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Saint-Tyagaraja---संत-त्यागराज

संत त्यागराज – Saint Tyagaraja

संत त्यागराज की कथा संत त्यागराज का जन्म 4 मई 1767 को तमिलनाडु के तंजावुर के समीप तिरुवैय्यारु में एक सरल और धर्मनिष्ठ तेलुगु स्मार्त ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनका कुल प्राचीन समय में आंध्र प्रदेश से तमिलनाडु आकर बस गया था। उनके पिता राम ब्रह्मम और माता सीतम्मा अत्यन्त श्रद्धालु थे, और घर में […]

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मुर्गा-और-सूरज-का-भ्रम-_-The-Rooster-and-the-Illusion-of-the-Sun

मुर्गा और सूरज का भ्रम | The Rooster and the Illusion of the Sun

मुर्गा और सूरज का भ्रम शांत गाँव के किनारे फैली हरी जमीन पर एक लंबा सा बाड़ा बना था जहाँ कई तरह के पक्षी रहते थे और उनमें से सबसे शोर मचाने वाला था एक लाल कलगी वाला मुर्गा जिसका नाम सब प्यार से मुन्ना मुर्गा बुलाते थे क्योंकि उसकी बाँग इतनी तेज होती थी […]

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जंगल-का-नींद-वाला-पेड़-The-Sleepy-Tree-of-the-Forest

जंगल का नींद वाला पेड़ – The Sleepy Tree of the Forest

जंगल का नींद वाला पेड़ घने और शांत जंगल के बीचोंबीच एक छोटा सा खरगोश रहता था जिसका नाम टुनटुन था। टुनटुन बाकी खरगोशों से थोड़ा अलग था। उसके कान लंबे थे, पर उससे भी लंबी उसकी जिज्ञासा थी। वह हर दिन कुछ नया ढूंढने निकल पड़ता था। एक सुबह वह पेड़ों के पीछे छुपकर […]

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kishkindha-kanda-ki-pavan-katha-6

किष्किन्धा काण्ड की पावन कथा – 6

किष्किन्धा काण्ड की पावन कथा और राम-सुग्रीव भेंट व हनुमान की कूटनीति ऋष्यमूक पर्वत के शिखर पर सुग्रीव अपने चार मित्रों के साथ बैठा था। उसकी दृष्टि पर्वत के चारों दिशाओं को सतर्कता से छान रही थी। वह अपने बड़े भाई बाली और उसके अनुचरों से अत्यंत भयभीत था। तभी उसने दो तरुण पुरुषों को […]

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गाय-और-दो-साँप-–-The-Cow-and-the-Two-Snakes

गाय और दो साँप – The Cow and the Two Snakes

गाय और दो साँप  हरे भरे खेतों से घिरे एक शांत गाँव के बाहर एक पुराना बरगद का पेड़ था, जिसकी छाया में एक दयालु गाय रहती थी। उसका स्वभाव शांत था और वह किसी को भी दुख नहीं देती थी। हर सुबह जब सूरज की हल्की किरणें फैलतीं, गाय अपने छोटे से घास के […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 16 – सत्यवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 16  सोलहवें दिन फिर से राजा भोज सिंहासन पर बैठने चले, तभी सिंहासन की सोलहवीं गुड़िया प्रकट हुई और उसने उन्हें रोका। गुड़िया ने कहा कि वह उन्हें राजा विक्रमादित्य की एक कहानी सुनाएगी, जो उनकी अनुपम उदारता को दर्शाती है। यदि राजा भोज उस उदारता की बराबरी कर सकें, तभी वे […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 13 – कीर्तिमती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 13 तेरहवीं गुड़िया कीर्तिमती की कथा में वर्णित प्रसंग उस समय प्रारम्भ होता है जब तेरहवें दिन राजा भोज सिंहासन पर बैठने का प्रयास करते हैं तो एक नई गुड़िया उनके सामने प्रकट होती है और कहती है कि उसका नाम कीर्तिमती है और वह पहले उन्हें राजा विक्रमादित्य की उदारता की […]

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आत्मीय संबंधों का अदृश्य सूत्र - Supra natural connections

आत्मीय संबंधों का अदृश्य सूत्र – Supra natural connections

आत्मीय संबंधों का अदृश्य सूत्र सन 1970 की बात है। मद्रास (अब चेन्नई) के तिरुपल्लीकनी इलाके में डॉक्टर रामास्वामी नाम के एक चिकित्सक रहते थे। लगभग 45 वर्ष की आयु के डॉक्टर रामास्वामी अपने निवास के पहले कमरे में ही निजी प्रैक्टिस करते थे और पूरे इलाके में एक कुशल चिकित्सक के रूप में प्रसिद्ध […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: तीन विशिष्ट ब्राह्मण पुत्रों की अद्भुत कथा भाग दो

विक्रम और बेताल: तीन विशिष्ट ब्राह्मण पुत्रों की अद्भुत कथा बहुत समय पहले एक समृद्ध और प्रतिष्ठित ब्राह्मण रहता था जिसका नाम विष्णुस्वामिन था। वह विद्वान, धार्मिक और बड़े-बड़े यज्ञों का कर्ता था। उसके घर में हर समय सीखने और पूजा का वातावरण रहता था। एक दिन उसने निर्णय लिया कि वह एक विशाल और […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 32 – रूपवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 बत्तीसवें दिन राजा भोज अपने निर्णय के साथ बत्तीसवीं गुड़िया के सामने पहुँचे। गुड़िया ने उन्हें देखकर कहा कि आज वे सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुक नहीं दिख रहे हैं। उसने अपना परिचय देते हुए कहा, “राजा भोज, मैं रूपवती हूँ, इन सभी गुड़ियाओं की अधिष्ठात्री। आज आपके मन में […]

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