जादुई-मोरपंख-–-The-Magical-Peacock-Feather

जादुई मोरपंख – The Magical Peacock Feather

परी कथाएँ

जादुई मोरपंख

एक छोटे से कस्बे में ईशान नाम का एक खुशमिजाज बच्चा रहता था जो हमेशा कुछ नया सीखने और समझने की कोशिश करता था। उसे प्रकृति से बहुत लगाव था और वह अक्सर पास के जंगल में घूमने जाता था, जहाँ उसे पक्षियों की आवाजें, ताज़ी हवा की महक और सूरज की हल्की किरणें बहुत भाती थीं। एक दिन स्कूल से लौटते समय ईशान को रास्ते में एक नीला चमकता हुआ मोरपंख दिखाई दिया जो बाकी पंखों से बिलकुल अलग था। उस पंख में एक हल्की रोशनी थी, जैसे किसी ने उसके भीतर कोई जादुई ताकत भर दी हो।

ईशान ने पंख उठाया और जैसे ही उसकी उंगलियाँ उस पर पड़ीं, उसके शरीर में हल्की सी झनझनाहट दौड़ गई। अचानक उसे महसूस हुआ कि दुनिया बड़ी होने लगी है, पर असल में वह खुद छोटा होता जा रहा था। कुछ ही पलों में वह एक चूहा जितना छोटा हो गया। डर की जगह उसके मन में उत्सुकता भरी थी पर वह हैरान भी था कि यह कैसे हुआ। थोड़ी देर बाद उसने पंख फिर से छुआ और वह वापस अपनी असली ऊँचाई पर लौट आया। अब उसे समझ आ गया कि इस पंख में इच्छा के अनुसार छोटा या बड़ा करने की शक्ति है।

ईशान के मन में पहला विचार यही आया कि इस शक्ति का इस्तेमाल मजे के लिए किया जाए, पर उसी पल उसे अपनी दादी की बात याद आई कि बड़ी ताकत हमेशा सोच समझकर इस्तेमाल करनी चाहिए। अगले कुछ दिनों में उसने इस खूफिया शक्ति को किसी को बताए बिना काम में लिया। वह कभी छोटा होकर फूलों के भीतर छिपे कीड़ों को देखता, कभी बड़ा होकर पेड़ की सबसे ऊपर वाली शाखा तक पहुँच जाता। उसे यह शक्ति रोमांच से भरी लगती थी। लेकिन उसकी जिंदगी में मोड़ तब आया जब एक शाम वह अपने दोस्त के घर से लौट रहा था। बाजार की तरफ से अचानक शोर उठने लगा। लोग घबराए हुए इधर उधर भाग रहे थे और दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर रहे थे।

ईशान आगे बढ़ा तो देखा कि गली के कोने वाली ज्वेलरी की दुकान में चोरी हो रही थी। दो चोर दुकान में घुसकर कीमती चीजें बाँध रहे थे और बाहर पहरा देने के लिए एक आदमी खड़ा था। ईशान कुछ समय के लिए डर गया, पर उसके भीतर की हिम्मत जागी। उसने सोचा कि अगर अब वह कुछ नहीं करेगा तो चोर आसानी से भाग जाएंगे। उसने चुपचाप मोरपंख निकाला और उसे छूते हुए अपने मन में सोचा कि उसे छोटा होना है। पल भर में वह इतना छोटा हो गया कि किसी को दिखाई ही नहीं दे सकता था। वह दीवार के सहारे चुपचाप अंदर घुसा और चोरों की टांगों के पास पहुँचा, जहाँ एक भारी बोरा खुला पड़ा था। उसने मोरपंख को फिर से छुआ और इस बार अपने मन में बड़ा होने का विचार किया। कुछ ही पलों में वह इतना बड़ा हो गया कि उसकी अचानक उपस्थिति से चोर घबरा गए। वे सोच भी नहीं पाए कि यह बच्चा कहाँ से आया।

ईशान ने एक जोरदार आवाज में कहा कि पुलिस रास्ते में है और दुकान वाला बाहर लोगों को बुला चुका है। डर के मारे चोर उलटे कदम भागने लगे और बाहर खड़ा पहरेदार भी भीड़ देखकर भाग निकला। थोड़ी देर में आसपास के लोग और असली दुकान मालिक वहाँ पहुँच गए। सब हैरान थे कि ईशान ने यह कैसे किया, पर वह मुस्कुराकर बोला कि उसे बस समय पर मदद करने का मौका मिल गया।

किसी को भी उसके रहस्य का पता नहीं चला। घर लौटते समय वह मोरपंख को देख रहा था। उसे लगा कि आज उसने सही काम किया, पर उसके भीतर एक अजीब सी भावना भी उठ रही थी। जैसे ही वह घर पहुँचा, पंख ने हल्की गर्मी देना शुरू किया। अचानक पंख हवा में उठा और एक नरम नीली चमक के साथ गायब हो गया। जैसे किसी ने उससे वह शक्ति वापस ले ली हो। ईशान समझ गया कि यह शक्ति उसे सिर्फ सही काम करने के लिए मिली थी, मजाक या फायदा लेने के लिए नहीं। उस दिन के बाद से उसके भीतर एक नई समझ आ गई।

वह जान गया कि हर बड़ी क्षमता का असली अर्थ जिम्मेदारी में होता है। ईशान उस रात चैन से सो गया, इस गर्व के साथ कि उसने बिना किसी लालच के सही काम किया और यही उसकी सबसे बड़ी जीत थी।

शिक्षा: असली शक्ति वही है जो दूसरों की भलाई में इस्तेमाल हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *