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 वाल्मीकि रामायण के अनंत आयाम – 1

वाल्मीकि रामायण भारतीय साहित्य का प्रथम महान महाकाव्य है। यह वह दिव्य कृति है जिसने मानव समाज को आदर्श जीवन का मार्ग दिखाया और मर्यादा पुरुषोत्तम राम तथा पवित्र नारीत्व की प्रतीक सीता के चरित्र को अमर बनाया। इस महाकाव्य में वर्णित राम और सीता का पवित्र संबंध सूर्य और चन्द्रमा के समान अविभाज्य माना […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 24 – करुणावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 24 चौबीसवें दिन जब राजा भोज सिंहासन के समीप पहुँचे तो चौबीसवीं पुतली करुणावती प्रकट हुई और बोली कि वे पहले राजा विक्रमादित्य की कथा सुनें और फिर निर्णय लें कि वे इस अद्भुत सिंहासन पर बैठने योग्य हैं या नहीं। यह कहकर वह कथा सुनाने लगी। उसने बताया कि विक्रमादित्य अपनी […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: एक अधूरी प्रतिज्ञा और प्राणों की बाज़ी पर टिका सत्य भाग पाँच

विक्रम और बेताल: एक अधूरी प्रतिज्ञा और प्राणों की बाज़ी पर टिका सत्य रात अत्यंत भयावह थी। कभी हल्की, कभी तेज़ वर्षा रुक-रुक कर हो रही थी। तेज़ हवाएँ पेड़ों को झकझोर रही थीं। वातावरण में अजीब सी घुटन और अनजान आवाज़ें गूंज रही थीं। बिजली की चमक के साथ आसपास की परछाइयाँ विकराल चेहरों […]

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झूठा गडरिया

एक गाँव में एक लापरवाह गडरिया लड़का अपने पिता के साथ रहता था। एक दिन पिता ने उसे समझाया कि अब वह काफी बड़ा हो गया है और भेड़ों की देखभाल का दायित्व संभाल सकता है। इसलिए प्रतिदिन उसे भेड़ों के झुंड को हरे भरे मैदानों में ले जाना और उन्हें चरते हुए पहरा देना […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 32 – रूपवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 32 बत्तीसवें दिन राजा भोज अपने निर्णय के साथ बत्तीसवीं गुड़िया के सामने पहुँचे। गुड़िया ने उन्हें देखकर कहा कि आज वे सिंहासन पर बैठने के लिए उत्सुक नहीं दिख रहे हैं। उसने अपना परिचय देते हुए कहा, “राजा भोज, मैं रूपवती हूँ, इन सभी गुड़ियाओं की अधिष्ठात्री। आज आपके मन में […]

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विक्रम और बेताल: झूठी शान का अंत भाग सत्रह

विक्रम और बेताल: झूठी शान का अंत रात का अंधेरा गहरा था। श्मशान भूमि पर हल्की धुंध का घेरा फैला हुआ था, और पेड़ों की सूखी शाखाएँ हवा में टकराकर डरावनी ध्वनि पैदा कर रही थीं। चारों ओर गूंजती फुसफुसाहटें और हवा में उड़ते पत्तों की सरसराहट वातावरण को और भी भयानक बना रही थी। […]

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चिड़िया-और-आँधी-–-The-Bird-and-the-Storm

चिड़िया और आँधी – The Bird and the Storm

चिड़िया और आँधी  एक छोटा सा गाँव था जो पहाड़ियों और खेतों से घिरा हुआ था। उस गाँव के किनारे एक पुराना सा पीपल का पेड़ खड़ा था जो कई बरसों से मौसमों को आते और जाते देखता रहा था। उसी पेड़ की एक ऊँची टहनी पर एक नन्ही चिड़िया रहती थी। वह कोई खास […]

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सपनों-का-बाज़ार-–-The-Dream-Market

सपनों का बाज़ार – The Dream Market

सपनों का बाज़ार रात के शांत आसमान में छिपा एक अनोखा स्थान था जिसे बच्चे सपनों का बाज़ार कहते थे। यह बाज़ार सिर्फ उन्हीं बच्चों को दिखाई देता था जिनका दिल साफ हो और जिनके मन में जादू पर यकीन हो। वहां रंग-बिरंगे सपने काँच की छोटी बोतलों में चमकते रहते थे, और हर बोतल […]

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छोटा-किसान-और-उसका-पहला-पौधा-The-Little-Farmer-and-His-First-Plant

छोटा किसान और उसका पहला पौधा – The Little Farmer and His First Plant

छोटा किसान और उसका पहला पौधा नीले आसमान के नीचे फैला हुआ एक छोटा-सा गाँव था जहाँ मिट्टी की खुशबू हर रास्ते में रची हुई थी और हर घर के पास कुछ न कुछ उगता था। इसी गाँव में रहता था एक सात साल का बच्चा आरव, जिसे लोग प्यार से छोटा किसान कहते थे […]

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नन्ही-तितली-परी---Tiny-Butterfly-Fairy

नन्ही तितली परी – Tiny Butterfly Fairy

नन्ही तितली परी नीले पहाड़ों के पीछे एक शांत और रंगों से भरी घाटी थी, जिसे लोग रूपनगर कहते थे। यहाँ हर सुबह सूरज की किरणें ऐसे गिरती थीं जैसे सोने की हल्की बारिश हो रही हो। इस घाटी में फूल सिर्फ फूल नहीं थे, वे हवा के साथ गुनगुनाते थे। पत्तों में हल्की चमक […]

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