवक से जुड़ी हुई है। राजकुमारी अन्ना हांस के पास दौड़कर आई और राजा से उसे छोड़ देने की प्रार्थना की। हांस ने राजा के सामने झुककर कहा कि उसका इरादा कभी गलत नहीं था। राजा ने कुछ पल सोचा और फिर घोषणा की कि हांस और अन्ना का विवाह होगा, और वे दोनों राज्य के नए उत्तराधिकारी होंगे। हांस ने काँच का डिब्बा हमेशा अपने पास रखा, पर उसने कभी उसका इस्तेमाल गलत काम के लिए नहीं किया। उसके लिए वह सिर्फ एक जादुई साथी था जिसने उसकी जिंदगी बदलने में मदद की। हांस और अन्ना के राज्य में लोग खुशहाल रहे और कई सालों तक उस जादुई काँच के डिब्बे की कहानी सुनाते रहे जिसने एक साधारण युवक को राजा बना दिया।

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