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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: स्वार्थ और कर्तव्य की लड़ाई भाग सोलह

विक्रम और बेताल: स्वार्थ और कर्तव्य की लड़ाई रात का समय था। श्मशान भूमि पर हल्की धुंध का घेरा फैला हुआ था। हवा की तीखी सीटी जैसी आवाजें कानों में कौंध रही थीं, और सूखे पेड़ों की टहनियाँ आपस में टकराकर डरावनी ध्वनि पैदा कर रही थीं। चारों ओर अजीब परछाइयाँ बन रही थीं, मानो […]

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एकता में ही बल है - Together we stand, Divided we fall

एकता में ही बल है – Together we stand, Divided we fall

एकता में ही बल है एक समय की बात है, एक बूढ़े पिता थे और उनके चार पुत्र थे। चारों पुत्र अब युवावस्था में आ चुके थे। हर कोई बीस के दशक में था और दुनिया को जीतने के लिए तैयार था। वे सभी शिक्षित थे, पर समस्या यह थी कि वे आपस में एक […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 32 – रूपवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 बत्तीसवें दिन राजा भोज अपने निर्णय के साथ बत्तीसवीं गुड़िया के सामने पहुँचे। गुड़िया ने उन्हें देखकर कहा कि आज वे सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुक नहीं दिख रहे हैं। उसने अपना परिचय देते हुए कहा, “राजा भोज, मैं रूपवती हूँ, इन सभी गुड़ियाओं की अधिष्ठात्री। आज आपके मन में […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 10 – प्रभावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 10 दसवें दिन जब राजा भोज एक बार फिर सिंहासन के निकट पहुँचे तो दसवीं गुड़िया प्रभावती प्रकट हुई। वह प्रकाश से दमकती हुई बाहर आई और राजा भोज से बोली कि वह उन्हें एक ऐसी कथा सुनाएगी जिसमें राजा विक्रमादित्य का असाधारण पराक्रम और त्याग छिपा है। उसने स्पष्ट कहा कि […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: अंतिम रहस्य का खुलासा भाग पच्चीस

विक्रम और बेताल: अंतिम रहस्य का खुलासा विक्रम और बेताल की अंतिम यात्रा अपने पच्चीसवें प्रयास पर पहुँच चुकी थी। इस बार जंगल की हवा भारी थी, जैसे कोई अनदेखा रहस्य चारों ओर पसरा हो। विक्रम शव को कंधे पर लिए आगे बढ़ रहे थे, और बेताल असामान्य रूप से शांत था। कुछ दूरी चलने […]

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The Softly Speaking Waves of the River

नदी की धीमी बोलती लहरें – The Softly Speaking Waves of the River

नदी की धीमी बोलती लहरें शांतपुर नाम के छोटे, सुंदर और हरे-भरे कस्बे में एक दस साल का लड़का रहता था, जिसका नाम था पार्थ। पार्थ को हमेशा से प्रकृति के करीब रहना अच्छा लगता था। दूसरे बच्चे मोबाइल में गेम खेलते या टीवी देखते रहते, लेकिन पार्थ का मन नदी, पेड़, मिट्टी और हवा […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 8 – पुष्पवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 8 सिंहासन बत्तीसी की आठवीं गुड़िया पुष्पवती की कहानी एक अद्भुत प्रसंग है जिसमें पराक्रम, करुणा, धर्म और त्याग का संदेश छिपा हुआ है। आठवें दिन जब राजा भोज सिंहासन के निकट पहुँचे तो आठवीं गुड़िया पुष्पवती प्रकट हुई। उसने राजा भोज से कहा कि उसका नाम पुष्पवती है और वह उन्हें […]

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अबिरामी की असीम कृपा - True Devotion to Abirami

अबिरामी की असीम कृपा – True Devotion to Abirami

अबिरामी की असीम कृपा तमिलनाडु में एक बार अबिरामी देवी के एक महान भक्त रहते थे। उनका नाम सुब्रह्मण्यम था। वे देवी के प्रति इतने अनन्य भक्त थे कि हर किसी को उनके बारे में बताते और उनकी महिमा का प्रचार करते। वे अबिरामी मंदिर के पास लोगों के समूह जमा करते, देवी की कथाएँ […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 26 – विश्वासवती की कथा

छब्बीसवें दिन जब राजा भोज पुनः सिंहासन पर बैठने आए, तो छब्बीसवीं गुड़िया मृगनयनी उनके सामने प्रकट हुई। उसने कहा कि राजा विक्रमादित्य केवल एक महान शासक ही नहीं थे, बल्कि अद्वितीय तपस्वी और दयालु व्यक्ति भी थे। उसने राजा भोज से आग्रह किया कि वह उसकी कथा सुनें और स्वयं तय करें कि क्या […]

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जंगल-का-सच्चा-रखवाला---The-True-Guardian-of-the-Forest

जंगल का सच्चा रखवाला – The True Guardian of the Forest

जंगल का सच्चा रखवाला जंगलपुर नाम की एक हरी–भरी भूमि थी जहाँ तरह–तरह के जानवर रहते थे। वहाँ एक बड़ा सा तालाब था, ऊँचे पेड़ों से भरी घाटियाँ थीं और चारों तरफ सुख, शांति और हँसी दिखाई देती थी। इस जंगल की एक खास बात थी कि यहाँ के सभी जानवर आपस में गहरी मित्रता, […]

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