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खरगोश-और-कड़वी-औषधि-–-The-Rabbit-and-the-Bitter-Medicine

खरगोश और कड़वी औषधि – The Rabbit and the Bitter Medicine

खरगोश और कड़वी औषधि  हरीभरी पहाड़ियों के पास बसे एक शांत जंगल में एक छोटा सा खरगोश रहता था, जिसका नाम मीनू था। मीनू बहुत तेज दौड़ता था, पेड़ों के बीच कूदता-फाँदता फिरता था और पूरे जंगल का सबसे चंचल जीव माना जाता था। सुबह होते ही वह अपने बिल से निकलकर इधर-उधर दौड़ लगाता, […]

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Saktuprasta-and-Squirrel-Heaven-Story---सक्तुप्रस्त-और-स्वर्ण-धूसर-गिलहरी-की-कथा

सक्तुप्रस्त और स्वर्ण-धूसर गिलहरी – Saktuprasta and Squirrel of Heaven

सक्तुप्रस्त और स्वर्ण-धूसर गिलहरी एक समय की बात है, एक गिलहरी थी जिसके शरीर का दाहिना भाग स्वर्णिम था और बायाँ भाग धूसर वर्ण का था। जहाँ कहीं भी कोई यज्ञ होता, वह गिलहरी वहाँ जाकर भूमि और जल में लोटने लगती। एक दिन पाण्डवों में ज्येष्ठ, युधिष्ठिर अर्थात धर्मराज, एक महान यज्ञ का अनुष्ठान […]

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मेहनती-चींटी-और-आलसी-कीड़ा---The-Hardworking-Ant-and-the-Lazy-Worm

मेहनती चींटी और आलसी कीड़ा – The Hardworking Ant and the Lazy Worm

मेहनती चींटी और आलसी कीड़ा हरे-भरे जंगल के किनारे एक छोटा सा मैदान था, जहाँ छोटे-बड़े कई तरह के जीव रहते थे। सुबह होते ही इस मैदान की मिट्टी से हल्की भाप उठती थी, पेड़ों की पत्तियाँ ओस से चमकती थीं और हवा में मिट्टी की ताज़गी घुली रहती थी। इस सुंदर वातावरण में सबसे […]

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धीमी-कछुआ-और-घमंडी-खरगोश---The-Slow-Turtle-and-the-Proud-Hare

धीमा कछुआ और घमंडी खरगोश – The Slow Turtle and the Proud Hare

धीमा कछुआ और घमंडी खरगोश घने पेड़ों से ढकी एक सुंदर सी घाटी थी, जहाँ कई तरह के जानवर रहते थे. वहाँ पास ही एक हरा-भरा मैदान था, जहाँ हर सुबह सूरज की किरणें हल्की गर्मी के साथ उतरती थीं और ठंडी हवा पूरे माहौल को सुखद बना देती थी. इसी मैदान में एक धीमा […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 32 – रूपवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 बत्तीसवें दिन राजा भोज अपने निर्णय के साथ बत्तीसवीं गुड़िया के सामने पहुँचे। गुड़िया ने उन्हें देखकर कहा कि आज वे सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुक नहीं दिख रहे हैं। उसने अपना परिचय देते हुए कहा, “राजा भोज, मैं रूपवती हूँ, इन सभी गुड़ियाओं की अधिष्ठात्री। आज आपके मन में […]

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तेनालीराम : अद्भुत बुद्धि और विनोद का प्रतीक – 1 से 5

 तेनाली रामन का असाधारण जीवन और राजदरबार में प्रवेश – 1 तेनालीराम की कथा दक्षिण भारत के प्रख्यात विजयनगर साम्राज्य के उस स्वर्णकाल से जुड़ी है, जब यह राज्य अपनी समृद्धि, शक्ति, वैभव और सांस्कृतिक उन्नति के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। उस युग में राजा कृष्णदेवराय न केवल वीर और दूरदर्शी शासक थे, बल्कि […]

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सितारा-बुनने-वाली-परी-Star-Weaving-Fairy

सितारा बुनने वाली परी – Star-Weaving Fairy

सितारा बुनने वाली परी रात का आसमान जितना शांत दिखता था, उसके पीछे उतनी ही हलचल चलती थी। बादलों के ऊपर, जहाँ हवा भी फुसफुसाकर चलती थी, एक छोटी सी चांदी जैसी झोपड़ी थी। इस झोपड़ी में रहती थी एक परी जिसे सब सितारा बुनने वाली परी कहते थे। उसके हाथों में एक हल्की चमक […]

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गौरैया-और-बड़े-बड़े-दाने---Sparrow-and-the-Big-Grains

गौरैया और बड़े-बड़े दाने – Sparrow and the Big Grains

गौरैया और बड़े-बड़े दाने गाँव के एक शांत कोने में एक पुराना सा खेत था जहाँ सुबह की हल्की धूप मिट्टी पर चमकती थी और चारों ओर हल्की हवा बहती रहती थी। उसी खेत के किनारे एक पेड़ था जिसमें एक छोटी गौरैया रहती थी। वह नन्ही थी, चंचल थी और हर दिन सूरज निकलते […]

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दानवीर कर्ण का त्याग - Karna’s Benevolence

दानवीर कर्ण का त्याग – Karna’s Benevolence

दानवीर कर्ण का त्याग बारिश की झड़ी लगी हुई थी। मूसलाधार वर्षा ने सब कुछ भिगो दिया था। उसी बीच एक ब्राह्मण यज्ञ की सामग्री जुटाने के लिए निकला था। उसे यज्ञ के लिए सूखी लकड़ियों की आवश्यकता थी, किंतु वर्षा के कारण बाहर का समस्त काष्ठ भीगा हुआ था। निराश ब्राह्मण सबसे पहले हस्तिनापुर […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: अदल-बदल हुए सिरों की कथा भाग चार

एक समय की बात है, किसी नगर में धवल नाम का एक धोबी रहता था। वह प्रतिदिन की भाँति कपड़े साफ करने के लिए तालाब की ओर गया। उसी समय उसकी दृष्टि एक अत्यंत सुंदरी युवती पर पड़ी, जो उसी तालाब पर स्नान करने आई थी। वह युवती एक अन्य धोबी की पुत्री थी। उसकी […]

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