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काँच का जंगल | The Glass Forest

काँच का जंगल एक शांत गाँव की सीमा से थोड़ी दूर एक रहस्यमय जंगल था जिसे लोग काँच का जंगल कहते थे। कोई भी वहाँ आसानी से नहीं जाता था क्योंकि कहा जाता था कि उस जंगल में हर पेड़, हर पत्ता, हर फूल, यहाँ तक कि मिट्टी भी चमचमाते काँच की बनी हुई थी। […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 30 – जया लक्ष्मी की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 30 तीसवें दिन जब राजा भोज फिर से सिंहासन पर बैठने आए, तो तीसवीं गुड़िया ने उन्हें रोका और अपना परिचय देते हुए कहानी सुनाने लगी। उसने कहा कि वह जया लक्ष्मी है, विक्रमादित्य के सिंहासन की तीसवीं गुड़िया। वह बोली कि हर दिन राजा भोज सिंहासन पर बैठने का प्रयास करते […]

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दानवीर कर्ण का त्याग - Karna’s Benevolence

दानवीर कर्ण का त्याग – Karna’s Benevolence

दानवीर कर्ण का त्याग बारिश की झड़ी लगी हुई थी। मूसलाधार वर्षा ने सब कुछ भिगो दिया था। उसी बीच एक ब्राह्मण यज्ञ की सामग्री जुटाने के लिए निकला था। उसे यज्ञ के लिए सूखी लकड़ियों की आवश्यकता थी, किंतु वर्षा के कारण बाहर का समस्त काष्ठ भीगा हुआ था। निराश ब्राह्मण सबसे पहले हस्तिनापुर […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 12 – पद्मावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 12 मौका बारहवें दिन का था। जब राजा भोज सिंहासन की ओर बढ़ रहे थे, तब बारहवीं गुड़िया प्रकट हुई। “हे राजा भोज, मेरा नाम पद्मावती है। क्या यह सत्य है कि आप राजा विक्रमादित्य जैसे सहिष्णु, वीर, उदार और परोपकारी हैं? पहले आप उनकी एक कथा सुनिए, फिर तय कीजिए कि […]

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पितृ-वचन-का-पालन---Lord-Rama’s-Word (1)

पितृ-वचन का पालन – Lord Rama’s Word

 पितृ-वचन का पालन प्रभु राम एक सुंदर युवक के रूप में बड़े हुए और अल्पायु में ही ऋषि विश्वामित्र के साथ राक्षसों खर और दूषण का वध करने चले गए, जो ऋषि की तपस्या में विघ्न डाल रहे थे। कुछ समय बाद, ऋषि राम को राजा जनक के दरबार में ले गए, जहाँ भगवान शिव […]

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चतुराई और हास्य से सजी तेनाली रामन की कथाएँ – 46 से 50

दुल्हन ने दुल्हे को जूता फेंका – 46 एक बार राजा तेनाली रामन से निजी वार्ता में व्यस्त थे। बातचीत के बीच राजा ने रामन को एक असामान्य चुनौती दी। रामन ने कहा कि एक स्त्री एक वर्ष के भीतर उनके मुख पर चप्पल फेंकेगी। राजा ने यह चुनौती स्वीकार करते हुए कहा कि यदि […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 29 – मानवती की कथा

इस कथा के अनुसार, उनत्तीसवें दिन जब राजा भोज शक्तिशाली और गौरवशाली सिंहासन पर बैठने का प्रयास कर रहे थे, तभी उनत्तीसवीं गुड़िया मानवती ने उन्हें रोकते हुए कहा कि वे तभी इस अद्भुत सिंहासन पर बैठने योग्य होंगे, जब उनमें राजा विक्रमादित्य जैसे महान गुणों का समावेश हो। उन्होंने अपने परिचय के बाद राजा […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 9 – मधुमालती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 9 अगले दिन जब राजा भोज फिर से उस अद्भुत सिंहासन के समीप पहुँचे तो नौवीं पुतली उनके सामने एक सुंदर स्त्री के रूप में प्रकट हुई। उसने मधुर किंतु दृढ़ स्वर में कहा कि उसका नाम मधुमालती है। उसने स्पष्ट किया कि इस सिंहासन पर बैठने के लिए राजा को वही […]

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चांद-के-बच्चों-का-खोया-हुआ-खिलौना---The-Lost-Toy-of-the-Moon-Children

चांद के बच्चों का खोया हुआ खिलौना – The Lost Toy of the Moon Children

चांद के बच्चों का खोया हुआ खिलौना रात का आसमान बिल्कुल शांत था, और पूरा गाँव हल्की नींद में डूबा था। घरों की छतों पर चांदनी ऐसे फैली थी जैसे किसी ने सफेद रेशम बिछा दिया हो। इसी शांत रात में गाँव की छोटी बच्ची अन्वी अपनी खिड़की से आसमान देख रही थी। उसे चांद […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: एक अधूरी प्रतिज्ञा और प्राणों की बाज़ी पर टिका सत्य भाग पाँच

विक्रम और बेताल: एक अधूरी प्रतिज्ञा और प्राणों की बाज़ी पर टिका सत्य रात अत्यंत भयावह थी। कभी हल्की, कभी तेज़ वर्षा रुक-रुक कर हो रही थी। तेज़ हवाएँ पेड़ों को झकझोर रही थीं। वातावरण में अजीब सी घुटन और अनजान आवाज़ें गूंज रही थीं। बिजली की चमक के साथ आसपास की परछाइयाँ विकराल चेहरों […]

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