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विक्रम-और-बेताल-Vikram-and-Betal

विक्रम और बेताल: मेहनत और भाग्य की परीक्षा भाग इक्कीस

विक्रम और बेताल: मेहनत और भाग्य की परीक्षा रात गहरी होती जा रही थी। श्मशान की चिता से उठती मंद लपटें आसमान में अजीब-सी रौशनी फैला रही थीं। पूरा वातावरण भय, मरघट और रहस्य से भरा हुआ था। लेकिन राजा विक्रम एक बार फिर बेताल को पकड़ने के लिए निर्भीकता से आगे बढ़ रहे थे। […]

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बोलने-वाली-झील-की-परी-The-Fairy-of-the-Whispering-Lake

बोलने वाली झील की परी – The Fairy of the Whispering Lake

बोलने वाली झील की परी हरे-भरे जंगलों के बीच एक शांत और चौड़ी झील थी जिसे लोग फुसफुसाती झील कहते थे क्योंकि वहाँ की हवा और पानी किसी से भी बातें कर लेते थे। पानी इतना साफ था कि उसमें आसमान, पेड़ और इंसान की भावनाएँ तक दिख जाती थीं। रात में झील हल्की नीली […]

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नन्ही-तितली-परी---Tiny-Butterfly-Fairy

नन्ही तितली परी – Tiny Butterfly Fairy

नन्ही तितली परी नीले पहाड़ों के पीछे एक शांत और रंगों से भरी घाटी थी, जिसे लोग रूपनगर कहते थे। यहाँ हर सुबह सूरज की किरणें ऐसे गिरती थीं जैसे सोने की हल्की बारिश हो रही हो। इस घाटी में फूल सिर्फ फूल नहीं थे, वे हवा के साथ गुनगुनाते थे। पत्तों में हल्की चमक […]

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श्रवण कुमार का श्राप और दशरथ – The Curse on Dasaratha

श्रवण कुमार का श्राप और दशरथ महान राजा दशरथ, जो श्री राम के पिता थे, एक बार शिकार पर गए। यह घटना श्री राम के जन्म से पहले की है। दशरथ ‘शब्दभेदी बाण’ चलाने में निपुण थे, यानी वह केवल ध्वनि सुनकर ही, बिना प्राणी को देखे, उस दिशा में बाण चला सकते थे और […]

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रहस्यमयी घंटी की सीख - The Lesson From the Mysterious Bell

रहस्यमयी घंटी की सीख – The Lesson From the Mysterious Bell

रहस्यमयी घंटी की सीख गाँव हरियापुर चारों तरफ फैली हरियाली, मिट्टी की पगडंडियों और शांत वातावरण वाला एक खूबसूरत गाँव था। यहाँ रहने वाले लोग सीधी, सच्ची और मेहनती जीवनशैली में विश्वास रखते थे। इसी गाँव में मीरा नाम की एक समझदार और दयालु लड़की रहती थी, जो केवल पढ़ाई में ही नहीं बल्कि अच्छे […]

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पेंसिल की सीख

राज नाम का एक लड़का अपनी अंग्रेजी की परीक्षा में कम अंक आने से दुखी था। वह अपने कमरे में बैठा था तभी उसकी दादी आईं और उसे सांत्वना दी। दादी उसके पास बैठ गईं और उसे एक पेंसिल दी। राज हैरानी से दादी को देखने लगा और बोला कि इतने बुरे नतीजे के बाद […]

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दानवीर कर्ण का त्याग - Karna’s Benevolence

दानवीर कर्ण का त्याग – Karna’s Benevolence

दानवीर कर्ण का त्याग बारिश की झड़ी लगी हुई थी। मूसलाधार वर्षा ने सब कुछ भिगो दिया था। उसी बीच एक ब्राह्मण यज्ञ की सामग्री जुटाने के लिए निकला था। उसे यज्ञ के लिए सूखी लकड़ियों की आवश्यकता थी, किंतु वर्षा के कारण बाहर का समस्त काष्ठ भीगा हुआ था। निराश ब्राह्मण सबसे पहले हस्तिनापुर […]

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kishkindha-kanda-ki-pavan-katha-6

किष्किन्धा काण्ड की पावन कथा – 6

किष्किन्धा काण्ड की पावन कथा और राम-सुग्रीव भेंट व हनुमान की कूटनीति ऋष्यमूक पर्वत के शिखर पर सुग्रीव अपने चार मित्रों के साथ बैठा था। उसकी दृष्टि पर्वत के चारों दिशाओं को सतर्कता से छान रही थी। वह अपने बड़े भाई बाली और उसके अनुचरों से अत्यंत भयभीत था। तभी उसने दो तरुण पुरुषों को […]

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एकता में ही बल है - Together we stand, Divided we fall

एकता में ही बल है – Together we stand, Divided we fall

एकता में ही बल है एक समय की बात है, एक बूढ़े पिता थे और उनके चार पुत्र थे। चारों पुत्र अब युवावस्था में आ चुके थे। हर कोई बीस के दशक में था और दुनिया को जीतने के लिए तैयार था। वे सभी शिक्षित थे, पर समस्या यह थी कि वे आपस में एक […]

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सिंहासन बत्तीसी कथा 31 – कौशल्या की कथा

सिंहासन बत्तीसी कथा 31 इकतीसवें दिन जब राजा भोज पुनः सिंहासन पर बैठने आए, तो इकतीसवीं गुड़िया उनके सामने प्रकट हुई और राजा विक्रमादित्य से जुड़ी एक कथा सुनाने लगी। उसने अपना परिचय देते हुए कहा कि वह कौशल्या है, इस दिव्य सिंहासन की इकतीसवीं गुड़िया। उसने राजा भोज से कहा कि जब स्वयं विक्रमादित्य […]

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