डरपोक बादल और चमकीली रात
रात का आसमान शांत था, ठंडी हवा पेड़ों की पत्तियों को हल्के से हिला रही थी। आसमान में छोटे-छोटे तारे चमक रहे थे, लेकिन उस रात कुछ अलग होने वाला था। आसमान के एक कोने में बादल मीठू धीरे-धीरे तैर रहा था। मीठू बाकी बादलों की तरह खुशमिजाज नहीं था। वह थोड़ा डरपोक था। अँधेरे से डरता था, तेज आवाज़ों से डरता था और रात के आसमान में अकेले तैरने से भी डरता था। हर रात वह कोशिश करता कि किसी बड़े बादल के पीछे छिप जाए। लेकिन आज वह अकेला रह गया था।
जैसे ही चाँद अपनी हल्की सफेद चमक फैलाने लगा, मीठू को डर लगा कि रात में उसके नीचे क्या-क्या हो सकता है। उसे लगा कि शायद कोई अजीब आवाज आएगी या कोई तेज चमक उसे डरा देगी। डर में उसने खुद को गोल किया और धीरे-धीरे चाँद के सामने जा पहुँचा। कुछ ही मिनटों में चाँद पूरी तरह ढक गया और गाँव अँधेरे में डूब गया। नीचे गाँव के लोग सोचने लगे कि आज चाँद क्यों नहीं निकला। बच्चे खिड़की से बाहर देख रहे थे, लेकिन उन्हें सिर्फ गहरा आसमान दिखाई दे रहा था। किसी को पता नहीं था कि ऊपर एक छोटा बादल डर के मारे चाँद को ढककर बैठा है।
इसी अँधेरे में आसमान से एक चमक उतरी। यह थी तारा-परी, जिसकी पोशाक तारा-धूल से बनी थी और जिसकी हर चाल आसमान में हल्की रोशनी की लकीर छोड़ती थी। उसने मीठू को देखा और धीरे से उसकी ओर बढ़ी। मीठू काँपते हुए बोला, मैं डर गया था, इसलिए चाँद को ढक लिया। परियाँ मुझे डराती हैं, रात बहुत बड़ी लगती है। तारा-परी ने उसे नरमी से कहा, तुम अकेले नहीं हो। आसमान में हर तारा, हर हवा की लहर तुम्हारे साथ है। लेकिन जब तुम चाँद को ढक देते हो तो नीचे गाँव वाले परेशान हो जाते हैं। रात की चमक छिन जाती है। मीठू ने झेंपते हुए कहा, पर मैं क्या करूँ, मुझे डर लगता है। तारा-परी ने मीठू को समझाया, बहादुरी का मतलब यह नहीं कि तुम्हें डर ना लगे। बहादुरी का मतलब है कि तुम डर के बावजूद कुछ अच्छा करना सीखो। तुम छोटे हो, पर तुम्हारा दिल बुरा नहीं है।
मीठू ने ऊपर देखा। उसका छोटा दिल अभी भी घबराया हुआ था, लेकिन अब उसमें एक छोटी-सी चमक पैदा हुई थी। तारा-परी ने अपनी जादुई छड़ी उठाई और हवा में एक चमकीली लकीर खींची। उस लकीर में रात की हल्की रोशनी थी जो शांत करती थी। परी बोली, मैं तुम्हें कुछ दिखाती हूँ। उसने मीठू को नीचे गाँव का दृश्य दिखाया। लोग अपने-अपने काम रोककर आसमान की ओर देख रहे थे। बच्चे उत्सुक थे, कुछ डरे हुए भी। बिना चाँद के रात इतनी खाली क्यों लग रही है? मीठू ने धीरे से कहा, तो यह मेरी वजह से हुआ?
तारा-परी ने सिर हिलाया, हाँ, पर तुम इसे सुधार सकते हो। अगर तुम चाँद के रास्ते से हट जाओगे तो रात फिर से चमक जाएगी। गाँव के बच्चे सोते समय चाँदनी देखकर सुरक्षित महसूस करते हैं। क्या तुम उनकी मदद करोगे? मीठू ने डरते हुए कहा, पर अगर मैं हटा तो अँधेरा मुझे निगल लेगा। तारा-परी मुस्कुराई, अँधेरा किसी को नहीं निगलता। वह सिर्फ प्रकाश को और विशेष बनाता है। और तुम अकेले नहीं हो, मैं यहीं हूँ।
मीठू ने चाँद की रोशनी में घूमकर देखा कि पूरा आसमान कितनी शांति से चमक रहा है। उसे लगा जैसे रात भी उसे दुलार रही हो। नीचे गाँव में बच्चे बिना डरे सो रहे थे और ऊपर आसमान में मीठू पहली बार खुद को मजबूत महसूस कर रहा था। वह अब जानता था कि डरना गलत नहीं, लेकिन डर के कारण दूसरों की रोशनी रोक देना गलत है। उस रात से मीठू ने कभी चाँद को ढककर नहीं रखा। जब भी उसे डर लगता, वह तारा-परी की बात याद करता और चाँद की रोशनी को रास्ता देता। रात फिर से चमकदार बन गई और मीठू उस चमक का हिस्सा बन गया।