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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: असली योद्धा कौन? भाग पंद्रह

विक्रम और बेताल: असली योद्धा कौन? अंधेरी रात, घने पेड़ों की कतारें और हवा में फैलती मिट्टी की गंध। राजा विक्रमादित्य अपनी तलवार कमर पर बांधे हुए उसी दृढ़ कदमों से आगे बढ़ रहे थे जिन पर पूरा राज्य गर्व करता था। बेताल उनके कंधे पर उल्टा लटका था, पर उसकी आँखों में वही पुरानी […]

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raman-takes-revenge-on-tatacharya-6

तेनाली रामन की पुरोहित से बदला लेने की योजना और चतुराइयाँ – 6 से 10

ताताचार्य से बदला लेता है रामन – 6 इस प्रकार तेनाली रामन कृष्णदेव राय के दरबारी विदूषक बन गए। उन्होंने अपने परिवार के लिए एक घर बनवाया। उन्होंने अपने पारिवारिक मामलों को लगभग स्थिर कर लिया था। वह ताताचार्य को सबक सिखाने का अवसर ढूंढ रहे थे। अंततः रामन को पुरोहित से बदला लेने का […]

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अहंकारी-पंडितों-की-शिक्षा---Humbling-Vedic-Pandits

अहंकारी पंडितों की शिक्षा – Humbling Vedic Pandits

अहंकारी पंडितों की शिक्षा एक समय की बात है, दो अहंकारी ब्राह्मण थे। वे स्वयं को वेदों का सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता मानते थे और लोगों को शास्त्रार्थ के लिए ललकारा करते थे। उनकी एक विचित्र शर्त थी: जो भी हारे, उसे यह लिखित रूप में प्रमाणपत्र देना होगा कि वह वेदों के ज्ञान में इन दोनों […]

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the-mouse-and-the-frog-story

मेंढक और चूहे की दोस्ती

एक समय की बात है, एक चूहा और एक मेंढक गहरे मित्र थे। हर सुबह मेंढक तालाब से निकलकर पेड़ के छेद में रहने वाले चूहे से मिलने आता। वह उसके साथ समय बिताकर वापस अपने घर चला जाता। एक दिन मेंढक ने सोचा कि वह हमेशा चूहे से मिलने खुद ही क्यों आए? चूहा […]

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गुरुभक्त एकलव्य का त्याग - Ekalavya's Sacrifice

गुरुभक्त एकलव्य का त्याग – Ekalavya’s Sacrifice

गुरुभक्त एकलव्य का त्याग महाभारत के समय जब पांडव और कौरव द्रोणाचार्य से विद्या प्राप्त कर रहे थे, तब एक विलक्षण छात्र एकलव्य नामक निषाद कुमार भी धनुर्विद्या सीखने की अभिलाषा रखता था। द्रोणाचार्य हस्तिनापुर से दूर अपने आश्रम में राजकुमारों को शिक्षा देते थे। एकलव्य वहाँ चुपचाप छिपकर पूरी प्रक्रिया देखा करता था। उसने […]

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the-milkmaid-and-her-pail-story

दूधवाली और उसकी मटकी

एक ग्वालिन थी जिसका नाम पारो था। एक दिन उसने अपनी गाय का दूध निकाला और दो बाल्टी भरकर ताजा दूध लेकर बाजार चल दी। उसने दोनों बाल्टियों को एक डंडे पर लटकाया और बेचने के लिए रवाना हुई। बाजार जाते हुए उसके मन में धन के ख्याल आने लगे। वह सोचने लगी कि दूध […]

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विक्रम और बेताल: सत्य प्रेम और छलावा भाग उन्नीस

विक्रम और बेताल: सत्य प्रेम और छलावा  रात अपने गहरे सन्नाटे के साथ पूरी तरह जंगल पर फैल चुकी थी। पेड़ों की शाखाओं के बीच चाँद की हल्की रोशनी ऐसे उतर रही थी जैसे आसमान से किसी ने टूटे मोतियों को धीरे धीरे धरती पर बिखेर दिया हो। राजा विक्रम, अपने दृढ़ कदमों के साथ, […]

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विक्रम और बेताल: क्षमा की महानता भाग अठारह

विक्रम और बेताल: क्षमा की महानता  रात का अंधेरा गहरा था। श्मशान भूमि में हल्की धुंध घिरी हुई थी, और हवा की सरसराहट में सूखे पत्तों की भँभोर जैसी आवाज गूँज रही थी। पेड़ों की टहनियाँ आपस में टकरा रही थीं, मानो किसी अदृश्य शक्ति के साथ संघर्ष कर रही हों। उस अंधकार और रहस्यमय […]

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अग्निदेव का वरदान | The Blessing of Agni Dev

अग्निदेव का वरदान | The Blessing of Agni Dev

अग्निदेव का वरदान  बहुत समय पहले की बात है। उत्तरी पर्वतों से घिरे एक शांत और समृद्ध राज्य का नाम था अग्निकाश। यह राज्य कृषि, संस्कृति और देवपूजा के लिए प्रसिद्ध था। लोग प्रकृति की पूजा करते और विशेष रूप से अग्निदेव का आभार मानते, क्योंकि उनका विश्वास था कि अग्निदेव ही राज्य में उष्मा, […]

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विक्रम और बेताल: सच्चा पुरस्कार भाग आठ

विक्रम और बेताल: सच्चा पुरस्कार एक अँधेरी और बरसाती रात थी। चारों ओर अजीब-अजीब आवाज़ें गूँज रही थीं और सियारों की कराहती हुई ध्वनि माहौल को और भयावह बना रही थी। वातावरण कितना भी भयावह क्यों न हो, राजा विक्रमादित्य तनिक भी नहीं डरे। वे पेड़ पर चढ़कर शव को उतार लाए और उसे कंधे […]

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