जुगनुओं की रानी का मुकुट
घने जंगल के बीच एक खुला मैदान था जहाँ रात होते ही छोटे छोटे जुगनू अपनी चमक से पूरी जगह को रौशन कर देते थे। इस मैदान की रानी थी एक सुंदर जुगनू जिसे सब जुगनुओं की रानी कहते थे। उसके सिर पर चमकदार सोने जैसा मुकुट था जो उसकी पहचान भी था और उसके राज्य की रोशनी का प्रतीक भी। हर रात जब रानी आकाश में उड़कर अपने पंख फैलाती थी, तो उसका मुकुट हल्की नीली रोशनी बिखेरता था और पूरा जंगल एक जादुई जगह सा लगने लगता था। लेकिन एक रात ऐसा हुआ कि सब जुगनू परेशान हो गए क्योंकि रानी का मुकुट अचानक गायब हो गया था। रानी की रोशनी तो थी, लेकिन उसके सिर पर मुकुट न होने से उसे भी अजीब महसूस हो रहा था और बाकी जुगनू भी बहुत उदास हो गए थे। मुकुट के बिना कोई उत्सव नहीं हो सकता था और रात की चमक भी फीकी लग रही थी। सभी सोच रहे थे कि आख़िर इतने कीमती मुकुट को कौन ले जा सकता है। जंगल की हवा में बेचैनी थी और हर ओर हलचल थी।
रानी ने अपने सभी जुगनू सैनिकों को बुलाया और कहा कि वे मुकुट ढूंढ निकालें। लेकिन उस रात जंगल की हवा बहुत भारी थी, बादल आसमान को ढके हुए थे और चाँद की रोशनी भी नहीं थी। अँधेरा इतना गहरा था कि एक-दूसरे को भी पहचानना मुश्किल हो रहा था। मुकुट की तलाश में सब जुगनू अलग-अलग दिशाओं में उड़कर खोज करने लगे, लेकिन बिना रोशनी के रास्ता देखना भी चुनौती बन गया था। अँधेरा जंगल की सबसे बड़ी दीवार की तरह सामने था। पेड़ों की शाखाओं की परछाइयाँ जमीन पर अजीब आकृतियाँ बना रही थीं। कई जुगनू गलती से कंटीली झाड़ियों में जा फँसे, कुछ रास्ता भटक गए और कुछ थककर वापस लौट आए। फिर भी पूरी कोशिश जारी थी क्योंकि वे अपनी रानी को बिना मुकुट के नहीं देखना चाहते थे। रानी खुद भी उड़कर खोज रही थी, हालांकि वह बाकी जुगनुओं को संभालने में लगी थी ताकि कोई डर ना जाए।
काफी देर बाद, जंगल के एक कोने में एक हल्की, अलग सी चमक दिखाई दी। यह चमक जुगनुओं की रोशनी जैसी नहीं थी, बल्कि कुछ और ही थी। एक जुगनू ने ध्यान दिया कि वह चमक किसी छोटे जीव के पंखों से आ रही थी। उसने पास जाकर देखा तो पता चला कि यह चमक एक खूबसूरत तितली के पंखों से झिलमिला रही थी। तितली खुद भी इस रात खोई हुई लग रही थी। लेकिन जुगनू तब चौंक गया जब उसने देखा कि तितली के नन्हे सिर पर कुछ रखा हुआ है। वह वही चमकदार मुकुट था जो रानी का था। जैसे ही यह बात बाकी जुगनुओं को पता चली, वे जल्दी से उस दिशा में उड़कर पहुँच गए। पहले तो सबको लगा कि तितली ने मुकुट चुरा लिया है, लेकिन पास पहुँचने पर उन्हें कुछ और ही कहानी मिली।
तितली डरते हुए बोली कि उसका दिन बहुत खराब गया था। तेज हवा के चलते वह अपने घर से दूर निकल आई थी और रास्ता नहीं मिल रहा था। उड़ते उड़ते जब वह मैदान के ऊपर से गुजर रही थी तो एक तेज हवा के साथ मुकुट उछलकर उसके सिर पर आ गिरा था। अँधेरे में उसे समझ नहीं आया कि यह क्या है। वह खुद भी घबराई हुई थी और उनको ढूंढने की कोशिश कर रही थी जिनका यह सामान हो सकता था। वह रोशनी के हल्के निशान खोजती रही, क्योंकि तितली जानती थी कि कोई न कोई इसकी तलाश में जरूर होगा।
उस रात के बाद से जंगल की कहानी में एक नई दास्तान जुड़ गई कि कैसे एक भटकी हुई तितली ने रानी का मुकुट बचाया और कैसे जुगनुओं ने बदले में उसे घर का रास्ता दिखाया। जुगनुओं ने इस बात को हमेशा याद रखा कि रात का अँधेरा चाहे जितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटी सी रोशनी भी उम्मीद जगा सकती है और किसी की दुनिया बदल सकती है।
शिक्षा: हमेशा सच बोलना और दूसरों की मदद करना सबके लिए अच्छा होता है।