सफ़ेद पक्षियों का रहस्य
प्राचीन समय की बात है, एक शांत राज्य में एक राजा अपनी दूसरी पत्नी और ग्यारह बच्चों के साथ रहता था। राजा की पहली रानी का देहांत हो चुका था, और उनकी एकमात्र बेटी एलिसा अपने दस बड़े भाइयों के साथ सुख से रहती थी। परन्तु जब राजा ने नई रानी से विवाह किया, तो बच्चों का जीवन पूरी तरह बदल गया। नई रानी बाहरी रूप से तो सुंदर दिखती थी, लेकिन उसके मन में छल और ईर्ष्या भरी थी। उसे राजा के बच्चे बिल्कुल पसंद नहीं थे, खासकर एलिसा, जिसकी मासूमियत और सौंदर्य पूरे राज्य में प्रसिद्ध थे।
एक दिन रानी ने काले जादू की सहायता से एलिसा के दसों भाइयों को सफ़ेद पक्षियों में बदल दिया और उन्हें राज्य से दूर उड़ाकर भगा दिया। एलिसा भी महल से निकाल दी गई, पर उसके हृदय में अपने भाइयों को वापस दिलाने का दृढ़ निश्चय था। अकेली वन में भटकते हुए, वह अपने भाइयों को खोजने लगी। कई दिनों बाद उसे एक गुफा के पास सफ़ेद पक्षियों का झुंड दिखाई दिया। वह पास गई और जैसे ही पक्षी बोले, उसकी आंखों में आँसू भर आए, क्योंकि वे उसके भाई ही थे।
भाइयों ने बताया कि वह श्राप तब टूटेगा जब एलिसा उनके लिए सोने के फूलों से बनी कोट तैयार करेगी और इस पूरे समय वह एक शब्द भी नहीं बोलेगी। यदि उसने एक बार भी आवाज़ निकाली, तो पूरा श्राप स्थायी हो जाएगा। एलिसा ने बिना सोचे इस कठिन व्रत को स्वीकार कर लिया। वह जंगल में सोने जैसे चमकते दुर्लभ फूल ढूंढती, उन्हें तोड़कर धागे तैयार करती और चुपचाप कोट बुनती। समय बीतता गया। एक दिन, उसके सौंदर्य और तपस्या की चर्चा पड़ोसी देश के राजा तक पहुँची।
राजा स्वयं जंगल में शिकार करने आया और जब उसने एलिसा को देखा, तो वह उसकी निष्ठा और शांत सौम्यता से प्रभावित हो गया। उसने एलिसा को अपने राज्य में सम्मानपूर्वक रहने के लिए कहा। एलिसा बोल नहीं सकती थी, पर उसकी आंखों ने धन्यवाद व्यक्त किया।
राजा ने उसके मौन को उसकी गरिमा समझा और उससे विवाह कर लिया।नया जीवन शुरू हुआ, पर एलिसा का व्रत अधूरा था। वह हर रात महल के एक शांत कक्ष में बैठकर अपने भाइयों के लिए कोट बुनती रहती।
राजा तो समझदार था, पर उसका छोटा भाई, जो अत्यंत ईर्ष्यालु और चालाक था, एलिसा को पसंद नहीं करता था। उसे लगता था कि मौन रहकर वह कोई रहस्य छिपा रही है। धीरे-धीरे उसने अफवाहें फैलानी शुरू कर दीं कि एलिसा किसी गुप्त षड्यंत्र के तहत राजा की हत्या करना चाहती है और सोने के फूल किसी काले तंत्र का हिस्सा हैं। जनता में भय फैलने लगा। एलिसा बोल नहीं सकती थी, इसलिए वह अपना पक्ष नहीं रख पाती थी। राजा भी असमंजस में था, पर वह अपनी रानी पर विश्वास करता था। ईर्ष्यालु भाई ने मौका देखा और न्याय परिषद से मांग की कि एलिसा को दंड दिया जाए। कुछ ही दिनों में स्थिति इतनी बिगड़ी कि उसे आग में जलाने का निर्णय ले लिया गया।
जिस दिन दंड दिया जाना था, एलिसा अपनी अंतिम कोट बुनने में लगी हुई थी। उसकी उंगलियां कांप रही थीं, पर उसकी निष्ठा अटूट थी। उसी समय राजा के छोटे भाई ने अपने असली इरादे पूरे करने की योजना बना ली। वह राजा को भी मारकर स्वयं सिंहासन पर बैठना चाहता था। परन्तु एलिसा के एक पक्षी भाई ने यह योजना सुन ली और तत्काल उड़कर राजा तक पहुंचा। पक्षी ने अपनी चोंच और पंखों की सहायता से खतरा जताया। राजा समझ गया कि उसकी रानी निर्दोष है और उसके भाई की नीयत गलत। वह तुरंत अपने सैनिकों के साथ दंड स्थल की ओर दौड़ा। आग लगाने ही वाले थे कि राजा ने आकर सबकुछ रोक दिया। उसने अपने भाई को पकड़ने का आदेश दिया।
क्रोध में आकर उसने उसे नगर की ऊंची प्राचीर से नीचे फेंकवा दिया। तभी एलिसा अपनी अंतिम कोट लेकर खड़ी हुई। उसने कोटों को अपने दसों पक्षी भाइयों पर डाला और देखते ही देखते वे फिर से मनुष्य बन गए। श्राप टूट चुका था। एक भाई के हाथ में पंख रह गया था, क्योंकि कोट अधूरा था, पर वह मुस्कुरा कर बोला कि यह उसके लिए सम्मान की निशानी है। राजा, जनता और उसके भाई सब एलिसा को नमन करने लगे। उसकी साहस, प्रेम और त्याग ने सबका हृदय जीत लिया।
शिक्षा: प्रेम, धैर्य और निःस्वार्थ त्याग सबसे कठिन श्रापों को भी समाप्त कर सकते हैं।