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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: क्षमा की महानता भाग अठारह

विक्रम और बेताल: क्षमा की महानता  रात का अंधेरा गहरा था। श्मशान भूमि में हल्की धुंध घिरी हुई थी, और हवा की सरसराहट में सूखे पत्तों की भँभोर जैसी आवाज गूँज रही थी। पेड़ों की टहनियाँ आपस में टकरा रही थीं, मानो किसी अदृश्य शक्ति के साथ संघर्ष कर रही हों। उस अंधकार और रहस्यमय […]

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विक्रम और बेताल: मेहनत और भाग्य की परीक्षा भाग इक्कीस

विक्रम और बेताल: मेहनत और भाग्य की परीक्षा रात गहरी होती जा रही थी। श्मशान की चिता से उठती मंद लपटें आसमान में अजीब-सी रौशनी फैला रही थीं। पूरा वातावरण भय, मरघट और रहस्य से भरा हुआ था। लेकिन राजा विक्रम एक बार फिर बेताल को पकड़ने के लिए निर्भीकता से आगे बढ़ रहे थे। […]

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फूलों-की-दुखी-परी-Flower-Fairy-Who-Lost-Her-Smile

फूलों की दुखी परी Flower Fairy Who Lost Her Smile

फूलों की दुखी परी फूलों के घाटी नाम की एक शांत और रंगीन जगह थी जहाँ हर तरफ खुशबू फैली रहती थी और छोटे छोटे तितलियाँ हवा में खेलती थीं। इस घाटी की सारी सुंदरता का ख्याल रखती थी फूलों की परी, जिसे सब सिया कहते थे। सिया की एक खास बात थी कि जितनी […]

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singhasan-battisi-story-32-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 – रूपवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 बत्तीसवें दिन राजा भोज अपने निर्णय के साथ बत्तीसवीं गुड़िया के सामने पहुँचे। गुड़िया ने उन्हें देखकर कहा कि आज वे सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुक नहीं दिख रहे हैं। उसने अपना परिचय देते हुए कहा, “राजा भोज, मैं रूपवती हूँ, इन सभी गुड़ियाओं की अधिष्ठात्री। आज आपके मन में […]

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शहरी-चूहा-और-ग्रामीण-चूहा

शहरी चूहा और ग्रामीण चूहा

एक समय की बात है, एक शहरी चूहा और एक ग्रामीण चूहा रहते थे। एक दिन ग्रामीण चूहे ने शहरी चूहे को अपने घर आमंत्रित किया। ग्रामीण चूहे ने जब भोजन परोसा तो शहरी चूहा निराश हो गया। उसने कहा, “बस इतना ही? यह तो कुछ मक्का और अनाज के दाने मात्र हैं। यदि तुम […]

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विक्रम और बेताल: जीवन का प्रतिफल भाग छह

विक्रम और बेताल: जीवन का प्रतिफल रात अत्यन्त अँधेरी थी। बीच-बीच में तेज़ बारिश की धाराएँ गिरतीं और फिर अचानक रुक जातीं। हवा के तेज़ झोंके पेड़ों को इस तरह हिलाते मानो वे किसी अदृश्य शक्ति के आगे काँप रहे हों। अजीब-अजीब सी आवाज़ें, दूर कहीं सियारों की करुण चीत्कार, और बीच-बीच में गड़गड़ाहट की […]

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विक्रम और बेताल: इंसानियत की असली पहचान भाग बीस

विक्रम और बेताल: इंसानियत की असली पहचान अंधेरी रात का वह समय था जब श्मशान की आग बुझ चुकी थी और हवा में बस धुएँ की हल्की सी गंध तैर रही थी। राजा विक्रम अपनी तलवार संभाले हुए उसी पेड़ की ओर बढ़ रहे थे जहाँ बेताल उल्टा लटका रहता था। हर कहानी के साथ […]

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विक्रम और बेताल: झूठी शान का अंत भाग सत्रह

विक्रम और बेताल: झूठी शान का अंत रात का अंधेरा गहरा था। श्मशान भूमि पर हल्की धुंध का घेरा फैला हुआ था, और पेड़ों की सूखी शाखाएँ हवा में टकराकर डरावनी ध्वनि पैदा कर रही थीं। चारों ओर गूंजती फुसफुसाहटें और हवा में उड़ते पत्तों की सरसराहट वातावरण को और भी भयानक बना रही थी। […]

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नन्ही-तितली-परी---Tiny-Butterfly-Fairy

नन्ही तितली परी – Tiny Butterfly Fairy

नन्ही तितली परी नीले पहाड़ों के पीछे एक शांत और रंगों से भरी घाटी थी, जिसे लोग रूपनगर कहते थे। यहाँ हर सुबह सूरज की किरणें ऐसे गिरती थीं जैसे सोने की हल्की बारिश हो रही हो। इस घाटी में फूल सिर्फ फूल नहीं थे, वे हवा के साथ गुनगुनाते थे। पत्तों में हल्की चमक […]

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विक्रम और बेताल: वचन की ताकत भाग बाईस

विक्रम और बेताल: वचन की ताकत घना जंगल अंधेरे में डूबा हुआ था। पेड़ों की परछाइयाँ हिलती हुई प्रतीत होती थीं और हवा में एक अनजाना भय तैर रहा था। राजा विक्रम अपने मजबूत कदमों के साथ श्मशान की ओर बढ़ रहे थे, जहाँ बेताल फिर से उसी पेड़ से उलटा लटका हुआ था। जैसे […]

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