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सिंहासन बत्तीसी कथा 22 – अनुरोधवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 22 जब राजा भोज सिंहासन पर बैठने हेतु अग्रसर हुए, तो बाईसवीं गुड़िया उनके सामने आई और विनम्र स्वर में बोली कि वह उन्हें राजा विक्रमादित्य के एक विशिष्ट गुण का प्रसंग सुनाएगी। उसने अपना परिचय देते हुए कहा कि उसका नाम अनुरोधवती है और वह जानना चाहती है कि क्या राजा […]

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उल्लू-और-सुबह-का-पंछी-_-The-Owl-and-the-Morning-Bird

उल्लू और सुबह का पंछी | The Owl and the Morning Bird

उल्लू और सुबह का पंछी  घना जंगल था जहाँ सुबह की हल्की धूप पेड़ों के पत्तों पर गिरकर एक अलग ही चमक पैदा करती थी। जंगल के सभी पक्षी सुबह-सुबह जागकर उड़ान भरते थे और अपनी मीठी आवाजों से पूरे माहौल को ताज़ा कर देते थे। लेकिन उसी जंगल के एक पुराने पेड़ की खोखी […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 1 – रत्नमंजरी की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 1 एक सुंदर गुड़िया अचानक तेज़ प्रकाश से घिरी और कुछ ही क्षणों में वह एक दिव्य और तेजस्वी स्त्री में बदल गई। उसके चेहरे पर अद्भुत चमक थी। वह मधुर पर दृढ़ स्वर में बोली,“राजा भोज, मैं रत्नमंजरी हूँ। हम इसलिए हँसे क्योंकि आप उस महान राजा जैसे नहीं हैं, जो […]

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मेंढक और चूहे की दोस्ती

एक समय की बात है, एक चूहा और एक मेंढक गहरे मित्र थे। हर सुबह मेंढक तालाब से निकलकर पेड़ के छेद में रहने वाले चूहे से मिलने आता। वह उसके साथ समय बिताकर वापस अपने घर चला जाता। एक दिन मेंढक ने सोचा कि वह हमेशा चूहे से मिलने खुद ही क्यों आए? चूहा […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 5 – लीलावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 5 पांचवीं गुड़िया लीलावती की कहानी इस प्रकार है कि अगले दिन प्रातःकाल राजा भोज फिर से उस अद्वितीय सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़े, किंतु जैसे ही वे पास पहुँचे, सिंहासन से पांचवीं गुड़िया निकलकर उनके समक्ष आ खड़ी हुई और मधुर स्वर में बोली कि मेरा नाम लीलावती है […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 21 – चंद्रज्योति की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 21 अगली सुबह जब राजा भोज पुनः उस दिव्य सिंहासन पर बैठने का प्रयत्न करने लगे, तो उसी क्षण उनके सामने इक्कीसवीं पुतली चंद्रज्योति प्रकट हुई। वह चमकती हुई रौशनी की तरह उनके सम्मुख अवतरित हुई और मनोहर स्वर में बोली कि वह विक्रमादित्य के पवित्र और शक्तिमान सिंहासन की इक्कीसवीं पुतली […]

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गोकर्ण-का-शिवलिंग---Gokarna-Shiva-Linga

गोकर्ण का शिवलिंग – Gokarna Shiva Linga

गोकर्ण का शिवलिंग एक दिन लंका के समुद्र तट पर रावण टहल रहा था। उसने देखा कि उसकी माता ने समुद्र के किनारे की मिट्टी से अपने हाथों से एक शिवलिंग बनाया था। वह उस लिंग की पूजा कर रही थीं, और उनकी पूजा के बाद लहरें उस लिंग को बहा ले जाती थीं। यह […]

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पानी-की-नन्ही-रानी-–-The-Little-Queen-of-Water

पानी की नन्ही रानी – The Little Queen of Water

पानी की नन्ही रानी गाँव धीरे धीरे चिंता में डूब रहा था क्योंकि नदी का जल हर दिन कम होता जा रहा था, पहले जो नदी पूरे उत्साह से बहती थी अब सिर्फ पतली सी धारा बची थी और कई जगह तो नदी का तल दिखने लगा था, बच्चे खेलना छोड़कर नदी देखने जाते थे […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 28 – वैदेही की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 28 राजा भोज जब अट्ठाईसवें दिन पुनः सिंहासन पर बैठने हेतु आगे बढ़े, तभी अट्ठाईसवीं गुड़िया वैदेही उनके सामने प्रकट हुई। उसने स्वयं का परिचय देते हुए कहा, “राजा भोज, मेरा नाम वैदेही है। मैं इस सिंहासन की अट्ठाईसवीं गुड़िया हूँ। क्या आपको कभी देवेंद्र इंद्र ने अपने सिंहासन पर बैठने के […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: अंधविश्वास का भ्रम भाग चौदह

विक्रम और बेताल: अंधविश्वास का भ्रम  रात गहरी हो चुकी थी। आसमान बादलों से ढका था और हवा में ठंडक ऐसी थी कि जंगल की पत्तियाँ एक दूसरे से टकरा कर अजीब सी फुसफुसाहट पैदा कर रही थीं। उज्जैन के राजा विक्रमादित्य अपने वचन को निभाने के लिए श्मशान की ओर बढ़ते पड़ते थे और […]

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