नींद की चाँदनी और आरव का जादुई सफर – The Moonlight of Sleep and Aarav’s Magical Journey

नींद की चाँदनी और आरव का जादुई सफर – The Moonlight of Sleep and Aarav’s Magical Journey

सोने से पहले की कहानियाँ

नींद की चाँदनी और आरव का जादुई सफर

रात के करीब साढ़े नौ बज रहे थे और पूरे शहर में धीरे-धीरे सन्नाटा उतर रहा था। आकाश में चाँद पूरी चमक के साथ टंगा था, जैसे किसी ने उसे अभी–अभी साफ़ करके रखा हो। आठ साल का आरव अपने कमरे की खिड़की से चाँद को देख रहा था। उसे रात की चाँदनी हमेशा से बहुत पसंद थी क्योंकि उसे लगता था कि रात में दुनिया किसी और रहस्यमयी रंग में रंग जाती है। हवा धीमी थी, पेड़ धीमे-धीमे हिल रहे थे और घरों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही थीं। लेकिन आरव की आँखों में अब भी नींद नहीं थी। वह सोच रहा था कि आज चाँद पहले से ज्यादा शांत क्यों लग रहा है, जैसे वह कुछ कहना चाहता हो।

अचानक एक बहुत हल्की सी हवा खिड़की से अंदर आई, जैसे किसी ने धीरे से पर्दों को छुआ हो। हवा में एक हल्की सी नीली चमक थी, इतनी नरम कि आरव को लगा शायद उसकी आँखों का भ्रम हो। लेकिन फिर उसने वह फुसफुसाहट सुनी जिसने उसकी सांस रोक दी। किसी ने बिल्कुल धीमी आवाज़ में कहा, “आरव… तुम सुन सकते हो मुझे?”

वह चौंक गया लेकिन डर महसूस नहीं हुआ। आवाज़ डरावनी नहीं बल्कि बहुत कोमल थी। वह बोला, “कौन है वहाँ?” तभी नीली चमक बढ़ने लगी और एक छोटी-सी गोल रोशनी उसके सामने तैरने लगी। वह किसी छोटे तारे की तरह लग रही थी जो हवा में धीरे-धीरे गोल घेरा बनाते हुए चमक रहा था।

रोशनी ने कहा, “मैं चाँदनी हूँ… लेकिन आज रात मैं अपने घर वापस नहीं जा पा रही। मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।”

आरव ने अचरज से पूछा, “तुम्हारा घर कहाँ है? तुम यहाँ कैसे आ गई?”

नीली रोशनी थोड़ी धीमी हुई, जैसे वह दुखी हो। “हम चाँद की रोशनी के छोटे कण हैं। जब रात बहुत शांत होती है, तो हम धरती पर उतरते हैं, बच्चों की नींद की रक्षा करने के लिए, उनके सपनों को उजाला देने के लिए। लेकिन आज, मैं रास्ता भटक गई हूँ। बादल आ गए थे और मेरा लौटने का मार्ग खो गया। अगर मैं समय पर वापस नहीं गई, तो मैं गायब हो सकती हूँ।”

आरव का दिल धड़क उठा। उसे अचानक लगा कि इस नन्ही रोशनी की जिम्मेदारी उसी पर है। उसने बिना सोचे कहा, “मैं तुम्हें घर पहुँचाने में मदद करूँगा।”

रोशनी हल्की सी चमकी, जैसे मुस्कुरा रही हो। “धन्यवाद, आरव। लेकिन हमें जल्दी करना होगा।”

आरव ने धीरे से दरवाज़ा खोला ताकि मम्मी-पापा जाग न जाएँ, और बाहर निकल गया। रात शांत थी, सिर्फ़ जुगनुओं जैसी छोटी रोशनियाँ दूर-दूर टिमटिमा रही थीं। नीली रोशनी आगे-आगे उड़ने लगी और आरव उसके पीछे चलने लगा।

“मुझे बताओ तुम्हारा रास्ता कहाँ खोया?” आरव ने चलते-चलते पूछा।

“मैं सपनों वाले रास्ते से आती हूँ,” रोशनी ने कहा। “जहाँ बच्चों की कल्पनाएँ तैरती हैं। लेकिन आज, किसी वजह से रास्ते बदल गए हैं। कुछ रातों में बादल इतने भारी हो जाते हैं कि हमारे रास्ते टूट जाते हैं।”

आरव ध्यान से सुनता रहा। थोड़ी देर बाद वे पार्क पहुँचे। रात की चाँदनी घास पर चाँदी की तरह बिछी हुई थी। हवा ठंडी थी और झूले धीरे-धीरे हिल रहे थे, जैसे वे रात के गाने पर नाच रहे हों।

रोशनी रुक गई। “यहीं किसी दिशा से मैं आई थी। लेकिन अब मुझे वो चमक नहीं दिख रही जो हमें हमारे घर तक ले जाती है।”

आरव ने चारों तरफ देखा। सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि जैसे कुछ हवा में बदल रहा हो। मंज़रों की परतें थोड़ा-सा चमकने लगीं, जैसे उसकी आँखों के सामने कोई अदृश्य दरवाज़ा खुलने को हो।

नीली रोशनी बोली, “तुम्हें कुछ दिखाई दे रहा है?”

