हिंदी कहानियाँ

लेटेस्ट कहानियाँ

और पढ़ें

रात-का-संगीत-Night’s-Melody

रात का संगीत – Night’s Melody

रात का संगीत एक शांत पहाड़ी बस्ती थी जहाँ दिन ढलते ही अजीब सा सन्नाटा फैल जाता था। लोग जल्दी-जल्दी अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि रात के साथ एक अनजाना डर भी घूमता है। हवा चलती तो खिड़कियाँ हिलने लगतीं, पत्तों की सरसराहट किसी फुसफुसाहट जैसी लगती […]

Continue Reading
चुप्पी-की-रानी-_-The-Queen-of-Silence

खामोशी की रानी और शोर करने वाले दानव की अनोखी कहानी | The Queen of Silence and the Noisy Giant’s Unusual Tale

खामोशी की रानी और शोर करने वाले दानव की अनोखी कहानी बहुत पहले की बात है, एक ऐसा पहाड़ी राज्य था जहाँ रात होते ही एक अद्भुत जादू होता था। यह जादू था शांति का! जैसे ही सूरज डूबता, पूरा राज्य मुलायम चाँदनी की चादर में सो जाता। इस राज्य की रानी का नाम था […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-32-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 – रूपवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 बत्तीसवें दिन राजा भोज अपने निर्णय के साथ बत्तीसवीं गुड़िया के सामने पहुँचे। गुड़िया ने उन्हें देखकर कहा कि आज वे सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुक नहीं दिख रहे हैं। उसने अपना परिचय देते हुए कहा, “राजा भोज, मैं रूपवती हूँ, इन सभी गुड़ियाओं की अधिष्ठात्री। आज आपके मन में […]

Continue Reading
परियों-की-रसोई-Fairy-Kitchen

परियों की रसोई – Fairy Kitchen

परियों की रसोई जंगल के उस कोने में एक पुरानी लकड़ी की झोपड़ी थी जिसे हर कोई सिर्फ एक साधारण घर समझता था, लेकिन असल में वह झोपड़ी एक जादुई रसोई थी जिसे परियाँ चलाती थीं और इस रसोई का एक नियम था कि यहाँ से खाना सिर्फ उन्हें मिलता था जो किसी की मदद […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-2-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 2 – चित्रलेखा की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 2  दिन के दूसरे पहर में राजा भोज एक बार फिर उस दिव्य सिंहासन पर बैठने चले। जैसे ही वे सिंहासन पर बैठने वाले थे, उसी क्षण दूसरी गुड़िया वहाँ से बाहर आ गई। गुड़िया बोली, “ठहरिए महाराज। मेरा नाम चित्रलेखा है। इस सिंहासन पर बैठने से पहले राजा विक्रमादित्य की यह […]

Continue Reading
valmiki-ramayana-celestial-origin-story

 वाल्मीकि रामायण के अनंत आयाम – 1

वाल्मीकि रामायण भारतीय साहित्य का प्रथम महान महाकाव्य है। यह वह दिव्य कृति है जिसने मानव समाज को आदर्श जीवन का मार्ग दिखाया और मर्यादा पुरुषोत्तम राम तथा पवित्र नारीत्व की प्रतीक सीता के चरित्र को अमर बनाया। इस महाकाव्य में वर्णित राम और सीता का पवित्र संबंध सूर्य और चन्द्रमा के समान अविभाज्य माना […]

Continue Reading
भेड़िया-और-मेमने-का-बहाना---Wolf-and-the-Lamb’s-Excuse

भेड़िया और मेमने का बहाना – Wolf and the Lamb’s Excuse

भेड़िया और मेमने का बहाना एक शांत पहाड़ी इलाके में एक साफ बहती छोटी नदी थी जिसके किनारे हर सुबह नरम धूप चमकती थी और घास पर ओस मोती जैसी टिमटिमाती थी। उसी नदी के पास एक चरवाहे का टोल चलता था लेकिन कभी-कभी कुछ मेमने अकेले चरने चले जाते थे क्योंकि वहाँ का वातावरण […]

Continue Reading
The Softly Speaking Waves of the River

नदी की धीमी बोलती लहरें – The Softly Speaking Waves of the River

नदी की धीमी बोलती लहरें शांतपुर नाम के छोटे, सुंदर और हरे-भरे कस्बे में एक दस साल का लड़का रहता था, जिसका नाम था पार्थ। पार्थ को हमेशा से प्रकृति के करीब रहना अच्छा लगता था। दूसरे बच्चे मोबाइल में गेम खेलते या टीवी देखते रहते, लेकिन पार्थ का मन नदी, पेड़, मिट्टी और हवा […]

Continue Reading
लगन और सूक्ष्म अवलोकन का फल - Persistence and Attention to Detail

लगन और सूक्ष्म अवलोकन का फल – Persistence and Attention to Detail

लगन और सूक्ष्म अवलोकन का फल कर्नाटक के एक प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में केशव नाम का एक छात्र यांत्रिक इंजीनियरिंग पढ़ रहा था। केशव एक मेधावी छात्र था। वह आठ सेमेस्टर के इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के छठे सेमेस्टर में पढ़ रहा था। पिछले पांचों सेमेस्टर में केशव ने डिस्टिंक्शन के साथ उत्तीर्णता प्राप्त की थी। […]

Continue Reading
विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: अंतिम रहस्य का खुलासा भाग पच्चीस

विक्रम और बेताल: अंतिम रहस्य का खुलासा विक्रम और बेताल की अंतिम यात्रा अपने पच्चीसवें प्रयास पर पहुँच चुकी थी। इस बार जंगल की हवा भारी थी, जैसे कोई अनदेखा रहस्य चारों ओर पसरा हो। विक्रम शव को कंधे पर लिए आगे बढ़ रहे थे, और बेताल असामान्य रूप से शांत था। कुछ दूरी चलने […]

Continue Reading