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सिंहासन बत्तीसी कथा 29 – मानवती की कथा

इस कथा के अनुसार, उनत्तीसवें दिन जब राजा भोज शक्तिशाली और गौरवशाली सिंहासन पर बैठने का प्रयास कर रहे थे, तभी उनत्तीसवीं गुड़िया मानवती ने उन्हें रोकते हुए कहा कि वे तभी इस अद्भुत सिंहासन पर बैठने योग्य होंगे, जब उनमें राजा विक्रमादित्य जैसे महान गुणों का समावेश हो। उन्होंने अपने परिचय के बाद राजा […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 13 – कीर्तिमती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 13 तेरहवीं गुड़िया कीर्तिमती की कथा में वर्णित प्रसंग उस समय प्रारम्भ होता है जब तेरहवें दिन राजा भोज सिंहासन पर बैठने का प्रयास करते हैं तो एक नई गुड़िया उनके सामने प्रकट होती है और कहती है कि उसका नाम कीर्तिमती है और वह पहले उन्हें राजा विक्रमादित्य की उदारता की […]

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खतरे की सही पहचान - Signs of Danger

खतरे की सही पहचान – Signs of Danger

खतरे की सही पहचान एक समय की बात है। एक विशाल वृक्ष की शाखा पर बने घोंसले में चार छोटी-छोटी चिड़ियाँ अपनी माँ के साथ रहती थीं। चूजे अभी नन्हे थे और स्वयं उड़ नहीं सकते थे। माँ चिड़िया हर शाम उनके लिए दाने लाती और उन्हें खिलाती। पूरा दिन चूजे बस यही आस लगाए, […]

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शेर और चतुर खरगोश: The Clever Rabbit and the Lion

The Clever Rabbit and the Lion

शेर और चतुर खरगोश: The Clever Rabbit and the Lion जंगल के हरे-भरे मैदानों में कई जानवर रहते थे। वहां बड़े-बड़े पेड़, रंग-बिरंगे फूल और चहचहाते पक्षी जंगल को जीवंत बनाते थे। लेकिन इसी जंगल में एक शेर था, जो बहुत ही क्रूर और भूखा था। वह रोज किसी न किसी जानवर का शिकार करता […]

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महर्षि वाल्मीकि का जीवन और रामकथा की दिव्य उत्पत्ति – 2

महर्षि वाल्मीकि का जीवन अत्यंत अद्भुत और प्रेरणादायक है। एक समय वह एक साधारण शिकारी थे जो अपने जीवन में असंख्य पाप और अपराध करते थे। जानवरों का शिकार करना उनका रोज़ का काम था। उसी दौरान एक दिन उन्हें मार्ग में कुछ तपस्वी ऋषि मिले। शिकारी ने सोचा कि वह उन्हें लूटकर अपने परिवार […]

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पितृ-वचन-का-पालन---Lord-Rama’s-Word (1)

पितृ-वचन का पालन – Lord Rama’s Word

 पितृ-वचन का पालन प्रभु राम एक सुंदर युवक के रूप में बड़े हुए और अल्पायु में ही ऋषि विश्वामित्र के साथ राक्षसों खर और दूषण का वध करने चले गए, जो ऋषि की तपस्या में विघ्न डाल रहे थे। कुछ समय बाद, ऋषि राम को राजा जनक के दरबार में ले गए, जहाँ भगवान शिव […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 19 – रूपरेखा की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 19 उन्नीसवें दिन राजा भोज जब सिंहासन पर बैठने जा रहे थे, तभी उन्नीसवीं गुड़िया रूपरेखा ने उन्हें रोक दिया। उसने कहा कि वह एक कहानी सुनाएगी, जो यह बताएगी कि न्याय करने में मन और ज्ञान दोनों का संतुलन कितना महत्वपूर्ण होता है। उसने राजा से कहा कि पहले पूरी कहानी […]

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परियों-की-रसोई-Fairy-Kitchen

परियों की रसोई – Fairy Kitchen

परियों की रसोई जंगल के उस कोने में एक पुरानी लकड़ी की झोपड़ी थी जिसे हर कोई सिर्फ एक साधारण घर समझता था, लेकिन असल में वह झोपड़ी एक जादुई रसोई थी जिसे परियाँ चलाती थीं और इस रसोई का एक नियम था कि यहाँ से खाना सिर्फ उन्हें मिलता था जो किसी की मदद […]

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बोलने वाली झील की परी – The Fairy of the Whispering Lake

बोलने वाली झील की परी हरे-भरे जंगलों के बीच एक शांत और चौड़ी झील थी जिसे लोग फुसफुसाती झील कहते थे क्योंकि वहाँ की हवा और पानी किसी से भी बातें कर लेते थे। पानी इतना साफ था कि उसमें आसमान, पेड़ और इंसान की भावनाएँ तक दिख जाती थीं। रात में झील हल्की नीली […]

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अयोध्याकाण्ड की पावन कथा – 4

अयोध्याकाण्ड की पावन कथा और श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी श्रीराम के अनेक सद्गुण थे। वे सुन्दर स्वरूप एवं मनोहर व्यवहार वाले थे। उनकी वाणी कोमल तथा स्नेहपूर्ण थी। यदि कोई उन्हें डाँटता तो वे कभी भी उसी प्रकार उत्तर नहीं देते थे। उन्हें प्राप्त सहायता चाहे छोटी हो या बड़ी, सदैव स्मरण रहती थी। […]

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