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सिंहासन बत्तीसी कथा 17 – विद्यावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 17 – विद्यावती की कथा अगली सुबह राजा भोज फिर से उस दिव्य सिंहासन के समीप पहुँचे और वे उस पर बैठने ही वाले थे कि सत्रहवीं पुतली विद्यावती प्रकट हुई। उसने राजा भोज को रोका और कहा कि वह उन्हें एक ऐसी कथा सुनाना चाहती है जिससे स्पष्ट हो सके कि […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 9 – मधुमालती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 9 अगले दिन जब राजा भोज फिर से उस अद्भुत सिंहासन के समीप पहुँचे तो नौवीं पुतली उनके सामने एक सुंदर स्त्री के रूप में प्रकट हुई। उसने मधुर किंतु दृढ़ स्वर में कहा कि उसका नाम मधुमालती है। उसने स्पष्ट किया कि इस सिंहासन पर बैठने के लिए राजा को वही […]

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धीमी-कछुआ-और-घमंडी-खरगोश---The-Slow-Turtle-and-the-Proud-Hare

धीमा कछुआ और घमंडी खरगोश – The Slow Turtle and the Proud Hare

धीमा कछुआ और घमंडी खरगोश घने पेड़ों से ढकी एक सुंदर सी घाटी थी, जहाँ कई तरह के जानवर रहते थे. वहाँ पास ही एक हरा-भरा मैदान था, जहाँ हर सुबह सूरज की किरणें हल्की गर्मी के साथ उतरती थीं और ठंडी हवा पूरे माहौल को सुखद बना देती थी. इसी मैदान में एक धीमा […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 11 – त्रिलोचनी की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 11 ग्यारहवें दिन, राजा भोज धीरे-धीरे राज्याभिषेक की ओर बढ़े। तभी ग्यारहवीं गुड़िया त्रिलोचनी प्रकट हुई और उन्होंने राजा के सामने राजा विक्रमादित्य की एक अन्य कथा कहनी शुरू की। “राजा भोज, मेरा नाम त्रिलोचनी है। मैंने इस सिंहासन के महान शासक राजा विक्रमादित्य की लंबे समय तक सेवा की है। मैंने […]

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चींटी और कबूतर की मित्रता

गर्मी के एक तपते दिन, एक चींटी पानी की तलाश में इधर-उधर घूम रही थी। काफी देर भटकने के बाद उसे एक नदी दिखाई दी। पानी देखकर वह बहुत खुश हुई। वह पानी पीने के लिए एक छोटे पत्थर पर चढ़ी, पर फिसल कर नदी में गिर गई। वह डूबने लगी। उसी समय पास के […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 16 – सत्यवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 16  सोलहवें दिन फिर से राजा भोज सिंहासन पर बैठने चले, तभी सिंहासन की सोलहवीं गुड़िया प्रकट हुई और उसने उन्हें रोका। गुड़िया ने कहा कि वह उन्हें राजा विक्रमादित्य की एक कहानी सुनाएगी, जो उनकी अनुपम उदारता को दर्शाती है। यदि राजा भोज उस उदारता की बराबरी कर सकें, तभी वे […]

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मुर्गा-और-सूरज-का-भ्रम-_-The-Rooster-and-the-Illusion-of-the-Sun

मुर्गा और सूरज का भ्रम | The Rooster and the Illusion of the Sun

मुर्गा और सूरज का भ्रम शांत गाँव के किनारे फैली हरी जमीन पर एक लंबा सा बाड़ा बना था जहाँ कई तरह के पक्षी रहते थे और उनमें से सबसे शोर मचाने वाला था एक लाल कलगी वाला मुर्गा जिसका नाम सब प्यार से मुन्ना मुर्गा बुलाते थे क्योंकि उसकी बाँग इतनी तेज होती थी […]

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नन्ही-तितली-परी---Tiny-Butterfly-Fairy

नन्ही तितली परी – Tiny Butterfly Fairy

नन्ही तितली परी नीले पहाड़ों के पीछे एक शांत और रंगों से भरी घाटी थी, जिसे लोग रूपनगर कहते थे। यहाँ हर सुबह सूरज की किरणें ऐसे गिरती थीं जैसे सोने की हल्की बारिश हो रही हो। इस घाटी में फूल सिर्फ फूल नहीं थे, वे हवा के साथ गुनगुनाते थे। पत्तों में हल्की चमक […]

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दत्तात्रेय-का-भोजन-और-चमत्कार---Feeding-Dattatreya-Bestows-Miracles

दत्तात्रेय का भोजन और चमत्कार – Feeding Dattatreya Bestows Miracles

दत्तात्रेय का भोजन और चमत्कार एक गरीब ब्राह्मण दंपत्ति थे – राजा शर्मा और उनकी पत्नी सुमती। उनके अनेक संतानें हुईं, परंतु केवल दो ही जीवित बच पाईं: एक अंधा पुत्र और दूसरा लंगड़ा पुत्र। उनके परिवार की परंपरा थी कि दोपहर में ब्राह्मण अतिथियों को भोजन कराए बिना स्वयं भोजन नहीं करते। एक दिन, […]

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सुनहरी-हवा-की-रानी-Golden-Queen-of-the-Wind

सुनहरी हवा की रानी – Golden Queen of the Wind

सुनहरी हवा की रानी  एक शांत सा गाँव था जहाँ हर सुबह सूरज की रोशनी और हल्की हवा बच्चों को खेलने का बुलावा देती थी। गाँव वाले इस हवा को अपना दोस्त मानते थे क्योंकि यह खेतों में खड़ी फसलों को झुलाती थी, पेड़ों को नाचने पर मजबूर करती थी और गर्मी में ठंडी राहत […]

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