पानी की नन्ही रानी
गाँव धीरे धीरे चिंता में डूब रहा था क्योंकि नदी का जल हर दिन कम होता जा रहा था, पहले जो नदी पूरे उत्साह से बहती थी अब सिर्फ पतली सी धारा बची थी और कई जगह तो नदी का तल दिखने लगा था, बच्चे खेलना छोड़कर नदी देखने जाते थे और सोचते थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि उनकी प्यारी नदी इतनी कमजोर पड़ गई, इसी बीच गाँव की एक समझदार बच्ची मीरा को हमेशा लगता था कि इस नदी के पीछे कोई जादू छुपा है क्योंकि बचपन से उसे घर में सुना जाता था कि नदी में पानी की नन्ही रानी रहती है जो नदी को बहने की ताकत देती है और जब लोग प्रकृति का सम्मान करते हैं तब रानी खुश होकर नदी को साफ और भरा रखती है।
मीरा को याद आया कि पिछले साल गाँव में बहुत कचरा नदी में फेंका गया था, लोगों ने त्योहारों के बाद टोकरी, रंग, फूल और प्लास्टिक सब नदी में डाल दिए थे, कई जगह पर छोटे बड़े गड्ढों में मिट्टी भरी गई थी, शायद इस वजह से रानी कमजोर हो गई। उसने यह बात अपने दोस्तों को बताई। उसके दोस्त कबीर, सना, रीना और यश सभी ने उसकी बात ध्यान से सुनी और तय किया कि उन्हें नदी बचानी है क्योंकि अगर नदी सूख गई तो खेत सूखेंगे, जानवर प्यासे रहेंगे और गाँव की खुशी भी खत्म हो जाएगी। अगले दिन सुबह मीरा अपने दोस्तों के साथ नदी के किनारे पहुँची, वहाँ सब जगह गंदगी बिखरी हुई थी, काई जमी थी, कई जगह पानी बदबूदार हो गया था और जहाँ कभी चमकीला पानी बहता था
वहाँ अब धूल उड़ रही थी। मीरा ने गहरी साँस ली और बोली, चलो शुरू करते हैं। बच्चों ने सबसे पहले पानी के ऊपर तैरते कचरे को इकट्ठा करना शुरू किया, कबीर पानी के किनारों पर फँसी प्लास्टिक की बोतलें निकालता, रीना छोटे बाल्टियों से कीचड़ हटाती और सना पेड़ों के नीचे पड़े कागज़ और रंगीन प्लास्टिक उठाती, यह मुश्किल काम था लेकिन सब मिलकर कर रहे थे। जैसे ही बच्चों ने थोड़ी सफाई की, अचानक मीरा को पानी में हल्की सी चमक दिखी, उसने ध्यान से देखा तो पानी में एक छोटी सी नीली आकृति दिखाई दी, वह बहुत कमजोर लग रही थी, जैसे उसके पास ताकत न बची हो, मीरा ने डरते हुए नहीं बल्कि प्यार से पूछा, क्या आप पानी की नन्ही रानी हैं।
आकृति ने आँखें खोलीं और सिर हिलाया, उसकी आवाज़ बहुत धीमी और कांपती हुई थी, रानी ने कहा कि तुम्हारे गाँव ने बहुत समय से नदी की देखभाल नहीं की, लोग कचरा डालते रहे और पेड़ों की कटाई भी की, मैं हर बार बचाने की कोशिश करती रही लेकिन अब मेरी शक्ति कम हो चुकी है, अगर तुम सब मदद न करते तो शायद मैं गायब हो जाती। बच्चों को यह सुनकर बहुत दुख हुआ, यश बोला कि हम आपको मजबूत बनाएँगे, हम नदी को दोबारा साफ करेंगे और कोई भी आगे से नदी में कचरा नहीं फेंकेगा, मीरा ने रानी की तरफ हाथ बढ़ाया और बोली, आप चिंता मत करो, हम आपको अकेला नहीं छोड़ेंगे।
रानी हल्का सा मुस्कुराई और बोली कि जब बच्चे या इंसान दिल से प्रकृति की मदद करते हैं तो मुझे शक्ति मिलती है लेकिन यह काम सिर्फ एक दिन में नहीं होगा, कई हफ्तों तक तुम्हें नदी की सफाई करनी होगी और गाँव वालों को भी समझाना होगा। अगले कुछ दिनों में बच्चे रोज़ नदी साफ करते रहे, वे लोगों के घर जाकर बताते कि नदी क्यों सूख रही है और रानी क्यों कमजोर हो गई, कुछ लोग पहले हँसते थे लेकिन धीरे धीरे बच्चों का साहस देखकर सब प्रभावित हुए और कई गाँव वाले भी सफाई के लिए साथ आने लगे। सफाई के हफ्तों बाद नदी का पानी थोड़ा साफ दिखने लगा, बहाव भी बढ़ने लगा और एक दिन अचानक मीरा ने देखा कि पानी पहले से ज्यादा चमक रहा है, जैसे कोई चाँद उसके अंदर छुपा हो।