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रंगनाथ का दक्षिण मुख - Sharanagati

रंगनाथ का दक्षिण मुख – Sharanagati

रंगनाथ का दक्षिण मुख विभीषण रावण के छोटे भाई थे। रावण लंका का राजा था जिसे युद्ध में भगवान राम ने पराजित किया था। रावण के बाद, भगवान राम ने विभीषण को लंका का राजा नियुक्त किया। हालाँकि, विभीषण सदैव भगवान के सान्निध्य में रहना चाहते थे। इसलिए वे भगवान और सीता देवी के साथ […]

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अरण्यकाण्ड की पावन कथा – 5

अरण्यकाण्ड की पावन कथा और दण्डक वन में श्रीराम का आगमन भरत वन में आए, राम से मिले, उनसे बातें कीं, उन्हें अयोध्या लौट चलने का अनुरोध किया, अपने प्रयास में सफल न हो सके तथा राम की पादुकाएँ लेकर अयोध्या लौट गए। तीनों माताएँ वहाँ आईं, वन में राम के जीवन को देखा, आँसू […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 29 – मानवती की कथा

इस कथा के अनुसार, उनत्तीसवें दिन जब राजा भोज शक्तिशाली और गौरवशाली सिंहासन पर बैठने का प्रयास कर रहे थे, तभी उनत्तीसवीं गुड़िया मानवती ने उन्हें रोकते हुए कहा कि वे तभी इस अद्भुत सिंहासन पर बैठने योग्य होंगे, जब उनमें राजा विक्रमादित्य जैसे महान गुणों का समावेश हो। उन्होंने अपने परिचय के बाद राजा […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 17 – विद्यावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 17 – विद्यावती की कथा अगली सुबह राजा भोज फिर से उस दिव्य सिंहासन के समीप पहुँचे और वे उस पर बैठने ही वाले थे कि सत्रहवीं पुतली विद्यावती प्रकट हुई। उसने राजा भोज को रोका और कहा कि वह उन्हें एक ऐसी कथा सुनाना चाहती है जिससे स्पष्ट हो सके कि […]

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चांद-के-बच्चों-का-खोया-हुआ-खिलौना---The-Lost-Toy-of-the-Moon-Children

चांद के बच्चों का खोया हुआ खिलौना – The Lost Toy of the Moon Children

चांद के बच्चों का खोया हुआ खिलौना रात का आसमान बिल्कुल शांत था, और पूरा गाँव हल्की नींद में डूबा था। घरों की छतों पर चांदनी ऐसे फैली थी जैसे किसी ने सफेद रेशम बिछा दिया हो। इसी शांत रात में गाँव की छोटी बच्ची अन्वी अपनी खिड़की से आसमान देख रही थी। उसे चांद […]

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खरगोश-और-कड़वी-औषधि-–-The-Rabbit-and-the-Bitter-Medicine

खरगोश और कड़वी औषधि – The Rabbit and the Bitter Medicine

खरगोश और कड़वी औषधि  हरीभरी पहाड़ियों के पास बसे एक शांत जंगल में एक छोटा सा खरगोश रहता था, जिसका नाम मीनू था। मीनू बहुत तेज दौड़ता था, पेड़ों के बीच कूदता-फाँदता फिरता था और पूरे जंगल का सबसे चंचल जीव माना जाता था। सुबह होते ही वह अपने बिल से निकलकर इधर-उधर दौड़ लगाता, […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 21 – चंद्रज्योति की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 21 अगली सुबह जब राजा भोज पुनः उस दिव्य सिंहासन पर बैठने का प्रयत्न करने लगे, तो उसी क्षण उनके सामने इक्कीसवीं पुतली चंद्रज्योति प्रकट हुई। वह चमकती हुई रौशनी की तरह उनके सम्मुख अवतरित हुई और मनोहर स्वर में बोली कि वह विक्रमादित्य के पवित्र और शक्तिमान सिंहासन की इक्कीसवीं पुतली […]

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महर्षि वाल्मीकि का जीवन और रामकथा की दिव्य उत्पत्ति – 2

महर्षि वाल्मीकि का जीवन अत्यंत अद्भुत और प्रेरणादायक है। एक समय वह एक साधारण शिकारी थे जो अपने जीवन में असंख्य पाप और अपराध करते थे। जानवरों का शिकार करना उनका रोज़ का काम था। उसी दौरान एक दिन उन्हें मार्ग में कुछ तपस्वी ऋषि मिले। शिकारी ने सोचा कि वह उन्हें लूटकर अपने परिवार […]

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दत्तात्रेय-का-भोजन-और-चमत्कार---Feeding-Dattatreya-Bestows-Miracles

दत्तात्रेय का भोजन और चमत्कार – Feeding Dattatreya Bestows Miracles

दत्तात्रेय का भोजन और चमत्कार एक गरीब ब्राह्मण दंपत्ति थे – राजा शर्मा और उनकी पत्नी सुमती। उनके अनेक संतानें हुईं, परंतु केवल दो ही जीवित बच पाईं: एक अंधा पुत्र और दूसरा लंगड़ा पुत्र। उनके परिवार की परंपरा थी कि दोपहर में ब्राह्मण अतिथियों को भोजन कराए बिना स्वयं भोजन नहीं करते। एक दिन, […]

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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: राजधर्म का न्याय भाग चौबीस

विक्रम और बेताल: राजधर्म का न्याय रात का सन्नाटा अपने चरम पर था। घने जंगल की पगडंडी पर राजा विक्रम सिंह एक बार फिर उस प्रेत—बेताल—को अपने कंधे पर उठाए श्मशान की ओर बढ़ रहे थे। पेड़ों की सरसराहट, दूर कहीं झिंगुरों की आवाज़ और हल्की ठंडी हवा उस यात्रा को और भी रहस्यमय बना […]

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