चांद के बच्चों का खोया हुआ खिलौना
रात का आसमान बिल्कुल शांत था, और पूरा गाँव हल्की नींद में डूबा था। घरों की छतों पर चांदनी ऐसे फैली थी जैसे किसी ने सफेद रेशम बिछा दिया हो। इसी शांत रात में गाँव की छोटी बच्ची अन्वी अपनी खिड़की से आसमान देख रही थी। उसे चांद को देखना बहुत अच्छा लगता था। उसे लगता था कि चांद कोई कहानी सुनाने वाला बूढ़ा दोस्त है। लेकिन उस रात चांद कुछ अलग दिख रहा था। उसकी रोशनी कम थी,
जैसे वह उदास हो। अन्वी ने माथा सिकोड़ते हुए सोचा कि चांद आज खुश क्यों नहीं है। उसने फिर से खिड़की के पास सिर टिकाया और चांद की ओर देखने लगी। कुछ देर बाद उसने एक बहुत अजीब बात देखी। चांद के अंदर छोटे-छोटे दो बच्चे दिखाई दे रहे थे। उनके चेहरे उतरे हुए थे, और वे एक-दूसरे से जैसे कुछ पूछ रहे थे। अन्वी ने पलकें झपकाईं और विश्वास करने की कोशिश की कि वह कुछ गलत नहीं देख रही।
लेकिन जब उसने दोबारा देखा तो बच्चे वहीं थे। वह घबरा तो गई, लेकिन उसे लगा कि यह जरूर किसी खास वजह से है। तभी चांद के एक बच्चे ने धीरे से अपना हाथ घुमाया। रोशनी की एक हल्की चमक अन्वी की खिड़की तक आई और उसमें एक छोटा सा गोल नक्शा नजर आया। अन्वी के मुंह से धीमी आवाज में निकला, “ये क्या है?” नक्शा चमकते हुए उसकी हथेली में आ गिरा। वह चौंक गई, लेकिन वह नक्शा ठंडा और मुलायम था, बिल्कुल किसी कपड़े जैसा। उसमें सिर्फ तीन चीजें बनी थीं—एक पहाड़ी, एक तालाब और गाँव के बाहर वाला पुराना पीपल।
नक्शे पर हल्की सी चांदी जैसी धूल चिपकी हुई थी, और बीच में एक छोटा सा तीर बना था जो बार-बार चमक रहा था। ऐसा लग रहा था कि तीर उसे किसी दिशा में ले जाना चाहता है। अन्वी ने कुछ क्षण सोचा, फिर कमरे की लाइट बंद की और बाहर निकल गई। उसका दिल थोड़ा तेज धड़क रहा था, लेकिन उसे महसूस हो रहा था कि चांद के बच्चे किसी मुसीबत में हैं और उसे उनकी मदद करनी होगी। गाँव बिलकुल शांत था। सिर्फ झींगुरों की आवाज सुनाई दे रही थी। अन्वी धीरे-धीरे चलते हुए नक्शे के तीर को देखती रही। तीर चमकते ही उसे पता चलता कि अगला रास्ता कौन सा है। वह गाँव के बाहर पहुंची और अब सामने वही पुराना पीपल का पेड़ खड़ा था। चांदनी उसकी जड़ों पर ऐसे गिर रही थी जैसे किसी ने उन्हें सफेद पाउडर से ढक दिया हो। नक्शे का तीर पेड़ की तरफ चमका।
अन्वी ने जड़ के पास झुककर देखा। वहाँ मिट्टी थोड़ी हिली हुई थी, जैसे किसी ने कुछ दबाया हो। उसने हाथ बढ़ाया और मिट्टी हटाने लगी। कुछ देर बाद उसे एक गोल पत्थर मिला, जिस पर छोटे-छोटे सितारे बने थे। वह पत्थर हल्का था और ठंडा भी। जैसे ही अन्वी ने उसे उठाया, उसके चारों ओर हल्की चांदी जैसी रोशनी फैल गई। अचानक ऊपर चांद से एक हल्की आवाज आई, जो हवा की तरह थी। उसमें कहा गया, “तुमने पहली निशानी ढूंढ ली।” अन्वी घबरा गई, पर आवाज बहुत नरम थी। जैसे कोई दादी कहानी सुना रही हो। उसने पत्थर को अपने पास रखा और नक्शे पर फिर गौर किया। अब उसमें तालाब की ओर का तीर चमक रहा था। अन्वी तालाब की तरफ बढ़ी।
