सक्तुप्रस्त और स्वर्ण-धूसर गिलहरी – Saktuprasta and Squirrel of Heaven
सक्तुप्रस्त और स्वर्ण-धूसर गिलहरी एक समय की बात है, एक गिलहरी थी जिसके शरीर का दाहिना भाग स्वर्णिम था और बायाँ भाग धूसर वर्ण का था। जहाँ कहीं भी कोई यज्ञ होता, वह गिलहरी वहाँ जाकर भूमि और जल में लोटने लगती। एक दिन पाण्डवों में ज्येष्ठ, युधिष्ठिर अर्थात धर्मराज, एक महान यज्ञ का अनुष्ठान […]
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