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धीमी-कछुआ-और-घमंडी-खरगोश---The-Slow-Turtle-and-the-Proud-Hare

धीमा कछुआ और घमंडी खरगोश – The Slow Turtle and the Proud Hare

धीमा कछुआ और घमंडी खरगोश घने पेड़ों से ढकी एक सुंदर सी घाटी थी, जहाँ कई तरह के जानवर रहते थे. वहाँ पास ही एक हरा-भरा मैदान था, जहाँ हर सुबह सूरज की किरणें हल्की गर्मी के साथ उतरती थीं और ठंडी हवा पूरे माहौल को सुखद बना देती थी. इसी मैदान में एक धीमा […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: स्वार्थ और कर्तव्य की लड़ाई भाग सोलह

विक्रम और बेताल: स्वार्थ और कर्तव्य की लड़ाई रात का समय था। श्मशान भूमि पर हल्की धुंध का घेरा फैला हुआ था। हवा की तीखी सीटी जैसी आवाजें कानों में कौंध रही थीं, और सूखे पेड़ों की टहनियाँ आपस में टकराकर डरावनी ध्वनि पैदा कर रही थीं। चारों ओर अजीब परछाइयाँ बन रही थीं, मानो […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 2 – चित्रलेखा की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 2  दिन के दूसरे पहर में राजा भोज एक बार फिर उस दिव्य सिंहासन पर बैठने चले। जैसे ही वे सिंहासन पर बैठने वाले थे, उसी क्षण दूसरी गुड़िया वहाँ से बाहर आ गई। गुड़िया बोली, “ठहरिए महाराज। मेरा नाम चित्रलेखा है। इस सिंहासन पर बैठने से पहले राजा विक्रमादित्य की यह […]

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दोस्ती का जादू: The Magic of Friendship

दोस्ती का जादू: The Magic of Friendship

सोने से पहले की कहानियाँ: The Magic of Friendship एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में तीन अच्छे दोस्त रहते थे—राजू, रीना, और मोहन। इन तीनों की दोस्ती बहुत गहरी थी। वे हमेशा एक-दूसरे के साथ खेलते, पढ़ाई करते और समय बिताते। गाँव के पास एक घना जंगल था, जहां लोग कम […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 6 – रविभामा की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 6 छठे दिन, राजा भोज ने सच में सिंहासन पर बैठने का प्रयास करने का निर्णय लिया। जैसे ही वे सिंहासन की ओर बढ़े, छठी गुड़िया जाग उठी और बोली, “मेरा नाम रविभामा है। मैंने राजा विक्रमादित्य की धैर्य और दयालुता देखी है। मैं आपको राजा विक्रमादित्य की एक कहानी सुनाऊंगी। उसके […]

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तेनालीराम : अद्भुत बुद्धि और विनोद का प्रतीक – 1 से 5

 तेनाली रामन का असाधारण जीवन और राजदरबार में प्रवेश – 1 तेनालीराम की कथा दक्षिण भारत के प्रख्यात विजयनगर साम्राज्य के उस स्वर्णकाल से जुड़ी है, जब यह राज्य अपनी समृद्धि, शक्ति, वैभव और सांस्कृतिक उन्नति के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। उस युग में राजा कृष्णदेवराय न केवल वीर और दूरदर्शी शासक थे, बल्कि […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 32 – रूपवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 बत्तीसवें दिन राजा भोज अपने निर्णय के साथ बत्तीसवीं गुड़िया के सामने पहुँचे। गुड़िया ने उन्हें देखकर कहा कि आज वे सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुक नहीं दिख रहे हैं। उसने अपना परिचय देते हुए कहा, “राजा भोज, मैं रूपवती हूँ, इन सभी गुड़ियाओं की अधिष्ठात्री। आज आपके मन में […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 3 – चंद्रकला की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 3 सिंहासन बत्तीसी की तीसरी गुड़िया चंद्रकला की यह कहानी न्याय, पराक्रम, साहस और भाग्य के अद्भुत संगम को दर्शाती है। एक दिन सुबह-सुबह राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़े ही थे कि तीसरी गुड़िया चंद्रकला अपने स्थान से निकलकर उनके सामने आ खड़ी हुई। उसने कहा कि वे […]

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The Girl Who Woke the Sleeping Forest

जंगल की नींद खोलने वाली लड़की – The Girl Who Woke the Sleeping Forest

जंगल की नींद खोलने वाली लड़की गाँव के पास फैला हुआ एक बड़ा, खूबसूरत जंगल था। सुबह की हवा वहाँ हमेशा ताज़ा लगती थी, पत्तियाँ हल्की आवाज़ में सरसराती थीं और छोटे-छोटे जानवर इधर-उधर दौड़ते रहते थे। इस जंगल को गाँव वाले “जीता जागता जंगल” कहते थे, क्योंकि यहाँ की हर चीज़ में जैसे ज़िंदगी […]

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तेनाली रमन की चतुराई के किस्से – 26 से 30

इनाम की साझेदारी – 26 कुचिपुड़ी मंडली विजयनगर से लौट आई। रमन ने ही मंडली को समेटा था। राजा ने रमन को बुलाकर पूछताछ की। रमन अडिग रहा। ‘मैंने झूठ बोलने वालों को पीटा है।’ ‘वह कृष्ण की कहानियाँ सुना रहा था, है ना?’ राजा ने पूछा। ‘यदि ऐसा है तो मैंने पाप किया है। […]

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