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अरण्यकाण्ड की पावन कथा – 5

अरण्यकाण्ड की पावन कथा और दण्डक वन में श्रीराम का आगमन भरत वन में आए, राम से मिले, उनसे बातें कीं, उन्हें अयोध्या लौट चलने का अनुरोध किया, अपने प्रयास में सफल न हो सके तथा राम की पादुकाएँ लेकर अयोध्या लौट गए। तीनों माताएँ वहाँ आईं, वन में राम के जीवन को देखा, आँसू […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 11 – त्रिलोचनी की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 11 ग्यारहवें दिन, राजा भोज धीरे-धीरे राज्याभिषेक की ओर बढ़े। तभी ग्यारहवीं गुड़िया त्रिलोचनी प्रकट हुई और उन्होंने राजा के सामने राजा विक्रमादित्य की एक अन्य कथा कहनी शुरू की। “राजा भोज, मेरा नाम त्रिलोचनी है। मैंने इस सिंहासन के महान शासक राजा विक्रमादित्य की लंबे समय तक सेवा की है। मैंने […]

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गधे का काम और कुत्ते की चुप्पी - Do Your Duty & Be Quiet

गधे का काम और कुत्ते की चुप्पी – Do Your Duty and Be Quiet

गधे का काम और कुत्ते की चुप्पी एक समय की बात है, एक धोबी रहता था। वह एक छोटे से कस्बे के लोगों के गंदे कपड़े धोया करता था। उसके पास एक गधा और एक कुत्ता था। गधे का काम था कस्बे के सभी लोगों का गंदे कपड़ों का बोझ शहर के बाहर बहती नदी […]

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मेहनती-चींटी-और-आलसी-टिड्डा---The-Hardworking-Ant-and-the-Lazy-Grasshopper

मेहनती चींटी और आलसी टिड्डा – The Hardworking Ant and the Lazy Grasshopper

मेहनती चींटी और आलसी टिड्डा हरे-भरे खेतों और पेड़ों से घिरे एक शांत मैदान में दो छोटे जीव रहते थे। एक थी छोटी पर मेहनती चींटी लीला, जो पूरे साल सर्दियों की तैयारी में लगी रहती थी। दूसरा था आलसी टिड्डा गिन्नू, जिसे बस गाना, कूदना और धूप में मस्ती करना पसंद था। दोनों एक […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 4 – कम कांडला की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 4 अगले दिन सुबह राजा भोज फिर से उसी दिव्य सिंहासन पर बैठने पहुँचे। जैसे ही उन्होंने आसन पर बैठने का प्रयास किया, सिंहासन से चौथी गुड़िया निकलकर उनके सामने खड़ी हो गई। उसने कहा मेरा नाम कम कांडला है। पहले मेरी कहानी सुनो और उसके बाद तय करो कि क्या तुम […]

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वचन के धनी कर्ण - Karna – A Man of his Word

वचन के धनी कर्ण – Karna A Man of his Word

वचन के धनी कर्ण महाभारत का युद्ध प्रारंभ होने से पहले, पांडवों की माता कुंती देवी कर्ण से मिलने गईं। कर्ण कुंती देवी का ज्येष्ठ पुत्र था, परंतु विवशतावश उन्होंने उसे त्याग दिया था। अब कर्ण एक पराक्रमी योद्धा बन चुका था और पांडवों के विरुद्ध युद्ध में था। वह कौरव सेना के अग्रणी दुर्योधन […]

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घमंडी गुलाब और नागफनी की दोस्ती

एक बगीचे में एक सुंदर गुलाब का पौधा था। उस पर खिला एक गुलाब अपने रूप और रंग पर बहुत अधिक गर्व करता था। पर उसे हमेशा यह दुख रहता था कि वह एक बदसूरत नागफनी के ठीक बगल में उगा है। हर रोज गुलाब नागफनी के काँटों और उसकी सूरत पर ताने मारता रहता। […]

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Saktuprasta-and-Squirrel-Heaven-Story---सक्तुप्रस्त-और-स्वर्ण-धूसर-गिलहरी-की-कथा

सक्तुप्रस्त और स्वर्ण-धूसर गिलहरी – Saktuprasta and Squirrel of Heaven

सक्तुप्रस्त और स्वर्ण-धूसर गिलहरी एक समय की बात है, एक गिलहरी थी जिसके शरीर का दाहिना भाग स्वर्णिम था और बायाँ भाग धूसर वर्ण का था। जहाँ कहीं भी कोई यज्ञ होता, वह गिलहरी वहाँ जाकर भूमि और जल में लोटने लगती। एक दिन पाण्डवों में ज्येष्ठ, युधिष्ठिर अर्थात धर्मराज, एक महान यज्ञ का अनुष्ठान […]

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लोमड़ी-और-मूर्ख-भेड़िया---Fox-and-the-Foolish-Wolf

लोमड़ी और मूर्ख भेड़िया – Fox and the Foolish Wolf

लोमड़ी और मूर्ख भेड़िया घने जंगल के बीच एक शांत सा इलाका था जहाँ पेड़ों की कतारें दूर तक फैली थीं और चारों ओर पत्तों की सरसराहट गूँजती रहती थी। उसी इलाके में एक चालाक लोमड़ी रहती थी जो अपनी तेजी और समझदारी के लिए पूरे जंगल में जानी जाती थी। जंगल के जानवर उसकी […]

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श्रेष्ठ-कौन---The-Greater-God

श्रेष्ठ कौन?- The Greater God

श्रेष्ठ कौन? एक समय की बात है, ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच इस बात पर विवाद छिड़ गया कि उन दोनों में श्रेष्ठ कौन है। इस बहस ने इतना तीव्र रूप धारण किया कि वहाँ अचानक एक विशाल और अंतहीन शिवलिंग प्रकट हो गया। दोनों ने निश्चय किया कि जो भी इस शिवलिंग का […]

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