हिंदी कहानियाँ

लेटेस्ट कहानियाँ

और पढ़ें

भेड़िया-और-सच्चा-कुत्ता-–-The-Wolf-and-the-Loyal-Dog

भेड़िया और वफादार कुत्ता – The Wolf and the Loyal Dog

भेड़िया और वफादार कुत्ता एक बड़ा सा गाँव था, जहाँ चारों तरफ हरियाली फैलती थी और दूर तक गेहूँ के खेत चमकते थे। गाँव के लोग मेहनती थे और रात को खेतों की रखवाली करना सबसे कठिन कामों में गिना जाता था। कई बार जंगली जानवर खेत में घुसने की कोशिश करते, इसलिए गाँव वाले […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-1-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 1 – रत्नमंजरी की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 1 एक सुंदर गुड़िया अचानक तेज़ प्रकाश से घिरी और कुछ ही क्षणों में वह एक दिव्य और तेजस्वी स्त्री में बदल गई। उसके चेहरे पर अद्भुत चमक थी। वह मधुर पर दृढ़ स्वर में बोली,“राजा भोज, मैं रत्नमंजरी हूँ। हम इसलिए हँसे क्योंकि आप उस महान राजा जैसे नहीं हैं, जो […]

Continue Reading
कोयल-और-कठफोड़वा---The-Cuckoo-and-the-Woodpecker

कोयल और कठफोड़वा – The Cuckoo and the Woodpecker

कोयल और कठफोड़वा  घने जंगल के बीच एक पुराना सा पेड़ खड़ा था जिसकी शाखाओं पर अलग-अलग पक्षियों के घर बसे थे। उसी पेड़ के एक ऊँचे हिस्से में कठफोड़वा का मजबूत और साफ-सुथरा घोंसला था। कठफोड़वा मेहनती था और सुबह से शाम तक अपनी चोंच से पेड़ को ठक-ठक करता रहता था, ताकि कीड़े […]

Continue Reading
शिव ने बालक का दूध पिया - Tiru Gnana Sambandar of Sirkali

शिव ने बालक का दूध पिया – Tiru Gnana Sambandar of Sirkali

शिव ने बालक का दूध पिया तमिलनाडु के सिरकाली में गुरु ज्ञान संबंदर की कहानी अद्भुत है। उनके पिता प्रतिदिन शिव मंदिर जाते और भगवान को नैवेद्य के रूप में दूध अर्पित करते। भगवान को अर्पित करने के बाद पिता उस दूध को वापस घर लाते और छोटे बालक ज्ञान संबंदर को पिलाते। एक दिन, […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-22-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 22 – अनुरोधवती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 22 जब राजा भोज सिंहासन पर बैठने हेतु अग्रसर हुए, तो बाईसवीं गुड़िया उनके सामने आई और विनम्र स्वर में बोली कि वह उन्हें राजा विक्रमादित्य के एक विशिष्ट गुण का प्रसंग सुनाएगी। उसने अपना परिचय देते हुए कहा कि उसका नाम अनुरोधवती है और वह जानना चाहती है कि क्या राजा […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-21-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 21 – चंद्रज्योति की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 21 अगली सुबह जब राजा भोज पुनः उस दिव्य सिंहासन पर बैठने का प्रयत्न करने लगे, तो उसी क्षण उनके सामने इक्कीसवीं पुतली चंद्रज्योति प्रकट हुई। वह चमकती हुई रौशनी की तरह उनके सम्मुख अवतरित हुई और मनोहर स्वर में बोली कि वह विक्रमादित्य के पवित्र और शक्तिमान सिंहासन की इक्कीसवीं पुतली […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-10-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 10 – प्रभावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 10 दसवें दिन जब राजा भोज एक बार फिर सिंहासन के निकट पहुँचे तो दसवीं गुड़िया प्रभावती प्रकट हुई। वह प्रकाश से दमकती हुई बाहर आई और राजा भोज से बोली कि वह उन्हें एक ऐसी कथा सुनाएगी जिसमें राजा विक्रमादित्य का असाधारण पराक्रम और त्याग छिपा है। उसने स्पष्ट कहा कि […]

Continue Reading
दानवीर कर्ण का त्याग - Karna’s Benevolence

दानवीर कर्ण का त्याग – Karna’s Benevolence

दानवीर कर्ण का त्याग बारिश की झड़ी लगी हुई थी। मूसलाधार वर्षा ने सब कुछ भिगो दिया था। उसी बीच एक ब्राह्मण यज्ञ की सामग्री जुटाने के लिए निकला था। उसे यज्ञ के लिए सूखी लकड़ियों की आवश्यकता थी, किंतु वर्षा के कारण बाहर का समस्त काष्ठ भीगा हुआ था। निराश ब्राह्मण सबसे पहले हस्तिनापुर […]

Continue Reading
हाथी-और-चूहों-का-हुजूम-_-The-Elephant-and-the-Mice

हाथी और चूहों का हुजूम – The Elephant and the Mice

हाथी और चूहों का हुजूम  जंगल के बीचोंबीच एक पुराना रास्ता था जिसे हर दिन कई जानवर इस्तेमाल करते थे। उसी रास्ते के पास एक सूखा तालाब था, जिसके किनारों पर चूहों का एक बड़ा झुंड रहता था। यह जगह उनके लिए सुरक्षित थी क्योंकि आसपास घास थी, पेड़ों के खोखले तनों में उनके बिल […]

Continue Reading
singhasan-battisi-story-24-in-hindi

सिंहासन बत्तीसी कथा 24 – करुणावती की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 24 चौबीसवें दिन जब राजा भोज सिंहासन के समीप पहुँचे तो चौबीसवीं पुतली करुणावती प्रकट हुई और बोली कि वे पहले राजा विक्रमादित्य की कथा सुनें और फिर निर्णय लें कि वे इस अद्भुत सिंहासन पर बैठने योग्य हैं या नहीं। यह कहकर वह कथा सुनाने लगी। उसने बताया कि विक्रमादित्य अपनी […]

Continue Reading