एक छोटे से शहर में एक बहुत लालची आदमी रहता था। वह पहले से ही बहुत धनी था, लेकिन उसे सोने और कीमती चीज़ों का कभी संतोष नहीं होता था। उसे हमेशा और अधिक धन की चाह रहती थी। हालाँकि, इन सबके बीच वह अपनी छोटी बेटी से बहुत प्रेम करता था। उसकी बेटी ही उसके जीवन की सबसे बड़ी खुशी थी।
एक दिन वह आदमी जंगल के रास्ते से जा रहा था। तभी उसने देखा कि एक सुंदर परी के लंबे बाल पेड़ की शाखाओं में उलझे हुए हैं। परी बहुत परेशान थी और मदद के लिए इधर-उधर देख रही थी। आदमी को उस पर दया आ गई और उसने बड़ी सावधानी से परी के बालों को शाखाओं से छुड़ाया। परी आज़ाद हो गई और बहुत खुश हुई।
परी ने कृतज्ञता से कहा,
“तुमने मेरी मदद की है। मैं तुम्हें एक वरदान देना चाहती हूँ।”
यह सुनते ही उस आदमी के मन में लालच जाग उठा। उसने सोचा कि यह मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। उसने तुरंत कहा,
“मेरी इच्छा है कि मैं जिस भी चीज़ को छूऊँ, वह सोने में बदल जाए।”
परी ने उसकी इच्छा पूरी कर दी। आदमी बहुत खुश हो गया। घर लौटते समय उसने पत्थरों, पत्तों और लकड़ियों को छुआ और वे सब चमकते हुए सोने में बदल गए। वह अपनी शक्ति पर बहुत गर्व करने लगा।
जब वह घर पहुँचा तो उसकी छोटी बेटी खुशी-खुशी उसकी ओर दौड़ी। बेटी को देखकर वह भावुक हो गया और उसे गोद में उठाने के लिए झुक गया। जैसे ही उसने अपनी बेटी को छुआ, एक भयानक घटना घटी। उसकी प्यारी बेटी उसी पल ठंडी और कठोर सोने की मूर्ति में बदल गई।
उसकी सारी खुशी एक पल में गहरे दुख में बदल गई। वह जोर-जोर से रोने लगा और खुद को कोसने लगा। अब उसे समझ आ गया था कि उसके लालच ने उससे उसकी सबसे कीमती चीज़ छीन ली है। अब उसे न सोना चाहिए था और न धन, उसे बस अपनी बेटी चाहिए थी।
अगले ही दिन वह आदमी उसी जंगल की ओर निकल पड़ा जहाँ उसने परी से मुलाकात की थी। कई दिनों तक वह जंगल में भटकता रहा, परी को पुकारता रहा और अपनी गलती के लिए सच्चे दिल से पश्चाताप करता रहा। अंततः एक दिन वही परी उसके सामने प्रकट हुई।
आदमी तुरंत उसके पैरों में गिर पड़ा और बोला,
“मुझे क्षमा कर दीजिए। मैंने लालच में आकर बहुत बड़ी भूल कर दी। मुझे न धन चाहिए, न सोना। बस मेरी बेटी को वापस दे दीजिए।”
आदमी की सच्ची पश्चाताप भरी बातें सुनकर परी का हृदय पिघल गया। उसने कहा,
“जो अपनी गलती को समझ ले और प्रेम को धन से ऊपर रखे, वह क्षमा के योग्य होता है।”
परी ने अपने जादू से उसकी बेटी को फिर से जीवित कर दिया। वह मुस्कुराती हुई अपने पिता की गोद में आ गई। साथ ही परी ने उस आदमी से सोने में बदलने वाला वरदान भी वापस ले लिया।
उस दिन के बाद वह आदमी पूरी तरह बदल गया। उसने समझ लिया कि सच्चा धन सोना नहीं, बल्कि प्रेम, संतोष और परिवार होता है। उसने अपना बाकी जीवन अपनी बेटी की देखभाल और दूसरों की मदद में बिताया।
कहानी की सीख
लालच इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है, लेकिन सच्चा पश्चाताप और प्रेम जीवन को फिर से सही दिशा दे सकते हैं।
संतोष और प्रेम ही जीवन का असली धन हैं।