आरव ने सिर हिलाया। “हाँ… यहाँ कुछ है।”

रोशनी उत्साहित हुई। “तुम वो देख सकते हो जो सामान्य लोग नहीं देख पाते। शायद इसलिए मैं तुम्हारी आवाज़ सुन पाई थी। तुम्हारे दिल में अभी भी बचपन वाली सच्चाई बची है।”

अचानक हवा में एक गोल सा चक्र उभरा। वह पारदर्शी था लेकिन उसके चारों ओर चाँदनी की चमक थी। आरव ने उसे छुआ तो उसे मुलायम ठंडक महसूस हुई। वह बोला, “शायद यह वही रास्ता है।”

रोशनी चमक उठी। “हाँ। यही तो हमारा मार्ग है। लेकिन इसमें सिर्फ तुम ही प्रवेश कर सकते हो।”

“मैं?” आरव ने आश्चर्य से पूछा।

“हाँ। केवल वो बच्चे जो सपनों पर विश्वास करते हैं, इस रास्ते को देख पाते हैं।”

आरव ने गहरी साँस ली और रास्ते की तरफ कदम बढ़ाया। जैसे ही वह अंदर गया, दुनिया बदल गई। अब वह एक सफ़ेद, चमकीली दुनिया में था जहाँ हवा में छोटे-छोटे तारे उड़े जा रहे थे। कुछ जगहों पर रंगीन बादल थे, कुछ जगहों पर चाँदी की नदियाँ बह रही थीं, और दूर-d दूर तक अनोखे पेड़ लगे थे जिनकी पत्तियाँ रोशनी जैसी चमकती थीं।

नीली रोशनी उसके बगल में तैर रही थी। “यही सपनों की दुनिया है… जहाँ हम चाँद के बच्चे रहते हैं।”

थोड़ा आगे जाने पर एक ऊँचा सा दरवाज़ा दिखा। उसके ऊपर सफ़ेद अक्षरों में चमकते हुए शब्द थे, “घर की राह।”

रोशनी धीरे से उस ओर उड़ने लगी। “यही मेरा घर है। लेकिन मेरे साथ एक समस्या है। अगर मैं इस दरवाज़े में अकेली गई तो मैं बहुत कमजोर हो जाऊँगी। मुझे किसी की उष्मा चाहिए, किसी इंसान के दिल की। सिर्फ़ थोड़ी। जिससे मैं फिर पूरी तरह चमक सकूँ।”

आरव समझ गया। वह बोला, “मैं अपनी उष्मा कैसे दूँ?”

“बस अपना हाथ आगे बढ़ाओ,” रोशनी ने कहा।

आरव ने अपना हाथ आगे किया। रोशनी उसके हाथ पर बैठ गई। उसका स्पर्श बिल्कुल ठंडा था, लेकिन फिर धीरे-धीरे एक हल्की गर्माहट बनने लगी, जैसे कोई छोटी खुशी फैल रही हो। रोशनी एकदम चमकदार हो गई।

“अब मैं जा सकती हूँ,” उसने कहा।

वह दरवाज़े की ओर बढ़ी, लेकिन फिर रुककर बोली, “तुम्हारी वजह से मैं बच गई। तुम्हें पता है कि तुम्हारे अंदर सबसे खास चीज़ क्या है?”

आरव ने सिर हिलाया।

“तुम्हारी दयालुता,” उसने कहा। “जो बच्चे दयालु होते हैं, वे हमेशा रात की दुनिया के करीब होते हैं। वे वो चीज़ें देख पाते हैं जो दूसरों को नहीं दिखतीं।”

फ़िर वह धीरे-धीरे दरवाज़े के अंदर चली गई। दरवाज़ा चमकते हुए बंद हो गया।

आरव कुछ पल वहीं खड़ा रहा। फिर अचानक सफ़ेद दुनिया मिटने लगी और उसे लगा कि वह सामान्य दुनिया में वापस आ रहा है। पल भर में वह फिर पार्क में था। चाँद ऊपर उसी तरह चमक रहा था, हवा भी वैसी ही थी, लेकिन अब सब कुछ शांत था। जैसे कुछ हुआ ही न हो।

वह घर लौट आया, धीरे से दरवाज़ा बंद किया, बिस्तर पर लेट गया। लेकिन आज उसकी आँखों में नींद बहुत जल्दी आ गई। उसे लगा कि चाँद की रोशनी उसे ढक रही है और धीरे-धीरे वह एक गहरी, शांत नींद में चला गया।

सुबह जब वह उठा तो उसके कमरे में हल्की-सी नीली चमक फैली थी। शायद यह उसकी कल्पना थी, शायद नहीं। लेकिन आरव मुस्कुरा दिया क्योंकि उसे पता था कि उसने किसी की मदद की है। और वही सबसे बड़ी सीख थी कि अच्छाई कभी व्यर्थ नहीं जाती।

शिक्षा: दयालुता हमेशा किसी न किसी का रास्ता रोशन करती है, और कभी-कभी हमारी भी मदद करती है।

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