आलसी गधे की चालाकी - Dealing with the Lazy Donkey

आलसी गधे की चालाकी – Dealing with the Lazy Donkey

नैतिक कहानियाँ

आलसी गधे की चालाकी

एक बार की बात है, एक नमक व्यापारी था। नमक बेचने के लिए उसे कपड़े के बोरे भरने पड़ते, गधे पर लादने पड़ते, फिर गधे के साथ एक नदी पार करके दूसरे किनारे के बाजार में जाकर नमक बेचना पड़ता।

एक दिन व्यापारी बाजार पहुँचने में देर से निकला। जल्दबाजी में उसने गधे को नदी में तेज चलने के लिए डाँटा-धकेला। तेजी से चलते हुए गधा फिसल गया और पीठ पर नमक का भारी बोझ होने के कारण कुछ सेकंड के लिए नदी के पानी में बैठ गया। इतने में ही काफी नमक पानी में घुल गया और गधे की पीठ का बोझ हल्का हो गया। बोझ कम होने पर गधा आसानी से उठा और तेजी से बाजार पहुँच गया। परन्तु व्यापारी को उस दिन नुकसान हुआ, क्योंकि बेचने के लिए नमक कम रह गया।

अब गधा चालाक हो गया था। उसे समझ आ गया कि अगर वह रोज नदी पार करते समय कुछ देर पानी में बैठ जाएगा, तो नमक घुल जाएगा और उसकी पीठ का बोझ हल्का हो जाएगा। पहली घटना के बाद एक पूरे सप्ताह तक गधा रोज जानबूझकर नदी में बैठ गया और नमक घुलने दिया, ताकि बोझ हल्का हो और वह आराम से चल सके। यह गधे के लिए तो अच्छा था, पर व्यापारी के लिए बुरा। पूरे सप्ताह उसे नमक कम बिकने के कारण रोज नुकसान उठाना पड़ा।

व्यापारी को समझ आ गया कि गधे के पानी में बैठने से नमक घुल रहा है और उसका नुकसान हो रहा है। परन्तु उसे इसकी कोई सूझ नहीं आ रही थी। सौभाग्य से व्यापारी का एक मित्र था, जो धोबी था। धोबी ने व्यापारी को सलाह दी कि वह अगले तीन दिन तक नमक के ढेर जैसे ही कपड़ों के छोटे-छोटे बंडल बनाए और गधे पर लादे, पर नमक न बेचे।

सलाह मानते हुए व्यापारी ने गधे पर नमक की बोरियों में कपड़े भरकर लाद दिए। पहले दिन गधा अपनी आदत के अनुसार नदी में बैठ गया। बोरियों के कपड़े पानी से भीग गए और भारी हो गए। गधे ने अतिरिक्त भार महसूस किया और नदी पार करने के लिए उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ी। दूसरे दिन भी यही हुआ। तीसरे दिन से गधे ने पानी में बैठना बंद कर दिया, क्योंकि उसे डर था कि बैठने से बोझ और भारी हो जाएगा। चौथे दिन से व्यापारी ने फिर से नमक लादना शुरू किया। इसके बाद गधे ने कभी नदी में बैठने की हिम्मत नहीं की और व्यापारी का फिर कभी नुकसान नहीं हुआ।

कहानी की सीख यह है कि आलसी और चालाक लोगों द्वारा पैदा की गई समस्याओं से निपटने के लिए बुद्धिमान और सोद्देश्य तरीके होते हैं। हर समस्या का समाधान हिंसा या कठोरता से नहीं निकाला जाना चाहिए। हिंसा तो सबसे अंतिम और कम प्रभावी उपाय है। इस कहानी में व्यापारी ने गधे को कभी नहीं पीटा, फिर भी अपनी समस्या का हल ढूंढ लिया। चतुराई से काम लेने का एक तरीका हमेशा होता है, जिसे हमें विभिन्न परिस्थितियों में स्वयं खोजना होता है।

शिक्षा: चतुराई और धैर्य से समस्या का समाधान संभव है।

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