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अबिरामी देवी की असीम भक्ति - True Devotion to Abirami

अबिरामी देवी की असीम भक्ति – True Devotion to Abirami

अबिरामी देवी की असीम भक्ति तमिलनाडु की पवित्र भूमि पर एक बार सुब्रह्मण्यम नामक एक महान भक्त रहते थे। उनकी आराध्य थीं माँ अबिरामी। उनकी भक्ति इतनी गहन और निश्छल थी कि वे हर किसी को देवी की महिमा के बारे में बताने लगते। वे अबिरामी मंदिर के पास लोगों का समूह जमा करते, देवी […]

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शेर-और-छींकता-हुआ-हाथी---Lion-and-The-Sneezing-Elephant

शेर और छींकता हुआ हाथी – Lion and The Sneezing Elephant

शेर और छींकता हुआ हाथी जंगल के बीचोंबीच एक शांत और हरा-भरा इलाका था जहाँ तरह-तरह के जानवर रहते थे। वहाँ का राजा था शेर भीम, जिसे सभी जानवर बहुत मान देते थे। शेर भीम न सिर्फ ताकतवर था बल्कि बहुत समझदार भी था। उसी जंगल में एक बड़ा और प्यारा हाथी गजानन भी रहता […]

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मेहनती-चींटी-और-आलसी-टिड्डा---The-Hardworking-Ant-and-the-Lazy-Grasshopper

मेहनती चींटी और आलसी टिड्डा – The Hardworking Ant and the Lazy Grasshopper

मेहनती चींटी और आलसी टिड्डा हरे-भरे खेतों और पेड़ों से घिरे एक शांत मैदान में दो छोटे जीव रहते थे। एक थी छोटी पर मेहनती चींटी लीला, जो पूरे साल सर्दियों की तैयारी में लगी रहती थी। दूसरा था आलसी टिड्डा गिन्नू, जिसे बस गाना, कूदना और धूप में मस्ती करना पसंद था। दोनों एक […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 19 – रूपरेखा की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 19 उन्नीसवें दिन राजा भोज जब सिंहासन पर बैठने जा रहे थे, तभी उन्नीसवीं गुड़िया रूपरेखा ने उन्हें रोक दिया। उसने कहा कि वह एक कहानी सुनाएगी, जो यह बताएगी कि न्याय करने में मन और ज्ञान दोनों का संतुलन कितना महत्वपूर्ण होता है। उसने राजा से कहा कि पहले पूरी कहानी […]

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Saint-Tyagaraja---संत-त्यागराज

संत त्यागराज – Saint Tyagaraja

संत त्यागराज की कथा संत त्यागराज का जन्म 4 मई 1767 को तमिलनाडु के तंजावुर के समीप तिरुवैय्यारु में एक सरल और धर्मनिष्ठ तेलुगु स्मार्त ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनका कुल प्राचीन समय में आंध्र प्रदेश से तमिलनाडु आकर बस गया था। उनके पिता राम ब्रह्मम और माता सीतम्मा अत्यन्त श्रद्धालु थे, और घर में […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 31 – कौशल्या की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 31 इकतीसवें दिन जब राजा भोज पुनः सिंहासन पर बैठने आए, तो इकतीसवीं गुड़िया उनके सामने प्रकट हुई और राजा विक्रमादित्य से जुड़ी एक कथा सुनाने लगी। उसने अपना परिचय देते हुए कहा कि वह कौशल्या है, इस दिव्य सिंहासन की इकतीसवीं गुड़िया। उसने राजा भोज से कहा कि जब स्वयं विक्रमादित्य […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 26 – विश्वासवती की कथा

छब्बीसवें दिन जब राजा भोज पुनः सिंहासन पर बैठने आए, तो छब्बीसवीं गुड़िया मृगनयनी उनके सामने प्रकट हुई। उसने कहा कि राजा विक्रमादित्य केवल एक महान शासक ही नहीं थे, बल्कि अद्वितीय तपस्वी और दयालु व्यक्ति भी थे। उसने राजा भोज से आग्रह किया कि वह उसकी कथा सुनें और स्वयं तय करें कि क्या […]

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वचन के धनी कर्ण - Karna – A Man of his Word

वचन के धनी कर्ण – Karna A Man of his Word

वचन के धनी कर्ण महाभारत का युद्ध प्रारंभ होने से पहले, पांडवों की माता कुंती देवी कर्ण से मिलने गईं। कर्ण कुंती देवी का ज्येष्ठ पुत्र था, परंतु विवशतावश उन्होंने उसे त्याग दिया था। अब कर्ण एक पराक्रमी योद्धा बन चुका था और पांडवों के विरुद्ध युद्ध में था। वह कौरव सेना के अग्रणी दुर्योधन […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: वचन की ताकत भाग बाईस

विक्रम और बेताल: वचन की ताकत घना जंगल अंधेरे में डूबा हुआ था। पेड़ों की परछाइयाँ हिलती हुई प्रतीत होती थीं और हवा में एक अनजाना भय तैर रहा था। राजा विक्रम अपने मजबूत कदमों के साथ श्मशान की ओर बढ़ रहे थे, जहाँ बेताल फिर से उसी पेड़ से उलटा लटका हुआ था। जैसे […]

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Another-Spy-Killed---43

बुद्धि और विनोद से भरपूर तेनाली रामन की कहानियाँ – 41 से 45

देवदासी का प्रेम – 41 राजा कृष्णदेवराय का एक देवदासी नर्तकी कृष्णावेनी से प्रेमसंबंध था। राजा को पूर्ण विश्वास था कि वह किसी अन्य पुरुष से संबंध नहीं रखती। राजा उससे विवाह करना चाहता था। किंतु उसे जनता के विरोध का भय था क्योंकि अधिकांश लोग देवदासी कन्याओं को पसंद नहीं करते थे। हमेशा की […]

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