रात की हवा ठंडी थी और पानी की सतह पर चांद की परछाई कांप रही थी। तालाब के किनारे पहुँचकर उसने आसपास देखा। नक्शे का तीर पानी की सतह पर चमक रहा था। उसे लगा कि शायद कोई चीज पानी के नीचे है। उसने एक लंबी डंडी उठाई और पानी में खंगालने लगी। अचानक डंडी किसी चीज से टकराई। जब उसने उसे बाहर निकाला तो उसके साथ एक सीपी जैसी चीज लगी हुई थी। लेकिन वह साधारण सीपी नहीं थी। उस पर चांद जैसा पैटर्न था और वह हल्की चमक रही थी। जैसे ही उसने सीपी को हाथ में लिया, चांदी की एक नई तरंग उसके चारों तरफ फैल गई और वही नरम आवाज फिर सुनाई दी, “दूसरी निशानी मिल गई।” अन्वी अब समझ चुकी थी कि यह केवल खेल नहीं है, बल्कि एक मिशन है जिसे सिर्फ वह पूरा कर सकती है। अब नक्शे में सिर्फ एक जगह बची थी—पहाड़ी। वह गाँव से थोड़ी दूर थी, लेकिन आज उसकी हिम्मत बिल्कुल अलग थी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे चांद खुद उसकी रक्षा कर रहा हो। पहाड़ी के पास हल्की घास और मिट्टी थी।
ऊपर जाते हुए उसे कुछ चमकता दिखा। उसने पास जाकर देखा तो एक छोटा सा लकड़ी का डिब्बा मिट्टी में आधा दबा था। उसने उसे उठाया और साफ किया। डिब्बा बहुत सुंदर था। उस पर चांदी की नक्काशी थी और बीच में एक छोटा सा गोल स्थान खाली था। अन्वी को तुरंत समझ आ गया कि शायद पहले मिले हुए दोनों चिन्ह उसी में फिट होंगे। उसने पहले गोल पत्थर और फिर चमकती सीपी डिब्बे में लगाई।
डिब्बा तुरंत चमकने लगा और उसके ऊपर एक छोटा सा चांद बन गया। अगले ही पल हल्की हवा चली और चांदी की रोशनी के बीच दो छोटे बच्चे चांद से उतर आए। वे बिल्कुल वैसे ही थे जैसे अन्वी ने चांद में देखे थे। उनमें से एक बोला, “हम चांद के बच्चे हैं। हमारा जादुई खिलौना खो गया था जो हमारे आसमान को रोशन रखता है। उसके बिना हमारा घर अंधेरा हो गया था। तुम्हारी दुनिया में वह खिलौना गलती से गिर गया था और तीन टुकड़ों में टूट गया।” दूसरा बच्चा बोला, “तुमने हमें उस खिलौने के हिस्से वापस दिलाए। हम अकेले इसे कभी नहीं ढूंढ पाते।”
फिर वे दोनों डिब्बे के पास आए। डिब्बा अपने आप खुला और उसके अंदर एक छोटा सा चांदी का खिलौना था, जो टूटे हुए हिस्सों से पूरा हो गया था। खिलौना किसी छोटे चांद जैसे आकार का था और उससे एक हल्की, मधुर रोशनी निकल रही थी। दोनों बच्चे खुश होकर बोले, “अब हमारा घर फिर से रोशन हो जाएगा।”
अन्वी मुस्कुराई, लेकिन पूछ बैठी, “क्या अब तुम लोग हमेशा वापस चांद पर चले जाओगे?” एक बच्चा बोला, “हाँ, हमें लौटना होगा। लेकिन तुमने जो किया है, उसकी वजह से हम हमेशा याद रखेंगे कि नीचे धरती पर एक दोस्त है जो किसी की भी मदद कर सकता है।” दूसरे बच्चे ने अपने हाथ से आकाश की दिशा में इशारा किया। अचानक रोशनी की एक सीढ़ी बनी, और दोनों बच्चे धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते गए। खिलौने की रोशनी दूर आसमान तक फैल रही थी।
कुछ ही देर बाद दोनों बच्चे चांद पर पहुँच गए। चांद पहले से ज्यादा चमकदार हो गया था। उसकी रोशनी अब पूरे गाँव पर ऐसे गिर रही थी जैसे वह हर घर को धन्यवाद दे रहा हो। अन्वी घर लौटी, अपने बिस्तर पर लेट गई और खिड़की से चांद को देखते हुए धीरे से बोली, “अगर फिर कभी कोई मदद चाहिए होगी, तो बस बुला लेना।” चांद हल्का सा टिमटिमाया, जैसे सिर हिलाकर “हाँ” कह रहा हो। और फिर वह धीरे-धीरे नींद में खो गई।
शिक्षा: सच में किया गया छोटा सा भी अच्छा काम दुनिया में रोशनी फैला सकता है और कभी बेकार नहीं जाता।