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सिंहासन बत्तीसी कथा 21 – चंद्रज्योति की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 21 अगली सुबह जब राजा भोज पुनः उस दिव्य सिंहासन पर बैठने का प्रयत्न करने लगे, तो उसी क्षण उनके सामने इक्कीसवीं पुतली चंद्रज्योति प्रकट हुई। वह चमकती हुई रौशनी की तरह उनके सम्मुख अवतरित हुई और मनोहर स्वर में बोली कि वह विक्रमादित्य के पवित्र और शक्तिमान सिंहासन की इक्कीसवीं पुतली […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: राजा विक्रम और बेताल की बुद्धिमानी की परीक्षा भाग एक

  वेताल पच्चीसी, जिसे महान कवि सोमदेव भट्ट ने लगभग ढाई हज़ार वर्ष पहले रचा था, अद्भुत और रोमांचकारी कथाओं का संग्रह है। ये कहानियाँ चालाक और चतुर भूत बेताल द्वारा बुद्धिमान और पराक्रमी राजा विक्रमादित्य को सुनाई जाती हैं। इन कथाओं में प्राचीन काल की समृद्ध संस्कृति, भव्यता, शौर्य और जीवन के गहरे दर्शन […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: क्षमा की महानता भाग अठारह

विक्रम और बेताल: क्षमा की महानता  रात का अंधेरा गहरा था। श्मशान भूमि में हल्की धुंध घिरी हुई थी, और हवा की सरसराहट में सूखे पत्तों की भँभोर जैसी आवाज गूँज रही थी। पेड़ों की टहनियाँ आपस में टकरा रही थीं, मानो किसी अदृश्य शक्ति के साथ संघर्ष कर रही हों। उस अंधकार और रहस्यमय […]

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गोकर्ण-का-शिवलिंग---Gokarna-Shiva-Linga

गोकर्ण का शिवलिंग – Gokarna Shiva Linga

गोकर्ण का शिवलिंग एक दिन लंका के समुद्र तट पर रावण टहल रहा था। उसने देखा कि उसकी माता ने समुद्र के किनारे की मिट्टी से अपने हाथों से एक शिवलिंग बनाया था। वह उस लिंग की पूजा कर रही थीं, और उनकी पूजा के बाद लहरें उस लिंग को बहा ले जाती थीं। यह […]

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भेड़िया-और-मेमने-का-बहाना---Wolf-and-the-Lamb’s-Excuse

भेड़िया और मेमने का बहाना – Wolf and the Lamb’s Excuse

भेड़िया और मेमने का बहाना एक शांत पहाड़ी इलाके में एक साफ बहती छोटी नदी थी जिसके किनारे हर सुबह नरम धूप चमकती थी और घास पर ओस मोती जैसी टिमटिमाती थी। उसी नदी के पास एक चरवाहे का टोल चलता था लेकिन कभी-कभी कुछ मेमने अकेले चरने चले जाते थे क्योंकि वहाँ का वातावरण […]

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कल्पवृक्ष-की-छाया-में-फँसा-मनुष्य---Escaping-the-Vicious-Cycle

कल्पवृक्ष की छाया में फँसा मनुष्य – Escaping the Vicious Cycle

कल्पवृक्ष की छाया में फँसा मनुष्य मनुष्य चार आधारभूत आवश्यकताओं अथवा समस्याओं – निद्रा, आहार, मैथुन और भय – के चक्र में फँसा हुआ है। यह एक दुष्चक्र है जिसे केवल ईश्वर के प्रति समर्पण और स्मरण के द्वारा ही पार किया जा सकता है। एक बार एक निर्धन व्यक्ति जीविका की तलाश में लंबी […]

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The Softly Speaking Waves of the River

नदी की धीमी बोलती लहरें – The Softly Speaking Waves of the River

नदी की धीमी बोलती लहरें शांतपुर नाम के छोटे, सुंदर और हरे-भरे कस्बे में एक दस साल का लड़का रहता था, जिसका नाम था पार्थ। पार्थ को हमेशा से प्रकृति के करीब रहना अच्छा लगता था। दूसरे बच्चे मोबाइल में गेम खेलते या टीवी देखते रहते, लेकिन पार्थ का मन नदी, पेड़, मिट्टी और हवा […]

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जिराफ़-और-छोटा-खरगोश-–-The-Giraffe-and-the-Little-Rabbit

जिराफ़ और छोटा खरगोश – The Giraffe and the Little Rabbit

जिराफ़ और छोटा खरगोश हरे मैदानों और ऊँचे पेड़ों से घिरे शांत जंगल में कई तरह के जानवर रहते थे। वहाँ सूरज की रोशनी पेड़ों की पत्तियों से छनकर जमीन पर गिरती और हवा में फूलों की महक घुली रहती थी। इसी जंगल में एक लंबा, सुडौल और ऊँची गर्दन वाला जिराफ़ भी रहता था। […]

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झूठा गडरिया

एक गाँव में एक लापरवाह गडरिया लड़का अपने पिता के साथ रहता था। एक दिन पिता ने उसे समझाया कि अब वह काफी बड़ा हो गया है और भेड़ों की देखभाल का दायित्व संभाल सकता है। इसलिए प्रतिदिन उसे भेड़ों के झुंड को हरे भरे मैदानों में ले जाना और उन्हें चरते हुए पहरा देना […]

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डरपोक-बादल-और-चमकीली-रात-The-Timid-Cloud-and-the-Shining-Night

डरपोक बादल और चमकीली रात – The Timid Cloud and the Shining Night

डरपोक बादल और चमकीली रात रात का आसमान शांत था, ठंडी हवा पेड़ों की पत्तियों को हल्के से हिला रही थी। आसमान में छोटे-छोटे तारे चमक रहे थे, लेकिन उस रात कुछ अलग होने वाला था। आसमान के एक कोने में बादल मीठू धीरे-धीरे तैर रहा था। मीठू बाकी बादलों की तरह खुशमिजाज नहीं था। […]

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