खामोशी की रानी और शोर करने वाले दानव की अनोखी कहानी
बहुत पहले की बात है, एक ऐसा पहाड़ी राज्य था जहाँ रात होते ही एक अद्भुत जादू होता था। यह जादू था शांति का! जैसे ही सूरज डूबता, पूरा राज्य मुलायम चाँदनी की चादर में सो जाता। इस राज्य की रानी का नाम था मौनिमा, जिसे सब “खामोशी की रानी” कहते थे। उसकी खासियत यह थी कि जब वह अपनी हरी-भरी आँखें बंद करती, तो पूरे राज्य में ऐसी शांति छा जाती कि फूलों के खिलने की आवाज भी सुनाई देती!
रोज़, सूरज ढलते ही रानी मौनिमा अपने महल की ऊँची मीनार पर जाती और एक खास गीत गुनगुनाती:
“चुप-चुप सब सो जाओ,
सपनों में खो जाओ,
चाँद तारे जगमगाएँ,
रात यूँ ही बीत जाए।”
एक रात, जब रानी ने अपना गीत शुरू किया, तभी अचानक…
घड़घड़… गड़गड़… टन-टन-टन!
दूर से अजीबो-गरीब आवाज़ें आने लगीं।
रानी ने देखा – एक विशालकाय, रंग-बिरंगा दानव पहाड़ों से उतरकर राज्य की ओर आ रहा था! उसका शरीर ढोलक, घंटियों और सीटियों से बना था, और हर कदम पर वह तरह-तरह की आवाज़ें निकालता। लोग डरकर घरों में छिप गए।
रानी मौनिमा ने अपना शांति गीत और जोर से गाया, पर दानव की आवाज़ें उस पर भारी पड़ रही थीं। तभी रानी की नज़र दानव के पैरों पर पड़ी – वह लंगड़ाकर चल रहा था, और उसकी आँखों में डर था!
रानी समझ गई। उसने धीरे से पूछा: “तुम दर्द में हो क्या?”
दानव रुक गया और अपना एक पैर उठाया। उसके पैर में एक बड़ा काँटा चुभा हुआ था! वह दर्द से कराह रहा था, इसलिए उससे इतना शोर हो रहा था।
रानी ने तुरंत अपने हाथों से वह काँटा निकाल दिया। दानव ने एक आखिरी आवाज़ निकाली, और फिर… सन्नाटा छा गया।
थोड़ी देर बाद, दानव ने धीमी, मधुर आवाज़ में कहा: “धन्यवाद! मैं गूँजू हूँ। मैं संगीत बनाता हूँ, पर यह काँटा चुभने से मेरी सारी आवाज़ें बिगड़ गई थीं।”
अगले दिन, रानी मौनिमा ने सबको बुलाया और कहा: “यह है हमारा नया दोस्त गूँजू! अब वह हर रात हमारे लिए सुलहाने वाले संगीत बजाएगा।”
उस दिन से राज्य में रातों को नई मधुर आवाज़ें गूँजने लगीं – कोयल की कूक, झरने की कलकल, और पत्तों की सरसराहट। गूँजू ने रानी को सिखाया कि शांति के साथ-साथ मधुर ध्वनियाँ भी ज़िंदगी को खूबसूरत बनाती हैं।
और इस तरह, खामोशी की रानी ने सीखा कि असली शांति सिर्फ चुप रहने में नहीं, बल्कि दूसरों की पीड़ा समझने और उनकी मदद करने में है।
शिक्षा: समझ और धैर्य से हम किसी के भी दिल तक पहुँच सकते हैं।