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रात-का-नीला-घोड़ा---The-Blue-Horse-of-Night

रात का नीला घोड़ा – The Blue Horse of Night

रात का नीला घोड़ा रात का समय था और पूरा जंगल हल्की नीली रोशनी से भरा हुआ था क्योंकि परी नीलिमा अपनी रात की तैयारी कर रही थी। नीलिमा एक छोटी लेकिन बहादुर, दयालु और बेहद प्यारी परी थी, जो हर रात आसमान में उड़कर तारों की देखभाल करती थी। उसका सबसे खास साथी था […]

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ayodhyakand-ki-pavan-katha-4

अयोध्याकाण्ड की पावन कथा – 4

अयोध्याकाण्ड की पावन कथा और श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी श्रीराम के अनेक सद्गुण थे। वे सुन्दर स्वरूप एवं मनोहर व्यवहार वाले थे। उनकी वाणी कोमल तथा स्नेहपूर्ण थी। यदि कोई उन्हें डाँटता तो वे कभी भी उसी प्रकार उत्तर नहीं देते थे। उन्हें प्राप्त सहायता चाहे छोटी हो या बड़ी, सदैव स्मरण रहती थी। […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: असली योद्धा कौन? भाग पंद्रह

विक्रम और बेताल: असली योद्धा कौन? अंधेरी रात, घने पेड़ों की कतारें और हवा में फैलती मिट्टी की गंध। राजा विक्रमादित्य अपनी तलवार कमर पर बांधे हुए उसी दृढ़ कदमों से आगे बढ़ रहे थे जिन पर पूरा राज्य गर्व करता था। बेताल उनके कंधे पर उल्टा लटका था, पर उसकी आँखों में वही पुरानी […]

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चींटी-और-कबूतर-की-मित्रता

चींटी और कबूतर की मित्रता

एक बार की बात है, एक प्यासी चींटी नदी से पानी पी रही थी। अचानक वह संतुलन खो बैठी और नदी के पानी में गिर गई। चींटी जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “बचाओ! बचाओ!” परंतु उसकी पुकार कोई नहीं सुन पाया। पास ही एक पेड़ पर बैठी एक कबूतर ने चींटी को संकट में देखा। उसने […]

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विक्रम और बेताल: झूठी शान का अंत भाग सत्रह

विक्रम और बेताल: झूठी शान का अंत रात का अंधेरा गहरा था। श्मशान भूमि पर हल्की धुंध का घेरा फैला हुआ था, और पेड़ों की सूखी शाखाएँ हवा में टकराकर डरावनी ध्वनि पैदा कर रही थीं। चारों ओर गूंजती फुसफुसाहटें और हवा में उड़ते पत्तों की सरसराहट वातावरण को और भी भयानक बना रही थी। […]

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विक्रम और बेताल: मेहनत और भाग्य की परीक्षा भाग इक्कीस

विक्रम और बेताल: मेहनत और भाग्य की परीक्षा रात गहरी होती जा रही थी। श्मशान की चिता से उठती मंद लपटें आसमान में अजीब-सी रौशनी फैला रही थीं। पूरा वातावरण भय, मरघट और रहस्य से भरा हुआ था। लेकिन राजा विक्रम एक बार फिर बेताल को पकड़ने के लिए निर्भीकता से आगे बढ़ रहे थे। […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 11 – त्रिलोचनी की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 11 ग्यारहवें दिन, राजा भोज धीरे-धीरे राज्याभिषेक की ओर बढ़े। तभी ग्यारहवीं गुड़िया त्रिलोचनी प्रकट हुई और उन्होंने राजा के सामने राजा विक्रमादित्य की एक अन्य कथा कहनी शुरू की। “राजा भोज, मेरा नाम त्रिलोचनी है। मैंने इस सिंहासन के महान शासक राजा विक्रमादित्य की लंबे समय तक सेवा की है। मैंने […]

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सुनहरी-हवा-की-रानी-Golden-Queen-of-the-Wind

सुनहरी हवा की रानी – Golden Queen of the Wind

सुनहरी हवा की रानी  एक शांत सा गाँव था जहाँ हर सुबह सूरज की रोशनी और हल्की हवा बच्चों को खेलने का बुलावा देती थी। गाँव वाले इस हवा को अपना दोस्त मानते थे क्योंकि यह खेतों में खड़ी फसलों को झुलाती थी, पेड़ों को नाचने पर मजबूर करती थी और गर्मी में ठंडी राहत […]

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मख़मली खरगोश का जादुई सफर

एक नरम और फूला हुआ मख़मली खरगोश एक लड़के के खिलौने के डिब्बे में रहता था। हर दिन लड़का उसे उठाता और खेलता। खरगोश बहुत खुश रहता। लेकिन फिर खिलौने के डिब्बे में नए और चमकदार खिलौने आने लगे। वे खास थे – कुछ बटन दबाने पर चलते, कुछ बहुत ऊँचाई तक कूदते। मख़मली खरगोश […]

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अग्निदेव का वरदान | The Blessing of Agni Dev

अग्निदेव का वरदान | The Blessing of Agni Dev

अग्निदेव का वरदान  बहुत समय पहले की बात है। उत्तरी पर्वतों से घिरे एक शांत और समृद्ध राज्य का नाम था अग्निकाश। यह राज्य कृषि, संस्कृति और देवपूजा के लिए प्रसिद्ध था। लोग प्रकृति की पूजा करते और विशेष रूप से अग्निदेव का आभार मानते, क्योंकि उनका विश्वास था कि अग्निदेव ही राज्य में उष्मा, […]

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